{"_id":"5c704abcbdec2259c53e1dd1","slug":"61550863036-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बसपाइयों में जोश, सपा खामोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बसपाइयों में जोश, सपा खामोश
विज्ञापन
बसपाइयों में जोश, सपा खामोश
जिले की तीनों लोकसभा सीट बसपा के खाते में जाने से सपाइयों में मायूसी
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से संपर्क बढ़ाने में जुटे कई दावेदार
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सपा-बसपा गठबंधन में सीटों के एलान के बाद जिले की राजनीतिक फिजा गर्म हो गई है। तीनों लोकसभा सीट पार्टी के खाते में जाने से बसपाई पूरे जोश में हैं तो वहीं सपाइयों में मायूसी छा गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के फैसले के चलते वह भले ही खुलकर अपनी पीड़ा जाहिर न कर पा रहे हों, लेकिन दबी जुबान वह मानते हैं कि उनका मनोबल टूटा है। टिकट की कतार में खड़े कई पुराने सपाई अब प्रगतिशील समाजवादी से संपर्क बढ़ाने में जुट गए हैं। टिकट की घोषणा के बाद यह भागदौड़ और बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
वर्ष 2014 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे। लिहाजा जिले की देवरिया सदर, सलेमपुर और बांसगांव (सुरक्षित) तीनों संसदीय सीटें बसपा के खाते में जाने की पहले से ही चर्चा थी। गुरुवार को इसकी औपचारिक घोषणा भी हो गई। सलेमपुर सीट पर बसपा ने प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को प्रभारी घोषित किया है तो सदर पर पूर्व सांसद गोरख जायसवाल के दामाद विनोद जायसवाल को प्रभारी बनाया है। दोनों ने ही चुनावी अभियान की शुरुआत भी कर दी है। सीटों के एलान से पूर्व कई सपाई भी यहां से दावेदारी पेश कर रहे थे। शहर में जगह-जगह उन्होंने बैनर-होर्डिंग लगवाकर अपने मंसूबे जाहिर भी कर दिए थे और पूरे जोर-शोर से प्रचार में उतर गए थे। उनके कद और गतिविधियों से राजनीतिक हलके में यह माना जा रहा था कि सीट सपा के खाते में गई तो उनकी दावेदारी तय है। अब बसपा के खाते में सीट जाने से उनके मंसूबों पर पानी फिर गया है। हालांकि, चुनाव लड़ने की इच्छा खत्म नहीं हुई है। लिहाजा, कई दावेदार सपा से अलग हुए शिवपाल यादव की पार्टी से संपर्क साधने में जुट गए हैं। पुराने संबंधों का हवाला देकर पार्टी में पैठ बनाकर टिकट हथियाने की जुगत भिड़ाई जा रही है। उनका कहना है कि भतीजा हो चाचा, विचारधारा तो समाजवादी ही है। अगर इससे भी टिकट मिला तो समाजवाद के पुराने साथियों का समर्थन भी उन्हें इसी तरह आसानी से मिल जाएगा। उधर, सीटें हाथ से जाने के बाद सपा के कई नेताओं ने अपनी सक्रियता भी घटा दी है। जीवन भर साइकिल के लिए चलने वाले अब हाथी को रेस में लाने के लिए खुद को तैयार नहीं कर पा रहे। बस पार्टी अध्यक्ष के निर्देश और पद की लाज रखने के लिए वे चुप्पी साधे हुए हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक परिदृश्य में अभी कई बदलावों को तय माना जा रहा है। इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। सपा जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव का कहना है कि चुनाव में गठबंधन को जीत दिलाने के एकमात्र मकसद से काम करते हुए सभी कार्यकर्ता मजबूती से खड़े हैं। जल्द ही इसका असर भी दिखने लगेगा।
विज्ञापन
जिले की तीनों लोकसभा सीट बसपा के खाते में जाने से सपाइयों में मायूसी
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से संपर्क बढ़ाने में जुटे कई दावेदार
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सपा-बसपा गठबंधन में सीटों के एलान के बाद जिले की राजनीतिक फिजा गर्म हो गई है। तीनों लोकसभा सीट पार्टी के खाते में जाने से बसपाई पूरे जोश में हैं तो वहीं सपाइयों में मायूसी छा गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के फैसले के चलते वह भले ही खुलकर अपनी पीड़ा जाहिर न कर पा रहे हों, लेकिन दबी जुबान वह मानते हैं कि उनका मनोबल टूटा है। टिकट की कतार में खड़े कई पुराने सपाई अब प्रगतिशील समाजवादी से संपर्क बढ़ाने में जुट गए हैं। टिकट की घोषणा के बाद यह भागदौड़ और बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
वर्ष 2014 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे। लिहाजा जिले की देवरिया सदर, सलेमपुर और बांसगांव (सुरक्षित) तीनों संसदीय सीटें बसपा के खाते में जाने की पहले से ही चर्चा थी। गुरुवार को इसकी औपचारिक घोषणा भी हो गई। सलेमपुर सीट पर बसपा ने प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को प्रभारी घोषित किया है तो सदर पर पूर्व सांसद गोरख जायसवाल के दामाद विनोद जायसवाल को प्रभारी बनाया है। दोनों ने ही चुनावी अभियान की शुरुआत भी कर दी है। सीटों के एलान से पूर्व कई सपाई भी यहां से दावेदारी पेश कर रहे थे। शहर में जगह-जगह उन्होंने बैनर-होर्डिंग लगवाकर अपने मंसूबे जाहिर भी कर दिए थे और पूरे जोर-शोर से प्रचार में उतर गए थे। उनके कद और गतिविधियों से राजनीतिक हलके में यह माना जा रहा था कि सीट सपा के खाते में गई तो उनकी दावेदारी तय है। अब बसपा के खाते में सीट जाने से उनके मंसूबों पर पानी फिर गया है। हालांकि, चुनाव लड़ने की इच्छा खत्म नहीं हुई है। लिहाजा, कई दावेदार सपा से अलग हुए शिवपाल यादव की पार्टी से संपर्क साधने में जुट गए हैं। पुराने संबंधों का हवाला देकर पार्टी में पैठ बनाकर टिकट हथियाने की जुगत भिड़ाई जा रही है। उनका कहना है कि भतीजा हो चाचा, विचारधारा तो समाजवादी ही है। अगर इससे भी टिकट मिला तो समाजवाद के पुराने साथियों का समर्थन भी उन्हें इसी तरह आसानी से मिल जाएगा। उधर, सीटें हाथ से जाने के बाद सपा के कई नेताओं ने अपनी सक्रियता भी घटा दी है। जीवन भर साइकिल के लिए चलने वाले अब हाथी को रेस में लाने के लिए खुद को तैयार नहीं कर पा रहे। बस पार्टी अध्यक्ष के निर्देश और पद की लाज रखने के लिए वे चुप्पी साधे हुए हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक परिदृश्य में अभी कई बदलावों को तय माना जा रहा है। इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। सपा जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव का कहना है कि चुनाव में गठबंधन को जीत दिलाने के एकमात्र मकसद से काम करते हुए सभी कार्यकर्ता मजबूती से खड़े हैं। जल्द ही इसका असर भी दिखने लगेगा।
विज्ञापन