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कलराज का पयासी विकास को प्यासी
Updated Tue, 08 Aug 2017 11:24 PM IST
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सुधीर श्रीवास्तव
देवरिया। केंद्रीय मंत्री और सांसद कलराज मिश्र का गोद लिया गांव पयासी आज भी विकास को ‘प्यासी’ है। विकास के नाम पर सिर्फ बिना तार के खंभे और पक्के मकानों के सामने सोलर लाइट लगे दिखेंगे। सड़कों पर बने गड्ढे विकास को मुंह चिढ़ाती हैं। इंटर की पढ़ाई के लिए गांव के बच्चों को नाव से नदी पार मझौलीराज जाना पड़ता है। राजनीतिक दांवपेंच के कारण गंडक नदी पर पुल का मसला वर्षों से लटका है। गांव के लोग यह कहकर चुटकी लेते हैं कि पयासी का विकास भले न हुआ हो, लेकिन कलराज ने गांव का नाम राष्ट्रीय क्षितिज पर जरूर ला दिया है।
कलराज जब देवरिया से सांसद का चुनाव लड़ने आए थे, तो यह कहकर सहानुभूति हासिल करने का प्रयास किया था कि वह भी इसी जिले के पयासी गांव के रहने वाले हैं। उनके पूर्वजों की पयासी जन्मस्थली रही है। पीएम नरेंद्र मोदी ने जब सांसदों से अपने संसदीय क्षेत्र के एक गांव गोद लेने की बात कही, तो कलराज ने पयासी को चुना। इसके बाद पयासी के लोगों को लगा कि गांव का कायाकल्प हो जाएगा। तीन साल बाद भी हालात जस के तस हैं। गांव में बिना तार के खंभे खड़े हैं। गांव के लोगों को इन खंभों में तार लगने का इंतजार है। मुख्य मार्ग से गांव को जोड़ने वाली सड़कें पक्की तो जरूर हैं, लेकिन गड्ढों की भरमार है। जुलाई में केंद्रीय मंत्री पयासी गांव में ‘सोलर चरखा उद्योग’ का उद्घाटन करने गए थे। तब अधिकारियों ने गांव की सड़कों को लकदक करा दिया था। बरसात में सड़कें उखड़ने लगी हैं। जिस स्थान पर सोलर चरखा उद्योग का उद्घाटन हुआ है, वहां काम शुरू नहीं हो पाया है। सिर्फ सफेद-पीले झंडे विकास के इंतजार में हैं। गांव के बाहर से आने वाले लोग इसे देखकर रुक जाते हैं। गांव के लोगों से पूछते हैं कि भाई ये क्या है, तो उनका कहना होता है कि यहां कलराज उद्योग लगवा रहे हैं।
गांव में विकास में भेदभाव भी साफ नजर आता है। पयासी में ओबीसी की आबादी सबसे अधिक है। इसके बाद ब्राह्मण और ठाकुर बिरादरी के लोग रहते हैं। गांव में पक्के मकानों के सामने सोलर लाइट लगी हैं, लेकिन कच्चे मकानों के सामने रात में उजाला नहीं होता। वजह है कि यहां सोलर लाइट लगवाए ही नहीं गए। कलराज जब भी देवरिया आते हैं तो पयासी में विकास कार्यों का ढ़िढोरा पीटने से पीछे नहीं हटते, लेकिन गांव की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गांव का एक तबका कलराज की तारीफ करने से पीछे नहीं हटता तो दूसरा कमियां गिनाने में लगा है। भाजपा की सरकार होने के बावजूद न्यू पीएचसी पर पूर्णकालिक चिकित्सक की तैनाती नहीं है। फार्मासिस्ट के सहारे मरीजों का इलाज हो रहा है। न्यू पीएचसी परिसर में नया आरओ प्लांट लगा है। गांव के लोग यहां से पानी भरकर ले जाते हैं। परिषदीय विद्यालय के सामने पानी की टंकी बनकर तैयार है, लेकिन काम नहीं कर रहा है। पयासी को आदर्श गांव बताने के लिए 2014-15 में 11.14 लाख रुपये की लागत से तोरणद्वार बनवाया गया है।
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कलराज के पयासी में अखिलेश का ‘बस्ता’
पयासी गांव में एक ही कैंपस में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। प्राथमिक में 170 बच्चों का नामांकन है। जबकि पूर्व माध्यमिक में 116 बच्चों का। परिषदीय विद्यालयों का ड्रेस बदल चुका है, लेकिन बच्चे अब भी खाकी वाले ड्रेस में ही विद्यालय आते हैं। सत्ता बदलने के बाद भी बच्चों के कंधों पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव की फोटो वाला बैग लटकता है। प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक नंदलाल ने बताया कि जल्द ही नया ड्रेस बच्चों को दिया जाएगा। परिषदीय विद्यालय कैंपस में लगा हैंडपंप दूषित पानी उगल रहा है।
कलराज के कद के हिसाब से विकास नहीं
पयासी की ग्राम प्रधान रीना सिंह हैं। उनके पति राजेश सिंह ने कहा कि कलराज ने गांव को राष्ट्रीय नक्शे पर ला दिया है, लेकिन विकास में पीछे है। इंटर की पढ़ाई के लिए गांव में कोई कॉलेज नहीं है। मुख्तार सिंह ने कहा कि कलराज ने करीब 250 शौचालयों का निर्माण कराया है। कलराज से विकास की जो उम्मीद थी पूरी होती नहीं दिख रही है। अजय यादव ने कहा कि कलराज के कद के हिसाब से गांव का विकास नहीं हुआ है। नोनापार से पयासी की सड़क जर्जर है। देवाजी चौहान ने कहा कि आरओ प्लांट के लिए गांववालों से जमीन ली गई, लेकिन अब तक चालू नहीं हो पाया है।
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देवरिया। केंद्रीय मंत्री और सांसद कलराज मिश्र का गोद लिया गांव पयासी आज भी विकास को ‘प्यासी’ है। विकास के नाम पर सिर्फ बिना तार के खंभे और पक्के मकानों के सामने सोलर लाइट लगे दिखेंगे। सड़कों पर बने गड्ढे विकास को मुंह चिढ़ाती हैं। इंटर की पढ़ाई के लिए गांव के बच्चों को नाव से नदी पार मझौलीराज जाना पड़ता है। राजनीतिक दांवपेंच के कारण गंडक नदी पर पुल का मसला वर्षों से लटका है। गांव के लोग यह कहकर चुटकी लेते हैं कि पयासी का विकास भले न हुआ हो, लेकिन कलराज ने गांव का नाम राष्ट्रीय क्षितिज पर जरूर ला दिया है।
कलराज जब देवरिया से सांसद का चुनाव लड़ने आए थे, तो यह कहकर सहानुभूति हासिल करने का प्रयास किया था कि वह भी इसी जिले के पयासी गांव के रहने वाले हैं। उनके पूर्वजों की पयासी जन्मस्थली रही है। पीएम नरेंद्र मोदी ने जब सांसदों से अपने संसदीय क्षेत्र के एक गांव गोद लेने की बात कही, तो कलराज ने पयासी को चुना। इसके बाद पयासी के लोगों को लगा कि गांव का कायाकल्प हो जाएगा। तीन साल बाद भी हालात जस के तस हैं। गांव में बिना तार के खंभे खड़े हैं। गांव के लोगों को इन खंभों में तार लगने का इंतजार है। मुख्य मार्ग से गांव को जोड़ने वाली सड़कें पक्की तो जरूर हैं, लेकिन गड्ढों की भरमार है। जुलाई में केंद्रीय मंत्री पयासी गांव में ‘सोलर चरखा उद्योग’ का उद्घाटन करने गए थे। तब अधिकारियों ने गांव की सड़कों को लकदक करा दिया था। बरसात में सड़कें उखड़ने लगी हैं। जिस स्थान पर सोलर चरखा उद्योग का उद्घाटन हुआ है, वहां काम शुरू नहीं हो पाया है। सिर्फ सफेद-पीले झंडे विकास के इंतजार में हैं। गांव के बाहर से आने वाले लोग इसे देखकर रुक जाते हैं। गांव के लोगों से पूछते हैं कि भाई ये क्या है, तो उनका कहना होता है कि यहां कलराज उद्योग लगवा रहे हैं।
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गांव में विकास में भेदभाव भी साफ नजर आता है। पयासी में ओबीसी की आबादी सबसे अधिक है। इसके बाद ब्राह्मण और ठाकुर बिरादरी के लोग रहते हैं। गांव में पक्के मकानों के सामने सोलर लाइट लगी हैं, लेकिन कच्चे मकानों के सामने रात में उजाला नहीं होता। वजह है कि यहां सोलर लाइट लगवाए ही नहीं गए। कलराज जब भी देवरिया आते हैं तो पयासी में विकास कार्यों का ढ़िढोरा पीटने से पीछे नहीं हटते, लेकिन गांव की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गांव का एक तबका कलराज की तारीफ करने से पीछे नहीं हटता तो दूसरा कमियां गिनाने में लगा है। भाजपा की सरकार होने के बावजूद न्यू पीएचसी पर पूर्णकालिक चिकित्सक की तैनाती नहीं है। फार्मासिस्ट के सहारे मरीजों का इलाज हो रहा है। न्यू पीएचसी परिसर में नया आरओ प्लांट लगा है। गांव के लोग यहां से पानी भरकर ले जाते हैं। परिषदीय विद्यालय के सामने पानी की टंकी बनकर तैयार है, लेकिन काम नहीं कर रहा है। पयासी को आदर्श गांव बताने के लिए 2014-15 में 11.14 लाख रुपये की लागत से तोरणद्वार बनवाया गया है।
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कलराज के पयासी में अखिलेश का ‘बस्ता’
पयासी गांव में एक ही कैंपस में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। प्राथमिक में 170 बच्चों का नामांकन है। जबकि पूर्व माध्यमिक में 116 बच्चों का। परिषदीय विद्यालयों का ड्रेस बदल चुका है, लेकिन बच्चे अब भी खाकी वाले ड्रेस में ही विद्यालय आते हैं। सत्ता बदलने के बाद भी बच्चों के कंधों पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव की फोटो वाला बैग लटकता है। प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक नंदलाल ने बताया कि जल्द ही नया ड्रेस बच्चों को दिया जाएगा। परिषदीय विद्यालय कैंपस में लगा हैंडपंप दूषित पानी उगल रहा है।
कलराज के कद के हिसाब से विकास नहीं
पयासी की ग्राम प्रधान रीना सिंह हैं। उनके पति राजेश सिंह ने कहा कि कलराज ने गांव को राष्ट्रीय नक्शे पर ला दिया है, लेकिन विकास में पीछे है। इंटर की पढ़ाई के लिए गांव में कोई कॉलेज नहीं है। मुख्तार सिंह ने कहा कि कलराज ने करीब 250 शौचालयों का निर्माण कराया है। कलराज से विकास की जो उम्मीद थी पूरी होती नहीं दिख रही है। अजय यादव ने कहा कि कलराज के कद के हिसाब से गांव का विकास नहीं हुआ है। नोनापार से पयासी की सड़क जर्जर है। देवाजी चौहान ने कहा कि आरओ प्लांट के लिए गांववालों से जमीन ली गई, लेकिन अब तक चालू नहीं हो पाया है।