{"_id":"5a0c6fe14f1c1bd9538bd647","slug":"51510764513-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रुपया बना इंद्रदेव के जान का दुश्मन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रुपया बना इंद्रदेव के जान का दुश्मन
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:44 PM IST
विज्ञापन
खुखुन्दू के पकडी खास गांव में पिता के हत्या के बाद विलाप करती लडिकया।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विनय कुमार राय
खुखुंदू। रुपये के खातिर इकलौते बेटे ने पिता की हत्या कर दी। एक वर्ष पहले बेटे के घायल होने पर पिता इंद्रदेव तिवारी ने छह कट्ठा जमीन बेचकर इलाज कराया था। उन्हें क्या पता था औलाद ही जान का दुश्मन बन जाएगा।
पकड़ी खास के 80 वर्षीय इंद्रदेव तिवारी की इकलौते बेटे सत्येंद्र ने मंगलवार की रात हत्या कर दी। घटना की जानकारी इंद्रदेव की बेटियों और पत्नी को बुधवार सुबह हुई। इंद्रदेव की सात बेटियां और एक बेटा है। सात बेटियों में एक बेटा होने पर इंद्रदेव में बचपन में उसे खूब प्यार दिया। लोग कहते है कि बेटे के मुंह से निकलने वाली हर बात पिता पूरा करने की कोशिश करते थे। बहनें भी भाई के लिए जान छिड़कती थीं। इसी लाड़-प्यार ने उसे बिगाड़ दिया। पहले तो घर के लोग उसकी हरकतों को नजरअंदाज कर देते थे। यही वजह रही कि उसका मनोबल बढ़ता गया। संगत गलत हुआ तो सत्येंद्र नशे का आदी हो गया। घरवालों ने यह सोचकर उसकी शादी कर दी कि हो सकता है सुधर जाए, लेकिन वह गलत राह पर चलता रहा। पति के हरकतों से तंग आकर पत्नी किरन, दो बेटों और एक बेटी मायके में रहती है। लोगों का कहना है कि नशे के कारण ही एक साल पहले वह दुर्घटना में घायल हो गया था। तब पिता ने छह कठ्ठा जमीन बेचकर इलाज कराया। कुछ दिनों बात सत्येंद्र फिर पुरानी राह पकड़ ली। बुजुर्ग माता-पिता से आए दिन मारपीट करने लगा था। इस वजह से दोनों बारी-बारी बेटियों के यहां रहने लगे थे। चार दिन पहले गांव आए पिता को क्या पता था कि यह उनकी गांव की अंतिम यात्रा साबित होगी।
विज्ञापन
खुखुंदू। रुपये के खातिर इकलौते बेटे ने पिता की हत्या कर दी। एक वर्ष पहले बेटे के घायल होने पर पिता इंद्रदेव तिवारी ने छह कट्ठा जमीन बेचकर इलाज कराया था। उन्हें क्या पता था औलाद ही जान का दुश्मन बन जाएगा।
पकड़ी खास के 80 वर्षीय इंद्रदेव तिवारी की इकलौते बेटे सत्येंद्र ने मंगलवार की रात हत्या कर दी। घटना की जानकारी इंद्रदेव की बेटियों और पत्नी को बुधवार सुबह हुई। इंद्रदेव की सात बेटियां और एक बेटा है। सात बेटियों में एक बेटा होने पर इंद्रदेव में बचपन में उसे खूब प्यार दिया। लोग कहते है कि बेटे के मुंह से निकलने वाली हर बात पिता पूरा करने की कोशिश करते थे। बहनें भी भाई के लिए जान छिड़कती थीं। इसी लाड़-प्यार ने उसे बिगाड़ दिया। पहले तो घर के लोग उसकी हरकतों को नजरअंदाज कर देते थे। यही वजह रही कि उसका मनोबल बढ़ता गया। संगत गलत हुआ तो सत्येंद्र नशे का आदी हो गया। घरवालों ने यह सोचकर उसकी शादी कर दी कि हो सकता है सुधर जाए, लेकिन वह गलत राह पर चलता रहा। पति के हरकतों से तंग आकर पत्नी किरन, दो बेटों और एक बेटी मायके में रहती है। लोगों का कहना है कि नशे के कारण ही एक साल पहले वह दुर्घटना में घायल हो गया था। तब पिता ने छह कठ्ठा जमीन बेचकर इलाज कराया। कुछ दिनों बात सत्येंद्र फिर पुरानी राह पकड़ ली। बुजुर्ग माता-पिता से आए दिन मारपीट करने लगा था। इस वजह से दोनों बारी-बारी बेटियों के यहां रहने लगे थे। चार दिन पहले गांव आए पिता को क्या पता था कि यह उनकी गांव की अंतिम यात्रा साबित होगी।
विज्ञापन