{"_id":"59d90a654f1c1b59678b492a","slug":"51507396197-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सात साल बाद बारूद के विस्फोट से फिर दहला भिंगारी बाजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सात साल बाद बारूद के विस्फोट से फिर दहला भिंगारी बाजार
Updated Sat, 07 Oct 2017 10:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डॉ. मोतीलाल
भाटपाररानी। सात साल बाद शनिवार को एक बार फिर भिंगारी बाजार बारूद की ढेर के विस्फोट से दहल उठा। दो महिलाएं जिंदा कमरे के अंदर जल गईं थीं। एक की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी। बाजार के लोग विस्फोट की आवाज सुन उस घटना को याद कर घटनास्थल की ओर दौड़े पडे़। पूरे बाजार में एक घंटे तक जाम लग गया।
भिंगारी बाजार निवासी इशहाक मियां के पांच बेटे हलीम, वकील, अजीज, मुख्तार और सत्तार हैं। सभी पटाखा बनाने का काम करते हैं। लाइसेंस छोटे भाई वकील के नाम से है। बाकी पुलिस की मिलीभगत से कारोबार करते चले आ रहे हैं। साल साल पहले आठ जुलाई-2010 को दिन में डेढ़ बजे भिंगारी बाजार में हलीम के घर विस्फोट हुआ था। उस समय इतना तेज विस्फोट हुआ कि फैक्ट्री की दीवारों में दरारें पड़ गई थीं। उसमें हलीम की दो बेटियां नरगिस और रूखसाना कमरे में ही जल गईं थीं। उन्हें बाहर निकालने का मौका ही नहीं मिला था। इसने के अलावा महबूब और हसन गंभीर रूप से घायल हो गए थे। महबूब का इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
अवैध ढंग से फैक्ट्री चलने से नाराजगी
भिंगारी बाजार को बारूद की ढेर पर 24 घंटे खड़ा करने का दोष लोग पुलिस प्रशासन को दे रहे हैं। बाजार के दर्जनों लोगों का कहना है कि इस तरह का कारोबार गहन आबादी से दूर होना चाहिए। साथ ही उसका उचित लाइसेंस होना भी जरूरी है। पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से यह अवैध धंधा चल रहा है। यदि यही स्थिति रही तो कभी इससे भी बड़ी घटना हो सकती है।
विज्ञापन
विस्फोट से इन्कार कर रही पुलिस
भिंगारी बाजार में शनिवार को अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग लगने के बाद हुए जोरदार विस्फोट की घटना से पुलिस इन्कार कर रही है। जबकि इस आवाज दूर तक सुनाई दी है। लोगों का आरोप है कि गर्दन फंसती देख पुलिस घटना की लीपापोती में लगी है। उधर बम निरोधक दस्ता ने देर शाम का घटनास्थल का निरीक्षण किया।
विज्ञापन
भाटपाररानी। सात साल बाद शनिवार को एक बार फिर भिंगारी बाजार बारूद की ढेर के विस्फोट से दहल उठा। दो महिलाएं जिंदा कमरे के अंदर जल गईं थीं। एक की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी। बाजार के लोग विस्फोट की आवाज सुन उस घटना को याद कर घटनास्थल की ओर दौड़े पडे़। पूरे बाजार में एक घंटे तक जाम लग गया।
भिंगारी बाजार निवासी इशहाक मियां के पांच बेटे हलीम, वकील, अजीज, मुख्तार और सत्तार हैं। सभी पटाखा बनाने का काम करते हैं। लाइसेंस छोटे भाई वकील के नाम से है। बाकी पुलिस की मिलीभगत से कारोबार करते चले आ रहे हैं। साल साल पहले आठ जुलाई-2010 को दिन में डेढ़ बजे भिंगारी बाजार में हलीम के घर विस्फोट हुआ था। उस समय इतना तेज विस्फोट हुआ कि फैक्ट्री की दीवारों में दरारें पड़ गई थीं। उसमें हलीम की दो बेटियां नरगिस और रूखसाना कमरे में ही जल गईं थीं। उन्हें बाहर निकालने का मौका ही नहीं मिला था। इसने के अलावा महबूब और हसन गंभीर रूप से घायल हो गए थे। महबूब का इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
विज्ञापन
अवैध ढंग से फैक्ट्री चलने से नाराजगी
भिंगारी बाजार को बारूद की ढेर पर 24 घंटे खड़ा करने का दोष लोग पुलिस प्रशासन को दे रहे हैं। बाजार के दर्जनों लोगों का कहना है कि इस तरह का कारोबार गहन आबादी से दूर होना चाहिए। साथ ही उसका उचित लाइसेंस होना भी जरूरी है। पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से यह अवैध धंधा चल रहा है। यदि यही स्थिति रही तो कभी इससे भी बड़ी घटना हो सकती है।
विज्ञापन
विस्फोट से इन्कार कर रही पुलिस
भिंगारी बाजार में शनिवार को अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग लगने के बाद हुए जोरदार विस्फोट की घटना से पुलिस इन्कार कर रही है। जबकि इस आवाज दूर तक सुनाई दी है। लोगों का आरोप है कि गर्दन फंसती देख पुलिस घटना की लीपापोती में लगी है। उधर बम निरोधक दस्ता ने देर शाम का घटनास्थल का निरीक्षण किया।