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जलसे में 25 छात्रों को बांधी गई फजालत की पगड़ी
Updated Sat, 14 Apr 2018 11:32 PM IST
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देवरिया बद्दू खां में आयोजित मदरसा जामिया अरबिया मेराजुल उलूम में पगड़ी बाधने के बाद हाफीज कुरान।
- फोटो : अमर उजाला
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रामपुर कारखाना। राज्यसभा के पूर्व सदस्य ओबैदुल्लाह खां आजमी ने कहा कि तीन तलाक पर केंद्र सरकार बेवजह का भ्रम फैला रही है। शरीयत में साफ कहा गया है कि कोई भी पुरुष एक बार में तीन तलाक नहीं दे सकता। जैसे निकाह के लिए सभी को जानकारी दी जाती है, उसी तरह तलाक देने की वजह भी बतानी पड़ती है। वह देवरिया बुद्धु खां स्थित जामिया अरबिया मेराजुल उलूम परिसर में शुक्रवार की रात को आयोजित जलसा-ए-दस्तारबंदी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मदरसे में हिफ्ज की पढ़ाई पूरी करने वाले हाफिज-ए-कुरान को फजालत की पगड़ी बांधी गई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य अब्दुल रहीम बरकाती ने तिलावते कुरान की एक आयत से की। जमजम फतेहपुरी ने सब लोग मतलब के लिए प्यार करते हैं, शायरी पेश कर खूब वाहवाही लूटी। मासूम लखनवी ने नाम अहमद पे जान लुटाने वाले गजल प्रस्तुत किया। सलीक गोरखपुरी ने ‘जमीं पैदा नहीं होती, फलक पैदा नहीं होती’ नात शरीफ पेश किया। कारी हबीबुल कादरी ने कहा कि मां-बाप की सेवा करना इबादत है। झारखंड से आए मौलाना जुनेद ने कहा कि हराम का माल खाने से बेहतर है कि दुनिया से चले जाएं। इसके बाद मदरसे में हिफ्ज की पढ़ाई पूरी करने वाले दो दर्जन तालिब इल्मों को फजालत की पगड़ी बांधी गई। प्रबंधक मैनुद्दीन खान ने जलसे में आए लोगों के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान नियाज अहमद खान, वसीउल्लाह खान, राशिद खान, शोएब खान और खुर्शीद आलम आदि मौजूद रहे।
‘आजादी को बचाए रखने की जरूरत’
राज्यसभा के पूर्व सदस्य ओबैदुल्लाह खां आजमी ने मदरसा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आजादी को बचाए रखना आज के दौर में बहुत जरूरी है। अगर हिंदू से ‘ह’ और मुसलमान से ‘म’ मिलकर ‘हम’ बन जाएं तो देश को तरक्की पर राह पर जाने से कोई रोक नहीं सकता। देश में नफरत की खेती-बाड़ी की जा रही है। हिंदू-मुस्लिम को एक-दूसरे से लड़ाने की साजिश रची जा रही है। इससे सचेत रहने की जरूरत है। आजादी के पहले से ही दोनों को अंग्रेजों ने लड़ाया। अब इस दौर के नेता दोनों को लड़ा कर सत्ता हथियाने का जरिया बना रहे हैं। हमारे देश की तहजीब इस नफरत की राजनीति को माकूल जवाब देगी।
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कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य अब्दुल रहीम बरकाती ने तिलावते कुरान की एक आयत से की। जमजम फतेहपुरी ने सब लोग मतलब के लिए प्यार करते हैं, शायरी पेश कर खूब वाहवाही लूटी। मासूम लखनवी ने नाम अहमद पे जान लुटाने वाले गजल प्रस्तुत किया। सलीक गोरखपुरी ने ‘जमीं पैदा नहीं होती, फलक पैदा नहीं होती’ नात शरीफ पेश किया। कारी हबीबुल कादरी ने कहा कि मां-बाप की सेवा करना इबादत है। झारखंड से आए मौलाना जुनेद ने कहा कि हराम का माल खाने से बेहतर है कि दुनिया से चले जाएं। इसके बाद मदरसे में हिफ्ज की पढ़ाई पूरी करने वाले दो दर्जन तालिब इल्मों को फजालत की पगड़ी बांधी गई। प्रबंधक मैनुद्दीन खान ने जलसे में आए लोगों के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान नियाज अहमद खान, वसीउल्लाह खान, राशिद खान, शोएब खान और खुर्शीद आलम आदि मौजूद रहे।
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‘आजादी को बचाए रखने की जरूरत’
राज्यसभा के पूर्व सदस्य ओबैदुल्लाह खां आजमी ने मदरसा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आजादी को बचाए रखना आज के दौर में बहुत जरूरी है। अगर हिंदू से ‘ह’ और मुसलमान से ‘म’ मिलकर ‘हम’ बन जाएं तो देश को तरक्की पर राह पर जाने से कोई रोक नहीं सकता। देश में नफरत की खेती-बाड़ी की जा रही है। हिंदू-मुस्लिम को एक-दूसरे से लड़ाने की साजिश रची जा रही है। इससे सचेत रहने की जरूरत है। आजादी के पहले से ही दोनों को अंग्रेजों ने लड़ाया। अब इस दौर के नेता दोनों को लड़ा कर सत्ता हथियाने का जरिया बना रहे हैं। हमारे देश की तहजीब इस नफरत की राजनीति को माकूल जवाब देगी।
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