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भद्रा के उपरांत शुभ होगा रक्षाबंधन
Updated Sun, 06 Aug 2017 10:08 PM IST
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देवरिया। भाई-बहन के अटूट प्यार का पर्व रक्षाबंधन आज है। आज के दिन बहनें अपने भाई के दीर्घायु और यशस्वी होने की कामना से उनकी कलाई में राखी बांधती हैं। इस साल सुबह 10.30 से दोपहर 01.53 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त है।
ज्योतिषाचार्य विवेक उपाध्याय बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष भद्रा की स्थिति रहती है, किन्तु इस वर्ष खंड चंद्रग्रहण के कारण रक्षाबंधन के समय में काफी कमी हुई है। चूंकि खंड चंद्रग्रहण रात्रि 10.53 पर लग रहा है, जिसका मध्यकाल रात्रि 11.51 और मोक्ष का समय भारतीय समयानुसार रात्रि 12.48 बजे हैं। शास्त्रों के अनुसार चंद्रग्रहण के नौ घंटे पूर्व सूतक काल माना जाता है। इस कारण दोपहर 01.53 से ग्रहण का सूतक प्रारंभ हो जाएगा। ऐसी स्थिति में भद्रा के उपरांत और सूतक से पूर्व रक्षाबंधन करना शुभकारी होगा। प्राचीन समय में बहनें पीले रंग के कपड़े की पोटली में पीला सरसो, पुष्प, सुपारी आदि को ब्राह्मण से अभिमंत्रित कराकर अपने भाई के कलाई में बांधती थी। धीरे-धीरे यह परंपरा बदलती चली गई। आज के समय में तरह-तरह की राखियों का प्रचलन देखा जा रहा है जो हमारी परंपरा को आगे ले जा रहा है। आज भी कहीं-कहीं रक्षाबंधन के पर्व के दिन ब्राह्मणों से रक्षाबंधन कराने का विधान है।
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ज्योतिषाचार्य विवेक उपाध्याय बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष भद्रा की स्थिति रहती है, किन्तु इस वर्ष खंड चंद्रग्रहण के कारण रक्षाबंधन के समय में काफी कमी हुई है। चूंकि खंड चंद्रग्रहण रात्रि 10.53 पर लग रहा है, जिसका मध्यकाल रात्रि 11.51 और मोक्ष का समय भारतीय समयानुसार रात्रि 12.48 बजे हैं। शास्त्रों के अनुसार चंद्रग्रहण के नौ घंटे पूर्व सूतक काल माना जाता है। इस कारण दोपहर 01.53 से ग्रहण का सूतक प्रारंभ हो जाएगा। ऐसी स्थिति में भद्रा के उपरांत और सूतक से पूर्व रक्षाबंधन करना शुभकारी होगा। प्राचीन समय में बहनें पीले रंग के कपड़े की पोटली में पीला सरसो, पुष्प, सुपारी आदि को ब्राह्मण से अभिमंत्रित कराकर अपने भाई के कलाई में बांधती थी। धीरे-धीरे यह परंपरा बदलती चली गई। आज के समय में तरह-तरह की राखियों का प्रचलन देखा जा रहा है जो हमारी परंपरा को आगे ले जा रहा है। आज भी कहीं-कहीं रक्षाबंधन के पर्व के दिन ब्राह्मणों से रक्षाबंधन कराने का विधान है।
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