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लाई डिटेक्टर टेस्ट की नहीं मिली मंजूरी
Updated Fri, 05 Oct 2018 10:28 PM IST
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देवरिया। बालिका गृह कांड में आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने संबंधी एसआईटी की अर्जी को पाक्सो कोर्ट ने शुक्रवार को ठुकरा दी। कोर्ट ने इस मामले में एसआईटी और अभियोजन पक्ष की दलीलों को अपर्याप्त बताया। एसआईटी की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए तल्ख टिप्पणी भी की।
शासन के निर्देश पर गठित एसआईटी करीब दो माह से बालिका गृह कांड की जांच कर रही है। अभी तक कोई ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, मोहन त्रिपाठी व अधीक्षिका कंचनलता त्रिपाठी को रिमांड पर लेकर तीन दिनों तक पूछताछ भी की। बीते 28 सितंबर को एसआईटी ने आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की अर्जी दी थी। इस पर आरोपियों ने आपत्ति जताई थी। सुनवाई के बाद से पाक्सो कोर्ट के जज पीके शर्मा ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए जज पीके शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केएस पुत्तास्वामी के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए आरोपियों की भी सहमति जरूरी है, जबकि एसआईटी ने ऐसा कोई सहमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया है। यह टेस्ट कराने की समय सीमा गिरफ्तारी के 15 दिनों के अंदर की है, लेकिन 45 दिनों बाद प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। उन्होंने केस डायरी उपलब्ध कराने में देरी पर भी असंतोष जताया। फैसले को लेकर दिन भर एसआईटी के सदस्य कोर्ट परिसर में जमे रहे। देर शाम आदेश आने के बाद वह मायूस लौट गए।
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शासन के निर्देश पर गठित एसआईटी करीब दो माह से बालिका गृह कांड की जांच कर रही है। अभी तक कोई ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, मोहन त्रिपाठी व अधीक्षिका कंचनलता त्रिपाठी को रिमांड पर लेकर तीन दिनों तक पूछताछ भी की। बीते 28 सितंबर को एसआईटी ने आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की अर्जी दी थी। इस पर आरोपियों ने आपत्ति जताई थी। सुनवाई के बाद से पाक्सो कोर्ट के जज पीके शर्मा ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए जज पीके शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केएस पुत्तास्वामी के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए आरोपियों की भी सहमति जरूरी है, जबकि एसआईटी ने ऐसा कोई सहमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया है। यह टेस्ट कराने की समय सीमा गिरफ्तारी के 15 दिनों के अंदर की है, लेकिन 45 दिनों बाद प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। उन्होंने केस डायरी उपलब्ध कराने में देरी पर भी असंतोष जताया। फैसले को लेकर दिन भर एसआईटी के सदस्य कोर्ट परिसर में जमे रहे। देर शाम आदेश आने के बाद वह मायूस लौट गए।
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