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गर्भवती और तीमारदारों को सुननी पड़ती है फटकार
Updated Fri, 07 Jul 2017 10:23 PM IST
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देवरिया। जिला महिला अस्पताल का हाल बुरा है। यहां पहुंचने वाले मरीजों के साथ डॉक्टर और स्टॉफ नर्स अच्छा व्यवहार नहीं करती हैं। इससे गर्भवती और तीमारदारों को काफी दिक्कत हो रही हैं। सीएमएस से शिकायत के बाद भी कोई लाभ नहीं हो रहा है। यदि कोई मरीज कहीं से सिफारिश कर देता है तो उसकी तो शामत ही आ जाती है।
पिछले कई महीने जिला महिला अस्पताल की हालत ठीक नहीं चल रही है। यहां पहुंचने वाली गर्भवती और उनके परिवारवालों के साथ डॉक्टर, स्टॉफ नर्स के साथ ही अन्य कर्मचारी भी अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। बृहस्पतिवार को एक व्यक्ति अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर से कहा तो वह बिगड़ गई। उसने अपने किसी परिचित के माध्यम से सीएमओ के ड्राइवर से मदद मांगी। सीएमओ के ड्राइवर ने पहुंचकर डॉक्टर से देख लेने की सिफारिश कर दी। तत्काल तो डॉक्टर और स्टॉफ नर्स ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके जाते ही गर्भवती और उनके पति पर बिफर पड़ी। बोली, जुगाड़ से काम चलने वाला नहीं हैं। ज्यादा इधर-उधर करोगे तो मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर देंगे। पीड़ित का कहना था कि डॉक्टर ने कोई जांच नहीं किया। दो दिन बाद आने की बात कहते हुए जाने को कहा। सीएमएस से शिकायत की गई तो उनका कहना था कि क्या करें जब उनका कोई सुनता ही नहीं है। इस बाबत सीएमएस डॉ. माला सिन्हा का कहना है कि उनके पास तमाम काम रहते हैं। डॉक्टर और स्टॉफ नर्स को वह कितना समझा पाएंगी। सभी को मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करने की बात कही जाती है।
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पिछले कई महीने जिला महिला अस्पताल की हालत ठीक नहीं चल रही है। यहां पहुंचने वाली गर्भवती और उनके परिवारवालों के साथ डॉक्टर, स्टॉफ नर्स के साथ ही अन्य कर्मचारी भी अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। बृहस्पतिवार को एक व्यक्ति अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर से कहा तो वह बिगड़ गई। उसने अपने किसी परिचित के माध्यम से सीएमओ के ड्राइवर से मदद मांगी। सीएमओ के ड्राइवर ने पहुंचकर डॉक्टर से देख लेने की सिफारिश कर दी। तत्काल तो डॉक्टर और स्टॉफ नर्स ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके जाते ही गर्भवती और उनके पति पर बिफर पड़ी। बोली, जुगाड़ से काम चलने वाला नहीं हैं। ज्यादा इधर-उधर करोगे तो मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर देंगे। पीड़ित का कहना था कि डॉक्टर ने कोई जांच नहीं किया। दो दिन बाद आने की बात कहते हुए जाने को कहा। सीएमएस से शिकायत की गई तो उनका कहना था कि क्या करें जब उनका कोई सुनता ही नहीं है। इस बाबत सीएमएस डॉ. माला सिन्हा का कहना है कि उनके पास तमाम काम रहते हैं। डॉक्टर और स्टॉफ नर्स को वह कितना समझा पाएंगी। सभी को मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करने की बात कही जाती है।
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