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नेताओं की राजनीति का अखाड़ा बना शहीद का गांव

Sat, 16 Feb 2019 11:35 PM IST
Harishankar Tiwari हरिशंकर तिवारी
Updated Sat, 16 Feb 2019 11:35 PM IST
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नेताओं की राजनीति का अखाड़ा बना शहीद का गांव
शहीद विजय कुमार मौर्य के घर पहुंचे सांसद रवींद्र कुशवाहा और पूर्व विधायक गजाला लारी में नोकझोंक हुई। - फोटो : अमर उजाला
देवरिया। आतंकी हमले के बाद राजनीति न करने की बार-बार अपील के बावजूद शहीद विजय मौर्य का गांव छपिया जयदेव राजनीति का अखाड़ा बना रहा। गांव में पहुंच विभिन्न दलों के लोग अपने राजनीतिक नफे-नुकसान को देखकर अपना पक्ष रखने में जुटे रहे। कोई शहीद के परिजनों को एक करोड़ की मदद, दो नौकरी और सीएम को बुलाने की मांग कर रहा था तो कोई सरकार की संवेदनशीलता की दलील देते हुए परिजनों को सांत्वना देता रहा। आलम यह रहा कि कई बार टकराव की स्थिति भी बनी।
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भटनी क्षेत्र के छपिया जयदेव गांव निवासी सीआरपीएफ जवान विजय मौर्य गुरुवार को पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हो गए। शुक्रवार की सुबह से ही उनके घर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता पहुंचने लगे। सपा की पूर्व विधायक गजाला लारी और गुंजन यादव समर्थकों के साथ शहीद के घर पहुंचीं। पत्नी से मिलकर सांत्वना दीं। उन्होंने सरकार से एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग उठाई। इसी दौरान सलेमपुर सांसद रवींद्र कुशवाहा समर्थकों के साथ पहुंच गए। शहीद की पत्नी ने सांसद से सीएम को बुलाने की मांग कीं। बातचीत चल ही रही थी, तभी पूर्व विधायक गजाला लारी ने कहा कि सरकार ने सिर्फ 25 लाख रुपये दिए हैं, जबकि पूर्ववर्ती सपा सरकार के समय डिप्टी एसपी जियाउल हक की शहादत पर 50 लाख रुपये और नौकरी भी दिलाई गई थी। इस पर आपत्ति जताते हुए सांसद ने कहा कि वह शहीद की पत्नी से बात कर रहे हैं। जहां तक पूर्व की सरकार में मदद की बात है तो सपा सरकार जाति-धर्म देखकर काम करती थी, लेकिन भाजपा सरकार सबके लिए एक समान है। इसे लेकर सांसद और पूर्व विधायक के समर्थकों में तीखी नोक-झोंक हुई। माहौल बिगड़ता देख सांसद और उनके समर्थक बाहर चले गए। कुछ देर बाद पूर्व विधायक और उनके समर्थकों को कमरे से बाहर कर दिया गया। बताते हैं कि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा ने भी एक करोड़ रुपये मुआवजा और सीएम को बुलाने की मांग उठाई। इसे लेकर भी भाजपाइयों से बसपा कार्यकर्ताओं में नोक-झोंक हुई। कांग्रेस भी इसमें पीछे नहीं रही। पूरे दिन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों में शहीद को आर्थिक मदद दिलाने और सीएम को मौके पर बुलाने को लेकर वाद-प्रतिवाद चलता रहा। इसे देखकर आम लोग सभी दलों के नेताओं को कोसते नजर आए।
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