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कागजों में जननी सुरक्षा योजना, सरकारी अस्पतालों में घटा प्रसव

Mon, 03 Dec 2018 12:33 AM IST
Updated Mon, 03 Dec 2018 12:33 AM IST
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कागजों में जननी सुरक्षा योजना, सरकारी अस्पतालों में घटा प्रसव
कागज में जननी सुरक्षा योजना, सरकारी अस्पतालों में घटा प्रसव
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अभी तक लक्ष्य के सामने 6981 महिलाओं का कम हुआ प्रसव
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सामने आई चिंताजनक तस्वीर
शून्य प्रसव कराने वाली आशा और एएनएम पर नहीं हो रही कार्रवाई
नीलांबुज मिश्र
देवरिया। तमाम कोशिशों के बावजूद सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या घटती जा रही है। इसको लेकर जिम्मेदारों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। इसकी वजह स्वास्थ्य महकमे में आपसी तालमेल की कमी बताई जा रही है। आठ माह में लक्ष्य के सापेक्ष 6981 प्रसव कम हुआ है, जो चिंताजनक है।
शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के लिए सरकार जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके लिए गांवों में आशा, एएनएम की तैनाती की गई है। सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर जोर है। सीएचसी व पीएचसी में गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर इंतजाम किया गया है। बावजूद अस्पतालों में प्रसव की संख्या घट रहा है। वर्ष 2019-20 में जिले को मार्च तक 53,731 प्रसव कराने का लक्ष्य मिला है। आठ माह में 35,820 प्रसव होना चाहिए, लेकिन अभी तक सिर्फ 28,839 प्रसव हुआ। आठ माह में लक्ष्य के सापेक्ष 6,981 प्रसव कम हुआ है। पांच साल पूर्व तक यह जिला प्रसव के मामले में प्रदेश स्तर पर सातवें स्थान पर था, लेकिन अब 72वें स्थान पर पहुंच गया। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इसे लेकर डीएम अमित किशोर ने नाराजगी भी जताई थी और सीएमओ को कार्यप्रणाली में सुधार लाने की हिदायत दी थी। बावजूद विभागीय अफसर नहीं चेत रहे हैं। इस बाबत सीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रसव की संख्या कम होना गंभीर मामला है। इसके लिए मातहतों को हिदायत दिया गया है। इसे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
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योजना पर पानी फेर रहे एंबुलेंस चालक व आशा
देवरिया। सरकारी अस्पतालों में प्रसव संख्या घटने पर अनधिकृत रूप से चल रहे प्राइवेट अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाकर छापेमारी की। इसमें कई अस्पतालों में प्रसूताएं मिलीं, जिन्हें आशाओं ने कमीशन के फेर में वहां पहुंचाया था। रामनाथ देवरिया के एक निजी अस्पताल में आठ से अधिक प्रसूताओं का बयान भी एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह ने लिया था, लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं हुई। आज भी स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से मानकविहीन प्राइवेट अस्पताल शहर में संचालित हो रहे हैं। आशा और एंबुलेंस चालकों की मिलीभगत से अधिकांश गर्भवती महिलाओं का प्रसव प्राइवेट अस्पतालों में हो रहा है।
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साल दर साल घट रहा प्रसव
देवरिया। वर्ष 2016-17 में 48653 प्रसव जिले में हुआ था, जो लक्ष्य से कम था। वहीं, 2017-18 में इससे से भी कम 47,279 प्रसव हुआ। लगातार घट रहे प्रसव की संख्या से विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है। शासन भी इसको लेकर गंभीर है। प्रसव बढ़ाने के लिए पत्र के माध्यम से सीएमओ को निर्देश दिए हैं।


इनसेट
होनी थी कार्रवाई, बचा ली गई आशा-एएनएम
देवरिया। स्वास्थ्य विभाग बीच में अभियान चलाकर आशा और एएनएम के खिलाफ कार्रवाई की थी। 274 आशाओं ने एक भी प्रसव नहीं कराया था और 104 एएनएम कार्यों के प्रति लापरवाह पाई गई थी। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए एसीएमओ ने सीएमओ को लिखा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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