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कड़ी मेहनत और लगन से ही निकलेंगे ‘धोनी’: वेंकटपति
Updated Mon, 30 Jul 2018 10:53 PM IST
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जिला स्टेडियम में खिलाड़ियों को क्रिकेट के टिप्स देते वेंकट पति राजू।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। रविंद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में सोमवार को तीन दिवसीय नि:शुल्क क्रिकेट प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत हुई। इसमें भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर वेंकटपति राजू ने खिलाड़ियों को क्रिकेट की एडवांस तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
पूर्व क्रिकेटर ने बैडमिंटन हॉल में प्रोजेक्टर के जरिए स्पिन गेंदबाजी, बल्लेबाजी, क्षेत्ररक्षण, ग्राउंड में खेलने के दौरान ध्यान में रखी जाने वाली जरूरी बातें बताईं। उन्होंने कहा कि अब का क्रिकेट पहले की अपेक्षा काफी तेज हो गया है। फिटनेस का स्तर ऊंचा हो गया है। बिना यो-यो टेस्ट पास किए राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना संभव नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि 10 से 12 वर्ष की उम्र में ही खेल की शुरुआत की जाए। शुरू से ही कोच की देखरेख में कड़ी मेहनत और लगन से प्रैक्टिस की जाए तो यहां के बच्चे भी प्रदेश व देश की टीम में जा सकते है।
महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान भी एक छोटे शहर से निकले और आज पूरी दुनिया में अपने माइंड गेेेम, बल्लेबाजी, विकेटकीपिंग, फील्डिंग एवं खेल के सभी क्षेत्रों में अन्य खिलाड़ियों पर बढ़ती उम्र के बावजूद भारी पड़ते हैं। इस खेल में कॅरियर बनाना है तो सबसे जरूरी है कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास। कोच का गाइडेंस बहुत जरूरी है। शिविर में बहरीन क्रिकेट टीम के कोच प्रचुर शुक्ला ने बताया कि मंगलवार सुबह छह बजे क्रिकेट हॉस्टल के छात्र एवं साढ़े आठ बजे सीनियर खिलाड़ियों का सत्र आयोजित किया गया है। इस दौरान शिविर के दौरान जिला क्रीड़ाधिकारी केके पांडेय, छात्रावास के कोच कुुंवर विपिन कुुमार भूषण एवं अन्य सीनियर खिलाड़ी भी मौजूद रहे।
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पूर्व क्रिकेटर ने बैडमिंटन हॉल में प्रोजेक्टर के जरिए स्पिन गेंदबाजी, बल्लेबाजी, क्षेत्ररक्षण, ग्राउंड में खेलने के दौरान ध्यान में रखी जाने वाली जरूरी बातें बताईं। उन्होंने कहा कि अब का क्रिकेट पहले की अपेक्षा काफी तेज हो गया है। फिटनेस का स्तर ऊंचा हो गया है। बिना यो-यो टेस्ट पास किए राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना संभव नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि 10 से 12 वर्ष की उम्र में ही खेल की शुरुआत की जाए। शुरू से ही कोच की देखरेख में कड़ी मेहनत और लगन से प्रैक्टिस की जाए तो यहां के बच्चे भी प्रदेश व देश की टीम में जा सकते है।
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महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान भी एक छोटे शहर से निकले और आज पूरी दुनिया में अपने माइंड गेेेम, बल्लेबाजी, विकेटकीपिंग, फील्डिंग एवं खेल के सभी क्षेत्रों में अन्य खिलाड़ियों पर बढ़ती उम्र के बावजूद भारी पड़ते हैं। इस खेल में कॅरियर बनाना है तो सबसे जरूरी है कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास। कोच का गाइडेंस बहुत जरूरी है। शिविर में बहरीन क्रिकेट टीम के कोच प्रचुर शुक्ला ने बताया कि मंगलवार सुबह छह बजे क्रिकेट हॉस्टल के छात्र एवं साढ़े आठ बजे सीनियर खिलाड़ियों का सत्र आयोजित किया गया है। इस दौरान शिविर के दौरान जिला क्रीड़ाधिकारी केके पांडेय, छात्रावास के कोच कुुंवर विपिन कुुमार भूषण एवं अन्य सीनियर खिलाड़ी भी मौजूद रहे।
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