{"_id":"5bf04c50bdec2269945caef3","slug":"191542474832-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोजपुरी के लिए सिर्फ भाषण नहीं, काम करने की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोजपुरी के लिए सिर्फ भाषण नहीं, काम करने की जरूरत
Updated Sat, 17 Nov 2018 10:43 PM IST
विज्ञापन
दीनानाथ पांडेय राजकीय महिला महाविद्यलय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करती मुख्य अतिथि कल्पना पटवारी।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। प्रख्यात भोजपुरी गायिका कल्पना पटवारी ने भोजपुरी को मान सम्मान दिलाने के लिए उसे भाषा के रूप में आठवीं अनुसूची में शामिल कराने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी के लिए सिर्फ भाषण नहीं, काम करने की जरूरत है। सवाल उठाने से पहले यह भी देंखे कि हमने क्या किया। सब मिलकर प्रयास करेंगे, तभी यह संभव होगा। उन्होंने भोजपुरी एलबम के लिए सेंसर बोर्ड बनाने की भी वकालत की।
रविवार को बैतालपुर चीनी मिल परिसर में आयोजित पूर्वांचल प्रतिभा संगम में शामिल होने आईं कल्पना ने पूर्व संध्या पर पत्रकारों से बात की। भोजपुरी की समृद्धि के लिए सकारात्मक माहौल बनाने पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए बहुत कुछ हो रहा है और काफी कुछ करने की भी जरूरत है। हम जो परिवर्तन देखना चाहते हैं, उसे खुद भी करें। भोजपुरी के साथ यह उपेक्षात्मक रुख रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छा रही भोजपुरी अपने क्षेत्र में ही उपेक्षित है। यूपी-बिहार में पॉलीटिकल चेंजर बहुत हैं, बावजूद यहां से अब तक भोजपुरी के लिए प्रभावी आवाज नहीं उठ पाई है। असम की तरह यहां भी भोजपुरी के लिए बड़े जनांदोलन की बात कही। उन्होंने प्रेम और मिठास की भाषा कही जाने वाली भोजपुरी में अश्लीलता के बढ़ते चलन के सवाल पर कहा कि फिल्मों में सेंसर बोर्ड अपना काम कर रहा है। भोजपुरी एलबम पर थोड़ी आपत्ति है, इसके लिए भी सेंसर बोर्ड को प्रभावी करने की जरूरत है। चाहते सब बेहतरी हैं, लेकिन आगे कोई नहीं आता। कहा कि वह भिखारी ठाकुर की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। कहा कि गायन के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से युवाओं को परिचित कराने के लिए यूनिवर्सिटी, कॉलेज में जाकर छात्र-छात्राओं से मिल रही हैं। उन्हें अपनी लोक कलाओं के गौरव का अहसास करा रही हैं।
लोक गायन की समृद्ध विरासत को समझें : कल्पना
देवरिया। पं. दीनानाथ राजकीय महिला डिग्री कॉलेज की छात्राओं के लिए शनिवार का दिन अलग अनुभव लेकर आया। भोजपुरी की प्रख्यात गायिका कल्पना को अपने बीच पाकर छात्राएं उत्साहित थीं। लोक विरासत और सांस्कृतिक पहचान की अवधारणा समझी तो लोक गायन की बारीकियां भी जानीं। यही नहीं अपनी चहेती कलाकार के साथ सेल्फी लेने की भी होड़ रही। व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता कल्पना ने कहा कि लोक गायन और संगीत की समृद्ध विरासत है, मगर युवा पीढ़ि उससे अंजान हैं। गीतों का मर्म समझने की बजाए लोग मस्ती में सुनते हैं। बिरहा, निर्गुण, पूरबी सहित हर तरह के गीत सामाजिक संदेश लिए हैं। इसे समझने की जरूरत है। भूपेन हजारिका, भिखारी ठाकुर, महेंद्र मिश्र की रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी विरासत को सहेजने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज में जैसा हम देखना चाहते हैं, उसके लिए खुद प्रयास भी करना होगा। सिर्फ फेसबुक पर कमेंट करने से परिवर्तन की उम्मीद समय की बर्बादी है। परिवर्तन के लिए शिकायत नहीं संघर्ष करना होगा, घरों से बाहर आना होगा। जो यह नहीं कर सकता, उसे शिकायत करने का भी हक नहीं है। उन्होंने छात्राओं का आह्वान किया कि जीवन को सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, मनोरंजन के लिए जीएं। मुख्य अतिथि विश्व भोजपुरी सम्मेलन के महासचिव डॉ. अरुणेश नीरन ने लोक और फोक में अंतर समझाया। कहा कि फोक अनुशासन है, जबकि लोक अनुभव है। लोक का कोई अंत नहीं है। व्यापक जनसमुदाय और उनकी भावनाएं इससे जुड़ी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंजलिका निगम व स्वागत भाषण डॉ. ऊषा श्रीवास्तव ने किया। इससे पहले छात्रा अपूर्वा त्रिपाठी, श्रेया मिश्र, माया भारती, आकृति यादव, राबिया खातून ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत व अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किया। संचालन सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर पूनम मणि, डॉ. अंजना, डॉ. ध्रुव वर्मा, डॉ. चंद्रभूषण सिंह, डॉ. रीना सिंह, डॉ. अल्पना सिंह, डॉ. राखी भारती, ममता गौतम, दिनेश रावत, राजेश भारती आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
रविवार को बैतालपुर चीनी मिल परिसर में आयोजित पूर्वांचल प्रतिभा संगम में शामिल होने आईं कल्पना ने पूर्व संध्या पर पत्रकारों से बात की। भोजपुरी की समृद्धि के लिए सकारात्मक माहौल बनाने पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए बहुत कुछ हो रहा है और काफी कुछ करने की भी जरूरत है। हम जो परिवर्तन देखना चाहते हैं, उसे खुद भी करें। भोजपुरी के साथ यह उपेक्षात्मक रुख रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छा रही भोजपुरी अपने क्षेत्र में ही उपेक्षित है। यूपी-बिहार में पॉलीटिकल चेंजर बहुत हैं, बावजूद यहां से अब तक भोजपुरी के लिए प्रभावी आवाज नहीं उठ पाई है। असम की तरह यहां भी भोजपुरी के लिए बड़े जनांदोलन की बात कही। उन्होंने प्रेम और मिठास की भाषा कही जाने वाली भोजपुरी में अश्लीलता के बढ़ते चलन के सवाल पर कहा कि फिल्मों में सेंसर बोर्ड अपना काम कर रहा है। भोजपुरी एलबम पर थोड़ी आपत्ति है, इसके लिए भी सेंसर बोर्ड को प्रभावी करने की जरूरत है। चाहते सब बेहतरी हैं, लेकिन आगे कोई नहीं आता। कहा कि वह भिखारी ठाकुर की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। कहा कि गायन के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से युवाओं को परिचित कराने के लिए यूनिवर्सिटी, कॉलेज में जाकर छात्र-छात्राओं से मिल रही हैं। उन्हें अपनी लोक कलाओं के गौरव का अहसास करा रही हैं।
विज्ञापन
लोक गायन की समृद्ध विरासत को समझें : कल्पना
देवरिया। पं. दीनानाथ राजकीय महिला डिग्री कॉलेज की छात्राओं के लिए शनिवार का दिन अलग अनुभव लेकर आया। भोजपुरी की प्रख्यात गायिका कल्पना को अपने बीच पाकर छात्राएं उत्साहित थीं। लोक विरासत और सांस्कृतिक पहचान की अवधारणा समझी तो लोक गायन की बारीकियां भी जानीं। यही नहीं अपनी चहेती कलाकार के साथ सेल्फी लेने की भी होड़ रही। व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता कल्पना ने कहा कि लोक गायन और संगीत की समृद्ध विरासत है, मगर युवा पीढ़ि उससे अंजान हैं। गीतों का मर्म समझने की बजाए लोग मस्ती में सुनते हैं। बिरहा, निर्गुण, पूरबी सहित हर तरह के गीत सामाजिक संदेश लिए हैं। इसे समझने की जरूरत है। भूपेन हजारिका, भिखारी ठाकुर, महेंद्र मिश्र की रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी विरासत को सहेजने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज में जैसा हम देखना चाहते हैं, उसके लिए खुद प्रयास भी करना होगा। सिर्फ फेसबुक पर कमेंट करने से परिवर्तन की उम्मीद समय की बर्बादी है। परिवर्तन के लिए शिकायत नहीं संघर्ष करना होगा, घरों से बाहर आना होगा। जो यह नहीं कर सकता, उसे शिकायत करने का भी हक नहीं है। उन्होंने छात्राओं का आह्वान किया कि जीवन को सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, मनोरंजन के लिए जीएं। मुख्य अतिथि विश्व भोजपुरी सम्मेलन के महासचिव डॉ. अरुणेश नीरन ने लोक और फोक में अंतर समझाया। कहा कि फोक अनुशासन है, जबकि लोक अनुभव है। लोक का कोई अंत नहीं है। व्यापक जनसमुदाय और उनकी भावनाएं इससे जुड़ी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंजलिका निगम व स्वागत भाषण डॉ. ऊषा श्रीवास्तव ने किया। इससे पहले छात्रा अपूर्वा त्रिपाठी, श्रेया मिश्र, माया भारती, आकृति यादव, राबिया खातून ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत व अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किया। संचालन सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर पूनम मणि, डॉ. अंजना, डॉ. ध्रुव वर्मा, डॉ. चंद्रभूषण सिंह, डॉ. रीना सिंह, डॉ. अल्पना सिंह, डॉ. राखी भारती, ममता गौतम, दिनेश रावत, राजेश भारती आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन