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पूर्व सैनिकों ने काली पट्टी बांध विरोध जताया
Updated Fri, 03 Nov 2017 10:51 PM IST
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कलेक्ट्रेट में पूर्व सैनिक सेवा परिषद के लोगो ने काली पट्टी बांधकर धरना दिया।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। वन रैंक, वन पेंशन की मांग को लेकर एक साल पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर पूर्व सैनिकों पर लाठीचार्ज हुआ था। इसके विरोध में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पर पूर्व सैनिकों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर धरना दिया।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों की मांगों को दबाना चाहती है। वन रैंक, वन पेंशन के मामले में सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है। पूर्व सैनिकों पर लाठीचार्ज करने वाले सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। देश की रक्षा के लिए सैनिक प्राण की आहुति दे देते है। बावजूद इसके सरकार पूर्व सैनिकों की जायज मांगों को नहीं मान रही है। व्यास यादव ने कहा कि पूर्व सैनिकों के मान और सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी। जयनाथ उपाध्याय ने कहा कि सैनिकों के साथ नाइंसाफी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि वन रैंक, वन पेंशन की मांग के पूर्व सैनिक हकदार हैं। इसे लागू किया जाए। दिवाकर त्रिपाठी ने कहा कि पूर्व सैनिकों को एकता में कमी नहीं आने देनी चाहिए। रामविलास दीक्षित ने कहा कि पूर्व सैनिकों की लड़ाई जब खत्म होगी, जब समस्याओं का समाधान होगा। इस दौरान सत्यनारायण, जयप्रकाश मिश्र, श्यामबदन, बाजीलाल, दिग्विजय नाथ दुबे आदि मौजूद रहे।
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वक्ताओं ने कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों की मांगों को दबाना चाहती है। वन रैंक, वन पेंशन के मामले में सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है। पूर्व सैनिकों पर लाठीचार्ज करने वाले सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। देश की रक्षा के लिए सैनिक प्राण की आहुति दे देते है। बावजूद इसके सरकार पूर्व सैनिकों की जायज मांगों को नहीं मान रही है। व्यास यादव ने कहा कि पूर्व सैनिकों के मान और सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी। जयनाथ उपाध्याय ने कहा कि सैनिकों के साथ नाइंसाफी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि वन रैंक, वन पेंशन की मांग के पूर्व सैनिक हकदार हैं। इसे लागू किया जाए। दिवाकर त्रिपाठी ने कहा कि पूर्व सैनिकों को एकता में कमी नहीं आने देनी चाहिए। रामविलास दीक्षित ने कहा कि पूर्व सैनिकों की लड़ाई जब खत्म होगी, जब समस्याओं का समाधान होगा। इस दौरान सत्यनारायण, जयप्रकाश मिश्र, श्यामबदन, बाजीलाल, दिग्विजय नाथ दुबे आदि मौजूद रहे।
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