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मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच विवाद
Updated Sat, 21 Oct 2017 10:42 PM IST
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पौटवा बसंतपुर में बवाल के बाद मुस्तैद पुलिस के जवान
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। रामपुर कारखाना के बसंतपुर गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान शुक्रवार को दो समुुदाय के लोगों के बीच विवाद हो गया। आपत्तिजनक नारे लगाने से माहौल बेकाबू हो गया और दोनों पक्षों में झड़प हुई। एक समुदाय के लोगों के तलवार के खुलेआम प्रदर्शन से लोग मूर्ति छोड़कर भाग गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने माहौल काबू में कर मूर्ति विसर्जन कराया। फिलहाल मौके पर पीएसी तैनात है।
थानाक्षेत्र के नीबीबरवां गांव में दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति रखी गई थी। शुक्रवार की शाम को धूमधाम से मूर्ति विसर्जन के लिए ले जाई जा रही थी। छह बजे जुलूस बसंतपुर गांव से गुजर रहा था। एक धार्मिक स्थल के पास पहुंचने पर एक समुदाय के कुछ युवकों ने जुलूस के आगे एक बाइक खड़ी कर दी और लाउडस्पीकर बंद करने को कहने लगे। जुलूस में शामिल लोगों ने इसपर लाउडस्पीकर बंद कर दिए। इसके बाद दूसरे समुदाय के युवकों ने ट्राली पर चढ़कर जेनेरेटर भी बंद करा दिया। इस पर दोनों पक्षों में हाथापाई शुरू हो गई। बीचबचाव के बाद जुलूस गांव के बाहर चौराहे पर पहुंचा तब तक पीछे से 50 से अधिक की संख्या में युवक तलवार और लाठी-डंडे लेकर आ पहुंचे और जुलूस को सड़क पर रोक लिया। जुलूस में शामिल लोग लोग डर से मूर्ति छोड़कर भाग निकले। विवाद की जानकारी होने पर आसपास के कई गांवों के लोग पहुंच गए। दोनों समुदाय के लोगों के आमने-सामने आने पर झड़प शुरू हुई। बरवां मीरछापर पिकेट पर तैनात दो सिपाही पहुंचे। दोनों सिपाही भीड़ से घिर गए, लेकिन पीछे नहीं हटे। करीब एक घंटे बाद डायल 100 और प्रभारी एसओ श्याम बिहारी मयफोर्स मौके पर पहुंचे। हल्का बल प्रयोग कर हालात को काबू किया गया। फिर कुछ लोगों को बुलाकर रात साढ़े आठ बजे बरवां मीरछापर पोखरे पर मूर्ति विसर्जन कराया गया। तनाव को देखते हुए रात 10 बजे पीएसी पहुंच गई। दोनों तरफ से आठ लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। इन पर शांतिभंग की कार्रवाई की गई। एक पक्ष के दो नाबालिग समेत चार को हिरासत में लिए जाने से गांव में काफी नाराजगी है। आरोप है कि स्थानीय नेता के दबाव में पुलिस उत्पीड़न कर रही है। प्रभारी एसओ श्याम बिहारी ने बिना इजाजत मूर्ति स्थापित करने पर फटकार लगाई।
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थानाक्षेत्र के नीबीबरवां गांव में दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति रखी गई थी। शुक्रवार की शाम को धूमधाम से मूर्ति विसर्जन के लिए ले जाई जा रही थी। छह बजे जुलूस बसंतपुर गांव से गुजर रहा था। एक धार्मिक स्थल के पास पहुंचने पर एक समुदाय के कुछ युवकों ने जुलूस के आगे एक बाइक खड़ी कर दी और लाउडस्पीकर बंद करने को कहने लगे। जुलूस में शामिल लोगों ने इसपर लाउडस्पीकर बंद कर दिए। इसके बाद दूसरे समुदाय के युवकों ने ट्राली पर चढ़कर जेनेरेटर भी बंद करा दिया। इस पर दोनों पक्षों में हाथापाई शुरू हो गई। बीचबचाव के बाद जुलूस गांव के बाहर चौराहे पर पहुंचा तब तक पीछे से 50 से अधिक की संख्या में युवक तलवार और लाठी-डंडे लेकर आ पहुंचे और जुलूस को सड़क पर रोक लिया। जुलूस में शामिल लोग लोग डर से मूर्ति छोड़कर भाग निकले। विवाद की जानकारी होने पर आसपास के कई गांवों के लोग पहुंच गए। दोनों समुदाय के लोगों के आमने-सामने आने पर झड़प शुरू हुई। बरवां मीरछापर पिकेट पर तैनात दो सिपाही पहुंचे। दोनों सिपाही भीड़ से घिर गए, लेकिन पीछे नहीं हटे। करीब एक घंटे बाद डायल 100 और प्रभारी एसओ श्याम बिहारी मयफोर्स मौके पर पहुंचे। हल्का बल प्रयोग कर हालात को काबू किया गया। फिर कुछ लोगों को बुलाकर रात साढ़े आठ बजे बरवां मीरछापर पोखरे पर मूर्ति विसर्जन कराया गया। तनाव को देखते हुए रात 10 बजे पीएसी पहुंच गई। दोनों तरफ से आठ लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। इन पर शांतिभंग की कार्रवाई की गई। एक पक्ष के दो नाबालिग समेत चार को हिरासत में लिए जाने से गांव में काफी नाराजगी है। आरोप है कि स्थानीय नेता के दबाव में पुलिस उत्पीड़न कर रही है। प्रभारी एसओ श्याम बिहारी ने बिना इजाजत मूर्ति स्थापित करने पर फटकार लगाई।
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