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सरकारी एंबुलेंस से निजी अस्पताल पहुंचाई जा रही गर्भवती
Updated Mon, 30 Jul 2018 10:25 PM IST
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271 आशाओं की सेवा समाप्ति की तैयारी
प्वाइंटर
सरकारी एंबुलेंस से निजी अस्पताल पहुंचाई जा रहीं गर्भवती
नर्सिंगहोम पर छापामारी में पोल खुलने के बाद गंभीर हुआ महकमा
नीलांबुज मिश्र
देवरिया। आशा कार्यकर्ता और सरकारी एंबुलेंस चालकों की मिलीभगत से जननी सुरक्षा योजना को पलीता लग रहा है। आशाओं की मिलीभगत से एंबुलेंस से गर्भवती को प्रसव के लिए निजी नर्सिंग होम ले जाया जा रहा है। पिछले दिनों निजी नर्सिंगहोम पर स्वास्थ्य विभाग की छापामारी में इसका खुलासा हुआ। लिहाजा अब लापरवाह 271 आशाओं पर कार्रवाई की तैयारी है। चार माह में एक भी प्रसव नहीं कराने वाली दस पीएचसी व सीएचसी की 271 आशा कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्ति तैयारी चल रही है। एंबुलेंस चालकों की लॉगबुक जांच के लिए सीएमओ ने निर्देश दिए हैं।
सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर सरकार का जोर है, ताकि जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहें और शिशु मृत्यु दर में कमी आए। इसके लिए आर्थिक मदद भी प्रसूताओं को दिया जा रहा है। लेकिन आशा और एंबुलेंस चालकों की सांठगांठ से सरकारी अस्पताल की बजाए गर्भवती महिलाओं को निजी नर्सिंगहोम में पहुंचाया जा रहा है। अप्रैल से जुलाई तक हुए जननी सुरक्षा योजना की समीक्षा के बाद प्रसव में आई गिरावट के बाद स्वास्थ्य महकमा सतर्क हुआ है। शहर के शारदा नर्सिंग होम में छापामारी के दौरान आठ सीजेरियन का केस मिला। सभी ने बताया कि आशा व 102 एंबुलेंस चालकों ने सीएचसी व पीएचसी से रेफर होने के बाद यहां तक पहुंचाया है। पिछले चार माह में सिर्फ 9722 ही प्रसव हुआ, जबकि इसके पहले 11,668 प्रसव हुआ था। सीएमओ के निर्देश पर चार माह में शून्य प्रसव कराने वाली आशाओं की सेवा समाप्ति के लिए सूची तैयार कराई जा रही है। 102 एंबुलेंस चालकों की ओर से सीएचसी व पीएचसी से गर्भवती महिलाओं को लेकर आने-जाने वाले गर्भवती महिलाओं की कब और कहा एंट्री हुई है। इसके लिए लॉगबुक जांच का निर्देश दिया है। वहीं 45 एएनएम को प्रसव में कमी का कारण बताते हुए वेतन रोका गया है।
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इन सीएचसी व पीएचसी की हैं आशा
बैतालपुर पीएचसी की 39, देसही देवरिया पीएचसी के 26, रुद्रपुर सीएचसी पर 39, गौरीबाजार सीएचसी पर 34, रामपुर कारखाना पीएचसी 48, पथरदेवा पीएचसी पर 19, भागलपुर पीएचसी पर 25, लार सीएचसी पर 14 सलेमपुर सीएचसी पर 15 और तरकुलवा पीएचसी पर 15 आशाओं ने चार माह में शून्य प्रसव कराया है।
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2000 प्रसूताओं के खाते में नहीं गई रकम
जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद 1400 रुपये प्रसूताओं को आर्थिक सहायता मिलती है। पीएचसी व सीएचसी कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से जिले के 2000 से अधिक प्रसूताओं के बैंक अकाउंट में रकम नहीं भेजी जा सकी है। सीएमओ ने एक सप्ताह के अंदर हर हाल में प्रसूताओं के अकाउंट में रुपये भेजने का निर्देश दिया है।
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चार माह में शून्य प्रसव कराने वाली आशाओं की सेवा समाप्त की जाएगी। नर्सिंगहोम से संपर्क रखने वाली आशा, एएनएम और एंबुलेंस चालकों को चिह्नित किया जा रहा है। इनके मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकाली जाएगी। इसकी लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। -डॉ. धीरेंद्र कुमार, सीएमओ।
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सरकारी एंबुलेंस से निजी अस्पताल पहुंचाई जा रहीं गर्भवती
नर्सिंगहोम पर छापामारी में पोल खुलने के बाद गंभीर हुआ महकमा
नीलांबुज मिश्र
देवरिया। आशा कार्यकर्ता और सरकारी एंबुलेंस चालकों की मिलीभगत से जननी सुरक्षा योजना को पलीता लग रहा है। आशाओं की मिलीभगत से एंबुलेंस से गर्भवती को प्रसव के लिए निजी नर्सिंग होम ले जाया जा रहा है। पिछले दिनों निजी नर्सिंगहोम पर स्वास्थ्य विभाग की छापामारी में इसका खुलासा हुआ। लिहाजा अब लापरवाह 271 आशाओं पर कार्रवाई की तैयारी है। चार माह में एक भी प्रसव नहीं कराने वाली दस पीएचसी व सीएचसी की 271 आशा कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्ति तैयारी चल रही है। एंबुलेंस चालकों की लॉगबुक जांच के लिए सीएमओ ने निर्देश दिए हैं।
सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर सरकार का जोर है, ताकि जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहें और शिशु मृत्यु दर में कमी आए। इसके लिए आर्थिक मदद भी प्रसूताओं को दिया जा रहा है। लेकिन आशा और एंबुलेंस चालकों की सांठगांठ से सरकारी अस्पताल की बजाए गर्भवती महिलाओं को निजी नर्सिंगहोम में पहुंचाया जा रहा है। अप्रैल से जुलाई तक हुए जननी सुरक्षा योजना की समीक्षा के बाद प्रसव में आई गिरावट के बाद स्वास्थ्य महकमा सतर्क हुआ है। शहर के शारदा नर्सिंग होम में छापामारी के दौरान आठ सीजेरियन का केस मिला। सभी ने बताया कि आशा व 102 एंबुलेंस चालकों ने सीएचसी व पीएचसी से रेफर होने के बाद यहां तक पहुंचाया है। पिछले चार माह में सिर्फ 9722 ही प्रसव हुआ, जबकि इसके पहले 11,668 प्रसव हुआ था। सीएमओ के निर्देश पर चार माह में शून्य प्रसव कराने वाली आशाओं की सेवा समाप्ति के लिए सूची तैयार कराई जा रही है। 102 एंबुलेंस चालकों की ओर से सीएचसी व पीएचसी से गर्भवती महिलाओं को लेकर आने-जाने वाले गर्भवती महिलाओं की कब और कहा एंट्री हुई है। इसके लिए लॉगबुक जांच का निर्देश दिया है। वहीं 45 एएनएम को प्रसव में कमी का कारण बताते हुए वेतन रोका गया है।
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इन सीएचसी व पीएचसी की हैं आशा
बैतालपुर पीएचसी की 39, देसही देवरिया पीएचसी के 26, रुद्रपुर सीएचसी पर 39, गौरीबाजार सीएचसी पर 34, रामपुर कारखाना पीएचसी 48, पथरदेवा पीएचसी पर 19, भागलपुर पीएचसी पर 25, लार सीएचसी पर 14 सलेमपुर सीएचसी पर 15 और तरकुलवा पीएचसी पर 15 आशाओं ने चार माह में शून्य प्रसव कराया है।
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2000 प्रसूताओं के खाते में नहीं गई रकम
जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद 1400 रुपये प्रसूताओं को आर्थिक सहायता मिलती है। पीएचसी व सीएचसी कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से जिले के 2000 से अधिक प्रसूताओं के बैंक अकाउंट में रकम नहीं भेजी जा सकी है। सीएमओ ने एक सप्ताह के अंदर हर हाल में प्रसूताओं के अकाउंट में रुपये भेजने का निर्देश दिया है।
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चार माह में शून्य प्रसव कराने वाली आशाओं की सेवा समाप्त की जाएगी। नर्सिंगहोम से संपर्क रखने वाली आशा, एएनएम और एंबुलेंस चालकों को चिह्नित किया जा रहा है। इनके मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकाली जाएगी। इसकी लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। -डॉ. धीरेंद्र कुमार, सीएमओ।