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डारमेट्री में रह रहे हैं हॉस्टल के खिलाड़ी
Updated Mon, 01 Jan 2018 11:15 PM IST
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स्टेडियम में इसी कमरे में रहते है हास्टल के क्रिकेट खिलाडी।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। स्पोर्ट्स स्टेडियम खिलाड़ियों और मार्निंग वॉक करने वालों का पसंदीदा स्थान है। यहां क्रिकेट और वालीबॉल के खिलाड़ी भी रहते हैं। हॉस्टल नहीं बनने से खिलाड़ियों को डारमेट्री में रहना पड़ रहा है। वालीबॉल के 15 और क्रिकेट के 24 खिलाड़ी कई स्तर पर प्रतिस्पर्धा पार कर यहां पहुंचे हैं। खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि हॉस्टल में रहने से जीवन संवार जाएगा। मगर यहां पग-पग पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
शहर के बीचोबीच स्थित रविंद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में मार्निंग वॉक करने वालों की भीड़ लगी रहती है। ऑफिसर्स कॉलोनी के पास स्टेडियम होने से अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य भी मार्निंग वॉक करने आते हैं। वर्ष 2011-12 में सपा सरकार में खेल मंत्री रहे स्व. कामेश्वर उपाध्याय ने स्टेडियम को आधुनिक सुविधाओं से लैस कराया था। क्रिकेट और वालीबॉल खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल की घोषणा की गई थी। प्रदेश के कोने-कोने से खिलाड़ी तो चयनित होकर आ गए, लेकिन आज तक हॉस्टल की नींव तक नहीं पड़ी। खिलाड़ियों को डारमेट्री में रात गुजारानी पड़ती है। हॉस्टल के अलावा शहर के खिलाड़ी भी यहां प्रैक्टिस करने आते हैं। इसके लिए सात कोच भी नियुक्त हैं। सुबह और शाम के वक्त खिलाड़ियों की भीड़ रहती है। उबड़-खाबड़ ट्रैक पर खिलाड़ी दौड़ लगाने को विवश हैं। एक बाबू और एक चपरासी के जिम्मे पूरा स्टेडियम है। ऐसे में कितना रखरखाव होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। क्रिकेट खिलाड़ी मनकामेश्वर दुबे ने बताया कि डारमेट्री में रहते हुए दो साल हो गए हैं। आजमगढ़ के अनिल यादव भी क्रिकेट खिलाड़ी हैं। इनका भी चयन हॉस्टल के लिए हुआ है।
प्रशासनिक भवन भी जर्जर
स्पोर्ट्स स्टेडियम का प्रशासनिक भवन भी जर्जर हो चुका है। बाउंड्रीवॉल भी झुक गए हैं। बरसात के दिनों में प्रशासनिक भवन में बैठना मुश्किल हो जाता है। बारिश का पानी जर्जर छत के रास्ते अंदर आ जाता है। करीब छह एकड़ में बना स्टेडियम की बाउंड्रीवॉल भी झुक चुकी है। जिला क्रीड़ा अधिकारी ने नगरपालिका अध्यक्ष अलका सिंह से बाउंड्रीवॉल से सटे खाली स्थान पर इंटरलॉकिंग कराने का अनुरोध किया है।
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तीन मंजिला बनेगा हॉस्टल
जिला क्रीड़ा अधिकारी केके पांडेय ने बताया कि स्टेडियम में जगह की कमी को देखते हुए तीन मंजिला हॉस्टल का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए दो करोड़ 60 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि फरवरी में प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। हॉस्टल में 20 कमरे होंगे। किचन, डाइनिंग हॉल, गेस्ट रूम की सुविधा होगी। हॉस्टल बन जाने से खिलाड़ियों की समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
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शहर के बीचोबीच स्थित रविंद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में मार्निंग वॉक करने वालों की भीड़ लगी रहती है। ऑफिसर्स कॉलोनी के पास स्टेडियम होने से अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य भी मार्निंग वॉक करने आते हैं। वर्ष 2011-12 में सपा सरकार में खेल मंत्री रहे स्व. कामेश्वर उपाध्याय ने स्टेडियम को आधुनिक सुविधाओं से लैस कराया था। क्रिकेट और वालीबॉल खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल की घोषणा की गई थी। प्रदेश के कोने-कोने से खिलाड़ी तो चयनित होकर आ गए, लेकिन आज तक हॉस्टल की नींव तक नहीं पड़ी। खिलाड़ियों को डारमेट्री में रात गुजारानी पड़ती है। हॉस्टल के अलावा शहर के खिलाड़ी भी यहां प्रैक्टिस करने आते हैं। इसके लिए सात कोच भी नियुक्त हैं। सुबह और शाम के वक्त खिलाड़ियों की भीड़ रहती है। उबड़-खाबड़ ट्रैक पर खिलाड़ी दौड़ लगाने को विवश हैं। एक बाबू और एक चपरासी के जिम्मे पूरा स्टेडियम है। ऐसे में कितना रखरखाव होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। क्रिकेट खिलाड़ी मनकामेश्वर दुबे ने बताया कि डारमेट्री में रहते हुए दो साल हो गए हैं। आजमगढ़ के अनिल यादव भी क्रिकेट खिलाड़ी हैं। इनका भी चयन हॉस्टल के लिए हुआ है।
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प्रशासनिक भवन भी जर्जर
स्पोर्ट्स स्टेडियम का प्रशासनिक भवन भी जर्जर हो चुका है। बाउंड्रीवॉल भी झुक गए हैं। बरसात के दिनों में प्रशासनिक भवन में बैठना मुश्किल हो जाता है। बारिश का पानी जर्जर छत के रास्ते अंदर आ जाता है। करीब छह एकड़ में बना स्टेडियम की बाउंड्रीवॉल भी झुक चुकी है। जिला क्रीड़ा अधिकारी ने नगरपालिका अध्यक्ष अलका सिंह से बाउंड्रीवॉल से सटे खाली स्थान पर इंटरलॉकिंग कराने का अनुरोध किया है।
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तीन मंजिला बनेगा हॉस्टल
जिला क्रीड़ा अधिकारी केके पांडेय ने बताया कि स्टेडियम में जगह की कमी को देखते हुए तीन मंजिला हॉस्टल का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए दो करोड़ 60 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि फरवरी में प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। हॉस्टल में 20 कमरे होंगे। किचन, डाइनिंग हॉल, गेस्ट रूम की सुविधा होगी। हॉस्टल बन जाने से खिलाड़ियों की समस्याएं खत्म हो जाएंगी।