{"_id":"5b82dc3c42c7924657041f4e","slug":"161535302716-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रयू तट पर ब्राह्मण विद्वानों ने किया श्रावणी उपाकर्म स्नान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रयू तट पर ब्राह्मण विद्वानों ने किया श्रावणी उपाकर्म स्नान
Updated Sun, 26 Aug 2018 10:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्राह्मणों ने किया श्रावणी उपाकर्म स्नान
श्रावणी उपाकर्म स्नान से तीन तापों का होता है समन
अमर उजाला ब्यूरो
बरहज। सावन के पूर्णिमा के दिन सरयू तट पर श्रावणी उपाकर्म स्नान के लिए ब्राह्मण विद्वानों की भीड़ जुटी रही। विद्वानों ने वैदिक मंत्रों के बीच 10 विधि से स्नान ध्यान किया। मान्यता है कि इस स्नान से मनुष्य के तीन तापों का समन होता है और विश्व का कल्याण होता है।
रविवार को सरयू तट पर बने तुलसी, आरती समेत अन्य घाटों पर सुबह से ही विद्वान ब्राह्मणों का जमावड़ा होने लगा। घाट पर नगर स्थित परम हंसानत संस्कृत महाविद्यालय के अलावा रुद्रपुर, देवरिया, गौरीबाजार आदि जगहों के ब्राह्मणों विद्वानों ने स्नान किया। श्रावणी उपाकर्म स्नान दोपहर तक जारी रहा। ब्राह्मणों ने गोमय, गोमूत्र, अपामार्ग, दुरबा, कुशा, भस्म आदि सहित 10 विधियों से स्नान-ध्यान किया। पूर्व प्राचार्य विश्राम शुक्ल ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म स्नान से साल भर अज्ञानतावश हुए पाप धुल जाते हैं। इससे दैहिक, दैविक, भौतिक तीनों ताप नष्ट हो जाते हैं। इस दौरान प्राचार्य गोविंद दत्त शुक्ल, कृष्ण मुरारी तिवारी, परशुराम पांडेय, हरिशंकर पांडेय, पं. अनूप शुक्ल, मारकंडेय पांडेय, ओमप्रकाश दूबे, रमेश तिवारी अंजान, श्रीनिवास, विजय शंकर, अमित, चंदन आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
श्रावणी उपाकर्म स्नान से तीन तापों का होता है समन
अमर उजाला ब्यूरो
बरहज। सावन के पूर्णिमा के दिन सरयू तट पर श्रावणी उपाकर्म स्नान के लिए ब्राह्मण विद्वानों की भीड़ जुटी रही। विद्वानों ने वैदिक मंत्रों के बीच 10 विधि से स्नान ध्यान किया। मान्यता है कि इस स्नान से मनुष्य के तीन तापों का समन होता है और विश्व का कल्याण होता है।
रविवार को सरयू तट पर बने तुलसी, आरती समेत अन्य घाटों पर सुबह से ही विद्वान ब्राह्मणों का जमावड़ा होने लगा। घाट पर नगर स्थित परम हंसानत संस्कृत महाविद्यालय के अलावा रुद्रपुर, देवरिया, गौरीबाजार आदि जगहों के ब्राह्मणों विद्वानों ने स्नान किया। श्रावणी उपाकर्म स्नान दोपहर तक जारी रहा। ब्राह्मणों ने गोमय, गोमूत्र, अपामार्ग, दुरबा, कुशा, भस्म आदि सहित 10 विधियों से स्नान-ध्यान किया। पूर्व प्राचार्य विश्राम शुक्ल ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म स्नान से साल भर अज्ञानतावश हुए पाप धुल जाते हैं। इससे दैहिक, दैविक, भौतिक तीनों ताप नष्ट हो जाते हैं। इस दौरान प्राचार्य गोविंद दत्त शुक्ल, कृष्ण मुरारी तिवारी, परशुराम पांडेय, हरिशंकर पांडेय, पं. अनूप शुक्ल, मारकंडेय पांडेय, ओमप्रकाश दूबे, रमेश तिवारी अंजान, श्रीनिवास, विजय शंकर, अमित, चंदन आदि शामिल रहे।
विज्ञापन