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उम्मीद लेकर आए फरियादी मायूस होकर लौटे

Tue, 15 May 2018 10:51 PM IST
Updated Tue, 15 May 2018 10:51 PM IST
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उम्मीद लेकर आए फरियादी मायूस होकर लौटे
सदर तहसील में आयोजित तहसील दिवस में अपनी सम्स्याओ के निदान के लिए खडे फरियादी। - फोटो : अमर उजाला
देवरिया। संपूर्ण समाधान दिवस में आने वाले फरियादियों को उम्मीद होती है कि उन्हें त्वरित न्याय मिलेगा। सभी विभागों के आला अफसरों की मौजूदगी के चलते उन्हें दफ्तर-दफ्तर भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार ने भी ऐसी ही मंशा के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी, मगर जनता को त्वरित दिलाने की यह कोशिश भी अफसरशाही के जाल में उलझ गई है। मंगलवार को जिले की सभी तहसीलों में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। शिकायतों की ढेर रही, अफसरों का जमावड़ा भी था। बावजूद ज्यादातर मामले लंबित रह गए। कई ऐसे भी फरियादी मिले, जो अफसरों के रुख से संतुष्ट ही नहीं थे। उम्मीद लेकर आए फरियादी मायूस होकर लौटे।
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डीएम सुजीत कुमार की अध्यक्षता में सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 53 प्रकरण आए। इसमें से 12 का मौके पर निस्तारण किया। शेष प्रकरणों में राजस्व विभाग के 15, पुलिस विभाग के 16, विकास विभाग के तीन व अन्य विभागों के सात प्रकरण संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के अंदर निस्तारित करने की हिदायत के साथ सौंपा गया। इस मौके पर एसपी रोहन पी. कनय, सीडीओ राजेश त्यागी, एएसपी गणेश साहा, एसडीएम राकेश सिंह, सीओ सीताराम, तहसीलदार राहुल देव भट्ट, नायब तहसीलदार रामसहाय दुबे, दीनानाथ शुक्ल, बीएसए उपेंद्र आदि मौजूद रहे।
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केस एक:
घर में प्रवेश दिलाने की गुहार
भुजौली कॉलोनी निवासी मु. नदीम की पत्नी नसीरुन्निशा गोरखपुर में रहकर पीजीटी की तैयारी कर रही है। पति रोजगार के लिए विदेश में रहते हैं। सदर तहसील में पहुंची नसीरुन्निशा का कहना था कि शबे बारात पर वह घर आई तो ससुराल वाले उसे अंदर नहीं घुसने नहीं दिए। मारपीट कर बाहर निकाल दिया। पुलिस पहुंची तो पड़ोसी के घर में पनाह दिलाई। तब से वह ऐसे ही रह रही है। ससुराल की चौखट पर दिन बीतता है और रात होने पर पड़ोसी के घर में शरण लेती है। डीएम के समक्ष रोते हुए अपना दुखड़ा सुनाती हुई घर में जगह दिलाने की गुहार लगाई। डीएम ने मामले में एसओ को कार्रवाई के लिए कहा। महिला का कहना था कि पहले दिन से ही प्रकरण एसओ के संज्ञान में है। कोई कार्रवाई नहीं होने पर ही वहां तक आई थी, फिर से एसओ के पास जाने से क्या फायदा।
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केस दो:
कब्जा रोकने पर हो रहा उत्पीड़न
भटनी थानाक्षेत्र के बनरही गांव निवासी रामप्यारे कुशवाहा रिटायर्ड फौजी हैं। जिला स्तरीय तहसील दिवस में पहुंचे रामप्यारे का कहना था कि पूर्वजों की भूमि पर गांव के ही कुछ लोग कब्जा करना चाह रहे हैं। कोर्ट में मामला लंबित है। बावजूद दूसरे पक्ष के लोग पुलिस से मिलीभगत कर उसका उत्पीड़न कर रहे हैं। नौ मई को जमीन में लगे पेड़ से बेल तोड़ने पर मना किया तो जान से मारने की धमकी दी गई। बाद में पुलिस उल्टे उसे ही पकड़कर थाने ले गई। समझौते के लिए दबाव बनाया गया। इससे इनकार पर पिटाई कर पुलिस ने शांतिभंग में चालान कर दिया। उसका कोई मेडिकल भी नहीं कराया गया। 11 मई को जेल से रिहाई के बाद घर गया तो सलेमपुर में डॉक्टरों ने मेडिकल से इन्कार कर दिया। बाद में जिला मुख्यालय पर मेडिकल हुआ। रिपोर्ट में चोट का उल्लेख भी है। उन्होंने जमीन का टुकड़ा बचाने व आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की। इस मामले में डीएम ने पुलिस को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया।


डीएम का निर्देश, आख्या पर शिकायतकर्ता के लें हस्ताक्षर
डीएम ने तहसील दिवस, आईजीआरएस के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का निस्तारण समयबद्धता, गुणवत्ता से करने को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आज कुछ फरियादियों ने पूर्व के निस्तारण आख्या के साथ पुन: आवेदन किया कि अभी उनका प्रकरण का समाधान नही हुआ है। ऐसी स्थिति अत्यंत ही गंभीर है। ऐसे कर्मचारी-अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे। उन्हें अब वास्तविक रुप से निस्तारण करना होगा। आख्या पर शिकायतकर्ता का हस्ताक्षर कराया जाना उल्लिखित किया जाए। अगर फरियादी हस्ताक्षर न करे तो उसका भी उल्लेख आख्या में अवश्य ही किया जाए।
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