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ढूढे नहीं मिल रही 55 अस्पतालों के लिए जमीन

Sun, 05 Aug 2018 11:07 PM IST
नीलांबुज मिश्र उजाला देवरिया
नीलांबुज मिश्र उजाला देवरिया Updated Sun, 05 Aug 2018 11:07 PM IST
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ढूढे नहीं मिल रही 55 अस्पतालों के लिए जमीन
निजी अस्पताल में पसरा सन्नाटा
देवरिया। बदहाल चिकित्सा व्यवस्था से जूझते जिले में आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने का प्रयास दम तोड़ रहा है। जिले में इस चिकित्सा पद्धति के 55 अस्पतालों का निर्माण होना है। इसके लिए तीन माह से जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन जमीन मुहैया नहीं करा सका है। निजी भवन नहीं होने से यह अस्पताल कहीं किराये के भवन में चल रहे हैं तो पीएचसी-सीएचसी के तंग कमरों में जैसे-तैसे चलाया जा रहा है।
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किराए के भवन और जर्जर आवास में 55 आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी अस्पतालों का संचालन प्रभावित है। दो साल के लिए इन अस्पतालों को नजदीकी सीएचसी और पीएचसी से अटैच कर दिया गया है। अफसरों की अनदेखी के कारण गांवों में चलने वाले होम्योपैथी और आयुर्वेदिक अस्पताल लंबे वक्त से बदहाली का दंश झेल रहे हैं। शहर में एक आयुर्वेदिक अस्पताल चटनी गड़ही के पास किराए के मकान, जबकि दूसरा जिला पंचायत के जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। ऐसे में इस चिकित्सा पद्धति से लोगों की दूरी बढ़ती जा रही है। नौ अप्रैल को विभाग के सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने डीएम को 55 अस्पतालों के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, जिसके बाद सभी एसडीएम को पत्र जारी कर जमीन की तलाश करने को कहा गया था। तीन माह बाद भी किसी भी तहसील प्रशासन की ओर से अस्पताल निर्माण के लिए जमीन नहीं उपलब्ध कराया जा सकी है। इससे जुड़ी कोई जानकारी भी नहीं दी गई। सुजीत कुमार, डीएम शासन की तय शर्तों के अनुसार जमीन तलाशने के लिए सभी एसडीएम को निर्देश दिया गया है, लेकिन अभी तक किसी के यहां से कोई जवाब नहीं मिला। यूनानी अस्पताल के लिए खड़जरवा और रुद्रपुर तहसील में जमीन मिली है। वहां से भी अभी कोई पत्रावली नहीं प्राप्त हुई है।
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नगर में 500 और गांव में 1000 वर्ग मीटर चाहिए जमीन
अस्पताल के लिए भवन निर्माण को नगरीय क्षेत्र में न्यूनतम 500 वर्ग मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 1000 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत है, लेकिन किसी भी गांव में या नगर में अभी तक जमीन नहीं चिह्नित किया जा सका है। अस्पताल के लिए ली जाने वाली जमीन ग्राम पंचायत के पांच किमी परिधि में होना चाहिए। ग्रामसभा, स्थानीय निकाय और अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन होनी चाहिए। इसके अलावा अगर कोई अपनी जमीन दान में दे तो विभाग के पक्ष में प्राप्त किया जा सकता है। आयुर्वेदिक अस्पताल में चार बेड और होम्योपैथी, यूनानी में ओपीडी के अनुसार भवन का निर्माण किया जाएगा।
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गांवों में उपयोगी हैं आयुर्वेदिक अस्पताल
ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा सेवा पहुंचाने के लिए पहले आयुर्वेदिक, यूनानी अस्पताल खोले गए थे। इन अस्पतालों के जरिए लोगों को बेहतर इलाज तो मिलता ही था, झोलाछाप से भी बचते थे। निजी भवन के अभाव में सभी अस्पतालों को नजदीकी सीएचसी-पीएचसी के एक-दो कमरों में शिफ्ट कर दिया गया। लिहाजा मरीज को सीएचसी-पीएचसी तक ही चलकर आना पड़ रहा है।


* 35 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित।
* 19 होम्योपैथिक अस्पताल मौजूद।
* 02 यूनानी अस्पताल हैं जिले में।
 
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