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दो कानूनगो, आठ लेखपाल और चार सेक्रेटरी निलंबित
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दो कानूनगो, आठ लेखपाल और चार सेक्रेटरी निलंबित
देवरिया। पराली जलाने की घटनाओं पर शिथिलता बरतना जिम्मेदारों को महंगा पड़ गया। जिले भर में चले निरीक्षण अभियान में 91 जगहों पर पराली जलने की घटना सामने आने पर डीएम अमित किशोर ने दो कानूनगो, आठ लेखपाल और चार सेक्रेटरी को निलंबित कर दिया है। संबंधित किसानों से दो लाख 27 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया गया है।
डीएम अमित किशोर के निर्देश पर रविवार को जिले के सभी एसडीएम ने अपने क्षेत्र का दौरा किया। अलग-अलग इलाकों से पराली जलाने के 91 मामले सामने आए। देर शाम तक सभी तहसीलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने संबंधित कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई की। बता दें कि पराली जलाने की घटनाओं को लेकर शासन से लगायत प्रशासन तक अलर्ट है। इस तरह की घटनाओं पर सेटेलाइट के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी, लेखपाल, कानूनगो, सेक्रेटरी आदि को स्थानीय स्तर पर किसानों को जागरूक करने व नियमानुसार जुर्माना की कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेटेलाइट से मिल रही सूचनाओं के बावजूद जिम्मेदार सुस्ती बरत रहे थे।
डीएम अमित किशोर ने कहा कि पराली जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है। साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी क्षीण हो जाती है। किसान फसल अवशेष को जलाने की बजाय प्रति एकड़ 20 किलोग्राम यूरिया का घोल बनाकर छिड़काव करें। इससे पराली खेतों में सड़कर खाद बन जाएगी और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। डीएम की कार्रवाई के बाद किसानों एवं राजस्व कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है।
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देवरिया। पराली जलाने की घटनाओं पर शिथिलता बरतना जिम्मेदारों को महंगा पड़ गया। जिले भर में चले निरीक्षण अभियान में 91 जगहों पर पराली जलने की घटना सामने आने पर डीएम अमित किशोर ने दो कानूनगो, आठ लेखपाल और चार सेक्रेटरी को निलंबित कर दिया है। संबंधित किसानों से दो लाख 27 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया गया है।
डीएम अमित किशोर के निर्देश पर रविवार को जिले के सभी एसडीएम ने अपने क्षेत्र का दौरा किया। अलग-अलग इलाकों से पराली जलाने के 91 मामले सामने आए। देर शाम तक सभी तहसीलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने संबंधित कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई की। बता दें कि पराली जलाने की घटनाओं को लेकर शासन से लगायत प्रशासन तक अलर्ट है। इस तरह की घटनाओं पर सेटेलाइट के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी, लेखपाल, कानूनगो, सेक्रेटरी आदि को स्थानीय स्तर पर किसानों को जागरूक करने व नियमानुसार जुर्माना की कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेटेलाइट से मिल रही सूचनाओं के बावजूद जिम्मेदार सुस्ती बरत रहे थे।
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डीएम अमित किशोर ने कहा कि पराली जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है। साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी क्षीण हो जाती है। किसान फसल अवशेष को जलाने की बजाय प्रति एकड़ 20 किलोग्राम यूरिया का घोल बनाकर छिड़काव करें। इससे पराली खेतों में सड़कर खाद बन जाएगी और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। डीएम की कार्रवाई के बाद किसानों एवं राजस्व कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है।
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