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पांच साल बाद मिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
Updated Mon, 10 Jul 2017 10:39 PM IST
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देवरिया। अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग को पांच साल के बाद जिले में विभागीय अफसर मिल गया। नीरज अग्रवाल ने बतौर अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यभार ग्रहण कर लिया। कुशीनगर का अतिरिक्त चार्ज है, दो दिन वहां पर रहेंगे। मदरसों में शैक्षणिक माहौल और वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा चुनौती है। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नीरज अग्रवाल ने कहा कि मदरसों में शैक्षणिक कैलेंडर को कायम किया जाएगा। छात्रों को बेहतर तालीम मिले, इसकी निगरानी रखेंगे।
मूलत: कुुशीनगर के रहने वाले नीरज अग्रवाल मिर्जापुर से ट्रांसफर होकर आए हैं। देवरिया में चार दिन सोमवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार, जबकि कुशीनगर में मंगलवार और बुधवार को रहेंगे। फिलहाल सदर एसडीएम राकेश सिंह, सपा सरकार के शुरुआती दिनों में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रहे हैं। मई 2012 में एसडीएम के पद पर चयन होने के बाद उधार के अफसरों से काम शुरू हुआ जो अखिलेश सरकार के समाप्त होने तक जारी रहा। इसके बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी संजय नाथ तिवारी, फिर जिला कार्यक्रम अधिकारी पीके सिंह, अब तक समाज कल्याण अधिकारी दीनानाथ शुक्ल के पास अतिरिक्त चार्ज था। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नीरज अग्रवाल ने कहा कि मदरसों में शैक्षणिक कैलेंडर को कायम किया जाएगा। छात्रों को बेहतर तालीम मिले, इसकी निगरानी रखेंगे। कार्यालय और मदरसों में किसी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं होगी। पठन-पाठन छोड़ कर दफ्तर का चक्कर काटने वाले शिक्षकों की खैर नहीं है। वेतन और एरियर संबंधी अन्य दिक्कतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटाएंगे। अनुदानित मदरसों और आधुनिक विषयों वाले शिक्षकों पर खास नजर है।
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मूलत: कुुशीनगर के रहने वाले नीरज अग्रवाल मिर्जापुर से ट्रांसफर होकर आए हैं। देवरिया में चार दिन सोमवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार, जबकि कुशीनगर में मंगलवार और बुधवार को रहेंगे। फिलहाल सदर एसडीएम राकेश सिंह, सपा सरकार के शुरुआती दिनों में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रहे हैं। मई 2012 में एसडीएम के पद पर चयन होने के बाद उधार के अफसरों से काम शुरू हुआ जो अखिलेश सरकार के समाप्त होने तक जारी रहा। इसके बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी संजय नाथ तिवारी, फिर जिला कार्यक्रम अधिकारी पीके सिंह, अब तक समाज कल्याण अधिकारी दीनानाथ शुक्ल के पास अतिरिक्त चार्ज था। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नीरज अग्रवाल ने कहा कि मदरसों में शैक्षणिक कैलेंडर को कायम किया जाएगा। छात्रों को बेहतर तालीम मिले, इसकी निगरानी रखेंगे। कार्यालय और मदरसों में किसी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं होगी। पठन-पाठन छोड़ कर दफ्तर का चक्कर काटने वाले शिक्षकों की खैर नहीं है। वेतन और एरियर संबंधी अन्य दिक्कतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटाएंगे। अनुदानित मदरसों और आधुनिक विषयों वाले शिक्षकों पर खास नजर है।
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