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पंचायतीराज व्यवस्था को कांग्रेस ने किया मजबूत
Updated Tue, 24 Apr 2018 11:43 PM IST
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कांग्रेस की बैठक को जिलाध्यक्ष राघवेन्द्र सिंह राकेश ने संबोधित किया।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। कांग्रेस ने पंचायती राज दिवस की 25 वीं वर्षगांठ पार्टी कार्यालय पर मंगलवार को मनाया गया। वक्ताओं ने पंचायतीराज अधिनियम और इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा किया।
जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह राकेश ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज परिकल्पना के अनुरूप कांग्रेस पार्टी ने पंचायतीराज व्यवस्था को देश में लागू किया और ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने का कार्य किया। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने सामुदायिक विकास योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतों को बल प्रदान किया। वहीं पंचायतीराज व्यवस्था के प्रेरणाश्रोत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंचायती संस्थाओं में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ों को आरक्षण प्रदान कराया। 24 अप्रैल 1993 को 73 वां एवं 74 वां संविधान संशोधन लागू हुआ। इसके माध्यम से पंचायतों एवं नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला। इसके तहत पांच साल पर चुनाव होने लगा और स्वतंत्र वित्त आयोग व चुनाव आयोग का गठन किया गया। पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्गों का निश्चित प्रतिनिधित्व तय किया गया। इसका नतीजा है कि समाज के अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी आज जनप्रतिनिधि हो सकता है। इस दौरान सुयश मणि, वरुण राय, महेंद्र मिश्र, रामविलास तिवारी, समीर पांडेय, धर्मेंद्र सिंह जुलेखा खातून, नागेंद्र, ऋषिकेश मिश्र, संदेश यादव, सुहेल अंसारी, भरत मणि त्रिपाठी, पारस चौहान, सतीश सिंह आदि मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह राकेश ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज परिकल्पना के अनुरूप कांग्रेस पार्टी ने पंचायतीराज व्यवस्था को देश में लागू किया और ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने का कार्य किया। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने सामुदायिक विकास योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतों को बल प्रदान किया। वहीं पंचायतीराज व्यवस्था के प्रेरणाश्रोत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंचायती संस्थाओं में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ों को आरक्षण प्रदान कराया। 24 अप्रैल 1993 को 73 वां एवं 74 वां संविधान संशोधन लागू हुआ। इसके माध्यम से पंचायतों एवं नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला। इसके तहत पांच साल पर चुनाव होने लगा और स्वतंत्र वित्त आयोग व चुनाव आयोग का गठन किया गया। पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्गों का निश्चित प्रतिनिधित्व तय किया गया। इसका नतीजा है कि समाज के अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी आज जनप्रतिनिधि हो सकता है। इस दौरान सुयश मणि, वरुण राय, महेंद्र मिश्र, रामविलास तिवारी, समीर पांडेय, धर्मेंद्र सिंह जुलेखा खातून, नागेंद्र, ऋषिकेश मिश्र, संदेश यादव, सुहेल अंसारी, भरत मणि त्रिपाठी, पारस चौहान, सतीश सिंह आदि मौजूद रहे।
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