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रुद्रपुर के 116 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का संकट
देवरिया
Updated Mon, 11 Jul 2016 10:58 PM IST
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झाड़ियों से पटा राप्ती नदी के किनारे स्थित तिघरा मराछी बांध।
- फोटो : अमर उजाला
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रुद्रपुर। राप्ती और गोर्रा नदियों पर बने तटबंधों की दयनीय दशा से रुद्रपुर क्षेत्र के 116 गांवों पर बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। कम बारिश के बाद भी धीरे-धीरे बढ़ रहा नदियों का जलस्तर बढ़ने पर कोहराम मचा सकता है। राप्ती और गोर्रा नदी के वेग को रोकने के लिए बने तटबंध इस कदर जर्जर हो गए है कि उन पर चारो ओर झाड़ियां नजर आ रही हैैं।
राप्ती नदी पर बना सबसे लंबा तिघरा मराछी तटबंध की दशा सबसे खराब है। 13 किलोमीटर लंबे इस तटबंध पर छह किलोमीटर बांध जंगल में तब्दील हो गया है। बांध पर चारो तरफ झाड़ी उगने से बांध कई जगह दरार हो गया है। तटबंधों की मरम्मत और सफाई की पूरी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को होती है।
मरम्मत के नाम पर हर साल करोड़ों रुपया पानी में बहाने वाला बाढ़ खंड यदि नहीं चेता तो दोआबा के 52 और कछार के 64 गांवों में बाढ़ से तबाही मचना तय माना जा रहा है। तिघरा मराछी बांध पर कोड़री गांव से लेकर एकौना गांव तक करीब छह किलोमीटर क्षेत्र में बंधे पर कोई काम नहीं हुआ। इस कारण पूरा बांध जंगल में तब्दील हो गया है।
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बांध में चूहे अपनी मांद बनाकर छलनी कर दिए है। गांव के मनोज कुमार, विनय यादव, राजेंद्र प्रसाद, पुरुषोत्तम पांडेय, सिकंदर यादव, विनोद यादव आदि ने कहा कि सिंचाई विभाग आग लगने पर कुुुुंआ खोदने का काम करता है। विभाग बरसात के पहले काम नहीं कराता और बरसात में काम चोरी कर बिल बाउचर बनाता है। बीते वर्षों में बरसात नहीं होने से गांव बच गए।
बरसात में कोई भी बांध बचने वाला नहीं है। इस बाबत एसडीएम डॉ राजेश कुमार ने कहा बंधो की जर्जर दशा की रिपोर्ट डीएम को भेजा गया है। बांध की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी।
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राप्ती नदी पर बना सबसे लंबा तिघरा मराछी तटबंध की दशा सबसे खराब है। 13 किलोमीटर लंबे इस तटबंध पर छह किलोमीटर बांध जंगल में तब्दील हो गया है। बांध पर चारो तरफ झाड़ी उगने से बांध कई जगह दरार हो गया है। तटबंधों की मरम्मत और सफाई की पूरी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को होती है।
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मरम्मत के नाम पर हर साल करोड़ों रुपया पानी में बहाने वाला बाढ़ खंड यदि नहीं चेता तो दोआबा के 52 और कछार के 64 गांवों में बाढ़ से तबाही मचना तय माना जा रहा है। तिघरा मराछी बांध पर कोड़री गांव से लेकर एकौना गांव तक करीब छह किलोमीटर क्षेत्र में बंधे पर कोई काम नहीं हुआ। इस कारण पूरा बांध जंगल में तब्दील हो गया है।
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बांध में चूहे अपनी मांद बनाकर छलनी कर दिए है। गांव के मनोज कुमार, विनय यादव, राजेंद्र प्रसाद, पुरुषोत्तम पांडेय, सिकंदर यादव, विनोद यादव आदि ने कहा कि सिंचाई विभाग आग लगने पर कुुुुंआ खोदने का काम करता है। विभाग बरसात के पहले काम नहीं कराता और बरसात में काम चोरी कर बिल बाउचर बनाता है। बीते वर्षों में बरसात नहीं होने से गांव बच गए।
बरसात में कोई भी बांध बचने वाला नहीं है। इस बाबत एसडीएम डॉ राजेश कुमार ने कहा बंधो की जर्जर दशा की रिपोर्ट डीएम को भेजा गया है। बांध की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी।