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बरहज के घाघरा नदी में चार दिनों में बढ़ा चार फिट जलस्तर
Updated Thu, 06 Jul 2017 10:19 PM IST
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बरहज। चार दिनों में घाघरा के जलस्तर में करीब चार फिट का इजाफा हुआ है। जहाज घाट पर बना मीटर गेज पर जलस्तर 64.90 पार कर रहा है। अचानक नदी में आए उफान से पानी बढ़ गया है। करीब छह माह से कपरवार के संगम तट पर सरयू और राप्ती कृषि भूमि पर कहर बरपा रही है। लोगों का कहना है कि हो रहे बेतहाशा कटान के बावजूद प्रशासन बचाव कार्य के लिए आगे नहीं आ रहा है। 2007 से घाघरा के कटान के कारण गोरखपुर जनपद का कोलखास गांव और कूरह परसियां का अस्तित्व भौगोलिक परिक्षेत्र से गायब हो गया। जलस्तर के बढ़ने से परसियां, विशुनपुर देवार सहित 22 टोला और गौरा-कटइलवा, पैना, एकडंगा, भदिला अव्वल, महेन, मोहरा, समोगर आदि गांवों के लोग सहमे हैं।
आपदा से निपटने वाला स्टीमर खराब
बरहज। जहाज घाट पर स्नान-ध्यान के लिए आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा स्टीमर की व्यवस्था की गई है। जो काफी दिनों से खराब है। थाने से सटे सरयू नदी पर बने जहाज घाट पर रोजाना मांगलिक आदि कार्यक्रमों के लिए लोगों का हुजूम जमा रहता है। लोगों का कहना है कि आने जाने वालों के नदी में डूबने से बचाव के लिए घाट पर विभाग की ओर से स्टीमर की व्यवस्था की गई है। गर्मी के दिनों में नदी के करीब दो किलोमीटर दक्षिण चले जाने के बाद स्टीमर रेत में फंसा होने के कारण खराब होना बताया जा रहा है। घाट से सटकर बह रही नदी और उसकी तेज धारा को लेकर नहाने वालों के लिए खतरा पैदा हो गया है। नदी में पानी के बढ़ने और सुरक्षा इंतजाम के अभाव में लोगों के समक्ष डूबने की स्थिति में बचाव की चिंता सता रही है।
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आपदा से निपटने वाला स्टीमर खराब
बरहज। जहाज घाट पर स्नान-ध्यान के लिए आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा स्टीमर की व्यवस्था की गई है। जो काफी दिनों से खराब है। थाने से सटे सरयू नदी पर बने जहाज घाट पर रोजाना मांगलिक आदि कार्यक्रमों के लिए लोगों का हुजूम जमा रहता है। लोगों का कहना है कि आने जाने वालों के नदी में डूबने से बचाव के लिए घाट पर विभाग की ओर से स्टीमर की व्यवस्था की गई है। गर्मी के दिनों में नदी के करीब दो किलोमीटर दक्षिण चले जाने के बाद स्टीमर रेत में फंसा होने के कारण खराब होना बताया जा रहा है। घाट से सटकर बह रही नदी और उसकी तेज धारा को लेकर नहाने वालों के लिए खतरा पैदा हो गया है। नदी में पानी के बढ़ने और सुरक्षा इंतजाम के अभाव में लोगों के समक्ष डूबने की स्थिति में बचाव की चिंता सता रही है।
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