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कुछ दर्द-कुछ मौत के सपने, नरेश की नींद उड़ी

Sat, 29 Dec 2018 10:35 PM IST
Harishankar Tiwari हरिशंकर तिवारी
Updated Sat, 29 Dec 2018 10:35 PM IST
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कुछ दर्द-कुछ मौत के सपने, नरेश की नींद उड़ी
भाटपाररानी। तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, ये आंकड़े झूठे हैं दावा किताबी है... नशनियां पैकौली गांव के बेलहीं मठ टोले के नरेश यादव के लिए तो सरकारी व्यवस्था की हकीकत यही है। आर्थिक तंगी नरेश के लिए फेफड़े के कैंसर से भी बड़ी बीमारी बन गई है। उनके एक ओर महंगे इलाज का कुआं है तो दूसरी ओर कुनबे के भरण-पोषण की खाई। वह तो एक शिक्षिका की मदद संजीवनी बन गई वरना.....इसके आगे की कल्पना भी डरावनी है।
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नरेश यादव कभी जामनगर (गुजरात) में रसोइए का काम करते थे। करीब पांच वर्ष पूर्व वहीं बीमार पड़े तो सहकर्मियों ने अस्पताल में दाखिल कराया। डॉक्टरों ने घर जाने की सलाह दी। घर तो आ गए पर एक तो नौकरी छूटने का गम, ऊपर से बीमारी का दंश। पत्नी बीगन दूसरे के घरों में काम करके रोटी का जुगाड़ करती हैं। बीगन लोगों से उधार लेकर गोरखपुर ले गईं तो डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताते हुए लखनऊ मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी लेकिन इतने पैसे न थे, सो घर लौट आईं। घर के नाम पर भी जर्जर झोपड़ी है। उसमें भी छह संतानों के साथ गुजर मुश्किल है। बच्चे दूसरों के बरामदे में रात काटते हैं। बड़ी बेटी निभा की ही शादी हुई है। निशा (16), गौतम (14), मंशा (12), प्रीति (8) और बुच्ची (6) हैं। ईंट-भट्ठे पर मजदूरी गौतम की मजदूरी और एक भैंस, जिसके दूध की बिक्री थोड़ा सहारा हैं।
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फरिश्ता बनकर आईं स्वप्निल
बीगन देवी बताती हैं कि उनकी गरीबी पर तरस खाकर गांव निवासी संदीप शाही की पत्नी व निजी स्कूल की शिक्षिका स्वप्निल शाही मदद के लिए आगे आईं। उन्होंने नरेश को देवरिया बुलाकर न सिर्फ इलाज करवाया। जांच-दवाओं का खर्च भी उठाया। तबसे हालत में कुछ सुधार तो है पर ठीक होने के लिए ऑपरेशन जरूरी है। ग्राम प्रधान नसीर अंसारी ने बताया कि नरेश के उपचार के लिए मुख्यमंत्री कोष से इलाज के लिए विधायक जी को अवगत कराया गया है।
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विधायक निधि से करेंगे मदद
वहीं क्षेत्रीय विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने मामले से अनभिज्ञता जताई। लेकिन कहा कि पीड़ित परिवार का कोई सदस्य उनसे आकर मिले तो वह अपनी निधि से सहायता जरूर करेंगे। परिवार के आर्थिक सहारे के लिए भी कोई उपाय तलाशेंगे।
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