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गवना से पूर्व बन गई गांव की प्रधान
Updated Wed, 20 Sep 2017 10:51 PM IST
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सुनील कुमार सिंह
देवरिया। बिना ससुराल आए ही एक युवती के प्रधान बन जाने का मामला प्रकाश में आया है। चुनाव के डेढ़ वर्ष बाद तक जब गांव में कोई खुली बैठक नहीं हुई तो गांववालों ने शिकायत जिलाधिकारी से की। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। मामला सदर ब्लॉक के माधोपुर गांव का है।
माधोपुर गांव के शंकर यादव, बैजनाथ गुप्ता, श्यामबदन गोंड, गुड्डी देवी, मिन्ता देवी, रीना, नहीं कराया जा रहा है। विकास के नाम पर रुपये की निकासी जरूर हो जाती है। पूर्व प्रधान किशुनदेव यादव ने महिला सीट होने के नाते बहू को चुनाव मैदान में उतारा था। दबंगई के बल पर उनकी बहू चुनाव जीत गई। चूंकि उसका गवना अभी नहीं हुआ है, इसलिए चुनाव जीतने के डेढ़ वर्ष बाद भी वह ससुराल माधोपुर गांव नहीं आई है। फर्जी ढंग से उसका हस्ताक्षर कर रुपये निकाल लिए जाते हैं। यदि कोई विरोध करता है तो उसे बाहुबल, धनबल के सहारे चुप करा दिया जाता है। गांववालों का कहना है कि डेढ़ वर्ष में गांव की एक भी खुली बैठक नहीं हुई है। इसके चलते ग्रामसभा में खर्च होने वाले रुपये के बारे में वे लोग नहीं जान पाते हैं। गांववालों ने त्रिस्तरीय कमेटी गठित कर गांव का विकास कराने की मांग की। डीएम सुजीत कुमार ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है। उन्होंने जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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देवरिया। बिना ससुराल आए ही एक युवती के प्रधान बन जाने का मामला प्रकाश में आया है। चुनाव के डेढ़ वर्ष बाद तक जब गांव में कोई खुली बैठक नहीं हुई तो गांववालों ने शिकायत जिलाधिकारी से की। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। मामला सदर ब्लॉक के माधोपुर गांव का है।
माधोपुर गांव के शंकर यादव, बैजनाथ गुप्ता, श्यामबदन गोंड, गुड्डी देवी, मिन्ता देवी, रीना, नहीं कराया जा रहा है। विकास के नाम पर रुपये की निकासी जरूर हो जाती है। पूर्व प्रधान किशुनदेव यादव ने महिला सीट होने के नाते बहू को चुनाव मैदान में उतारा था। दबंगई के बल पर उनकी बहू चुनाव जीत गई। चूंकि उसका गवना अभी नहीं हुआ है, इसलिए चुनाव जीतने के डेढ़ वर्ष बाद भी वह ससुराल माधोपुर गांव नहीं आई है। फर्जी ढंग से उसका हस्ताक्षर कर रुपये निकाल लिए जाते हैं। यदि कोई विरोध करता है तो उसे बाहुबल, धनबल के सहारे चुप करा दिया जाता है। गांववालों का कहना है कि डेढ़ वर्ष में गांव की एक भी खुली बैठक नहीं हुई है। इसके चलते ग्रामसभा में खर्च होने वाले रुपये के बारे में वे लोग नहीं जान पाते हैं। गांववालों ने त्रिस्तरीय कमेटी गठित कर गांव का विकास कराने की मांग की। डीएम सुजीत कुमार ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है। उन्होंने जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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