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प्रवासी मजदूरों की बसों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी और प्रियंका में जारी है शह और मात का खेल

Tue, 19 May 2020 07:13 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 19 May 2020 07:13 PM IST
सार

  • अपने सियासी दांव से प्रियंका ने सपा-बसपा को हाशिए पर ला दिया
  • फ्रंटफुट पर खेल रहे योगी अचानक कैसे आ गए बैकफुट पर
  • प्रियंका ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस को ला खड़ा किया

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Congress leader Priyanka Gandhi and UP CM Yogi adityanath alleged each other on migrant workers bus issue
Priyanka Gandhi Vs Yogi Adityanath - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दूरदर्शन पर इन दिनों धारावाहिक चाणक्य प्रसारित हो रहा है, जिसमें आचार्य विष्णुगुप्त और अमात्य राक्षस के बीच सियासी शतरंज जारी है। कुछ उसी अंदाज में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बीच मजदूरों के मुद्दे पर शह और मात का खेल चल रहा है।

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इस सियासी दांव के जरिए प्रियंका ने उत्तर प्रदेश मे सपा-बसपा को पीछे छोड़ हाशिए पर पड़ी कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले लाकर खड़ा कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बीच में नौ पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। पहला पत्र प्रियंका गांधी वाड्रा ने 16 मई को लिखा था। इसमें पैदल चल रहे गरीब बेसहारा मजदूरों के लिए प्रियंका गांधी ने 500 बस गाजीपुर (दिल्ली-यूपी बार्डर) और 500 बसें नोएडा बार्डर से चलाने का प्रस्ताव दिया था।
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इसके ठीक दो दिन बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 मई को प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। तब से लेकर आज तक उत्तर प्रदेश सरकार और प्रियंका गांधी के कार्यालय के बीच में गरीब मजदूरों के नाम पर राजनीति जारी है।
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यह भी पहली बार हो रहा है जब एक राज्य के मुख्यमंत्री के स्तर से सरकार ऐसे मुद्दे पर राजनीति को हवा दे रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ और रिटायर अफसरों को भी यह खेल कम पसंद आ रहा है।

19 मई को प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी को फिर पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने राज्य सरकार को जानकारी है दी कि 11.05 बजे से यूपी बॉर्डर पर ऊंचा नागला के पास बसों को लेकर कांग्रेस के लोग खड़े हैं।

आगरा प्रशासन बसों को उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दे रहा है। इससे पहले संदीप सिंह ने अवनीश अवस्थी को पत्र लिखकर बताया कि राजस्थान, दिल्ली से नोएडा और गाजियाबाद पहुंच रही हैं।

बसों के परमिट दिलाने की प्रक्रिया चल रही है, इसमें कुछ घंटे का विलंब हो सकता है। लिहाजा उत्तर प्रदेश सरकार बसों के पहुंचने से पहले तक यात्रियों की सूची आदि अपडेट करके प्रियंका गांधी के कार्यालय को उपलब्ध करा दें।

यह राजनीति क्यों?

बड़ा सवाल है। क्या उत्तर प्रदेश सरकार के पास बसें नहीं हैं? क्या विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस महासचिव ने मर्यादा लांघी है? इस बारे में उत्तर प्रदेश सरकार के एक पूर्व प्रमुख सचिव और मायावती के समय में चर्चित रहे अधिकारी का कहना है कि विपक्ष का काम सरकार को उसकी कमियां बताना है। विपक्ष अपना काम कर रहा है।

विपक्ष के इस तरह के प्रयासों से सरकार विचलित नहीं होती। लेकिन इस पूरे प्रकरण से लग रहा है कि जैसे राज्य सरकार कहीं न कहीं खुद को असहज पा रही थी। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक विषय पुर टिप्पणी नहीं करना चाहते।

यहां सरकार का प्रयास राजनीतिक हो गया है। इसलिए उन्हें कुछ कहने में दिक्कत हो रही है। वह इतना ही कह सकते हैं कि जो हो रहा है, वह उत्तर प्रदेश और देश के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हो क्या गया है?

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव कहती हैं कि आखिर योगी आदित्यनाथ को हो क्या गया है? गरीब मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने का काम राज्य के मुख्यमंत्री का है। वह इसे नहीं कर पा रहे हैं।

ऐसे समय में राजनीति से ऊपर उठकर कांग्रेस महासचिव ने मदद करने के इरादे से बसों को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया। आखिर वह राज्य के मुख्यमंत्री से ही तो बात करेंगी? जब कांग्रेस महासचिव ने बसों को उपलब्ध करा दिया तो अब वह अड़गा रहे हैं।

क्या एक मुख्यमंत्री को ऐसे संवेदनशील समय में यह शोभा देता है। योगी आदित्यनाथ खुद तो विफल हो रहे हैं और ऊपर से कहीं से मदद मिल रही है तो लेना नहीं चाहते। इस मामले पर ट्वीट करके राजनीति करने में लगे हैं।

अखिलेश यादव ने भी चुटकी

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुटकी ली है। उन्होंने कहा कि काम जनता को सब समझ में आ रहा है।

जब सरकारी, प्राइवेट और स्कूलों की हजारों बसें खड़ी धूल फांक रही है तो ऐसे समय में प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए इन बसों का उपयोग क्यों नहीं कर रही है।

ये कैसा हठ है? राज्य सरकार बस की जगह बल प्रयोग में जुटी है।

फ्रंट पर खेल रहे योगी अचानक बैकफुट पर आए

25 मार्च को लॉकडाउन लगने के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार फ्रंटफुट पर खेल रहे थे। सबसे पहले आनंद विहार से मजदूरों को लाने के लिए एक हजार बसें भेजने का निर्णय उन्होंने लिया था, लेकिन इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में दिल्ली में लॉकडाउन की धज्जियां उड़ने पर माफी मांगी थी।

इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने दूसरा कदम उठाया। कोटा से छात्रों को लाने के लिए बसें भेजीं। योगी के इस कदम का बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विरोध किया था। प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था।

इसके बाद योगी ने फिर कदम उठाया। उन्होंने दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश के गरीब मजदूरों को लाने के लिए अफसरों से प्रोटोकॉल तैयार कराया। हर राज्य के लिए नोडल अफसर नियुक्त किया। राज्यों से बसों के जरिए गरीब मजदूरों को लाने की योजना बनाई, लेकिन उपाय कारगर न होने पर मजदूर लॉकडाउन 4.0 की घोषणा सुनकर पैदल निकल पड़े।

इस दौरान तमाम मजदूरों की सड़क हादसों मृत्य हो गई। मजदूरों की रास्ते में भूख, प्यास से मृत्यु हो गई और उनकी मार्मिक तस्वीरें सामने आने लगीं। उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव स्तर के अफसरों का कहना है कि गरीब मजदूरों को लेकर हड़बड़ी में कई निर्णय हो गए, जिसके कारण राज्य सरकार की परेशानी बढ़ गई है।

भाजपा के तीन प्रवक्ताओं ने साधी चुप्पी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रवैये पर भाजपा के तीन प्रवक्ताओं ने कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। एक प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस की तरफ से उपलब्ध कराई गई बसों की सूची में गलत जानकारियां थी। इसके अलावा बसों की फिटनेस का भी मामला है।



एक अन्य प्रवक्ता ने कहा कि सरकार इस बारे में उचित निर्णय ले रही है। जबकि एक अन्य प्रवक्ता ने कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा को ऐसे समय में राजनीति करने से बचना चाहिए। समय संवेदनशील है और उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश की जनता देख रही है।

लेकिन तीनों प्रवक्ताओं ने अपनी इस टिप्पणी को ऑफ द रिकार्ड बताया। दो प्रवक्ता ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश सरकार का मामला है और राज्य सरकार इस मामले में पक्ष रही है।

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