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Chitrakoot News: पानी में डूबी गेहूं की फसल सड़ी, मुआवजे की गुहार
Fri, 08 May 2026 12:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 08 May 2026 12:44 AM IST
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फोटो 07 सीकेटीपी-19 - लोढ़वारा में सड़ रही गेहूं फसल दिखाता किसान। संवाद
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चित्रकूट।लोढ़वारा गांव में लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गांव के किसान रेवतीरमन त्रिपाठी की दो हेक्टेयर में तैयार गेहूं की फसल बारिश में भीगकर सड़ने लगी है। किसान ने फसल बीमा कंपनी पर वास्तविक नुकसान से कम आकलन करने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से मुआवजे की मांग की है।
किसान ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल 28 अप्रैल को कट चुकी थी। अगले ही दिन 29 अप्रैल को हुई बारिश में खेत में रखी फसल पूरी तरह भीग गई। बारिश के कारण आधे से अधिक गेहूं खराब हो गया। कई दिनों तक फसल पानी में पड़ी रहने से दाने काले पड़ने लगे और सड़न शुरू हो गई। चार मई को फसल बीमा कंपनी की टीम सर्वे के लिए पहुंची, लेकिन टीम ने नुकसान का आकलन महज दो प्रतिशत बताया।
किसान ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद पांच मई को फिर तेज बारिश हो गई। इससे खेत में पड़ी पूरी फसल और अधिक खराब हो गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए किसान ने छह मई को जिलाधिकारी पुलकित गर्ग से मिलकर मुआवजे की गुहार लगाई। जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जांच कराई।
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जांच के दौरान खेत में करीब 80 प्रतिशत नुकसान पाया गया, लेकिन बाद में कार्यालय रिपोर्ट में नुकसान केवल 60 प्रतिशत दर्ज किया गया। बृहस्पतिवार की सुबह से फिर बारिश शुरू होने के कारण खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। किसान का कहना है कि यदि बीमा कंपनी की टीम देरी से पहुंची तो धूप निकलने के बाद नुकसान कम दिखाकर उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलेगा। किसान ने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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किसान ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल 28 अप्रैल को कट चुकी थी। अगले ही दिन 29 अप्रैल को हुई बारिश में खेत में रखी फसल पूरी तरह भीग गई। बारिश के कारण आधे से अधिक गेहूं खराब हो गया। कई दिनों तक फसल पानी में पड़ी रहने से दाने काले पड़ने लगे और सड़न शुरू हो गई। चार मई को फसल बीमा कंपनी की टीम सर्वे के लिए पहुंची, लेकिन टीम ने नुकसान का आकलन महज दो प्रतिशत बताया।
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किसान ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद पांच मई को फिर तेज बारिश हो गई। इससे खेत में पड़ी पूरी फसल और अधिक खराब हो गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए किसान ने छह मई को जिलाधिकारी पुलकित गर्ग से मिलकर मुआवजे की गुहार लगाई। जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जांच कराई।
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जांच के दौरान खेत में करीब 80 प्रतिशत नुकसान पाया गया, लेकिन बाद में कार्यालय रिपोर्ट में नुकसान केवल 60 प्रतिशत दर्ज किया गया। बृहस्पतिवार की सुबह से फिर बारिश शुरू होने के कारण खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। किसान का कहना है कि यदि बीमा कंपनी की टीम देरी से पहुंची तो धूप निकलने के बाद नुकसान कम दिखाकर उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलेगा। किसान ने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा दिलाने की मांग की है।