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Chitrakoot News: लखनऊ के हाउसिंग कांप्लेक्स में दो अफसरों के मिले तीन फ्लैट

Wed, 03 Dec 2025 01:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Wed, 03 Dec 2025 01:05 AM IST
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Three flats belonging to two officers found in a housing complex in Lucknow
चित्रकूट। कोषागार घोटाला में नामजद पेंशनर, बिचौलिया व कोषागार अफसरों-कर्मियों भी संपत्तियां एसआईटी खंगालने में जुट गई है। वरिष्ठ कोषाधिकारी की संपत्तियों की जानकारी करने लखनऊ गई टीम ने मंगलवार को ब्योरा खंगाला। जांच में लखनऊ के एक हाउसिंग कांप्लेक्स में दो अधिकारियों के तीन फ्लैट होने की जानकारी मिली है। दोनों अधिकारी चित्रकूट जिले में कोषागार विभाग के हैं।
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43.13 करोड़ के कोषागार घोटाला मामले में सभी नामजदों की संपत्ति का ब्योरा पहले ही मांगा जा चुका है। 24 दिन बाद भी अभी तक पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला है। जांच में कई मामले में विभाग के अन्य अधिकारियों की कार्यशैली, पटल से हुए भुगतान, एप संचालन व डिजिटल हस्ताक्षर को लेकर एसआईटी को शक हुआ। ऐसे में दो पुलिस कर्मियों को कोषागार के अफसरों की संपत्तियां लखनऊ में होने का पता लगाने के लिए भेजा गया। मंगलवार को जांच में पता चला कि दोनों अधिकारियों के सबसे महंगे हाउसिंग कांप्लेक्स में फ्लैट हैं। इनकी कीमत डेढ़ करोड़ तक आंकी गई है।
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इस मामले में एसआईटी प्रभारी सीओ अरविंद वर्मा ने बताया कि जांच जारी है, जब तक पूरे रिकार्ड न मिल जाएं तब तक कुछ कहना जल्दबाजी होगी। लगातार विभागीय अधिकारियों की संपत्ति से पेंशन घोटाले के कागजात चेक किए जा रहे हैं। कई जगह जांच के लिए टीम के सदस्य भेजे जाते हैं। इसी क्रम में एसआईटी ने संपत्ति का ब्योरा न देने वालों को फिर से नोटिस जारी की है। उनसे तीन दिन के अंदर जवाब देने के लिए कहा गया है। 93 पेंशनर व विभागीय अधिकारियों की आधी अधूरी जानकारी मिली है। इससे जांच को आगे बढ़ाने में एसआईटी परेशान है।
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सभी फाइलों को फिर से खुलवाई, 50 फाइल ले गई एसआईटी
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। कोषागार घोटाला मामले की तीन दिन तक विभाग में छानबीन व ऑनलाइन रिकार्ड तलाशने के बाद मंगलवार को फिर से एसआईटी पहुंची। 93 लोगों की जांच के बाद विभाग को सौंपी गई फाइलों को संदेह होने पर फिर से खुलवाया। कई भुगतान व निकासी का रिकार्ड बैंक से न मिलने के बाद एसआईटी ने सारी फाइलें खुलवाई हैं।
जांच टीम जब फिर से कोषागार विभाग पहुंची तो सारे अधिकारी व कर्मचारी सन्न रह गए। जांच टीम ने वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह के कक्ष में ही सारी फाइलें खुलवाकर इनकी दुबारा से जांच कराई। खासकर दस उन खातों में जिनके नंबर बदलकर भुगतान किया गया। माना जा रहा है कि इनका रिकार्ड बैंक से न मिलने के कारण एसआईटी ने फिर से सारी फाइलें खुलवाई हैं। जांच टीम ने वरिष्ठ कोषाधिकारी के सामने ही फिर से भुगतान प्रक्रिया पटल से भुगतान किस किस पटल से होकर जाने की जानकारी जुटाई। यहां तक कि डिजिटल हस्ताक्षर मामले में सामने आया कि एक दो जगह अलग अलग हस्ताक्षर हैं। गौरतलब है कि जांच के दौरान ही एकाउंटेंट राजबहादुर,योगेंद्र व राजेश ने कई बार बताया भी है कि उनके अवकाश पर होने के दौरान यह भुगतान हुए हैं। पांच घंटे तक फाइलों का फिर से अवलोकन करने के बाद 50 फाइलों को एसआईटी अपने साथ लेकर कागजोंं का मिलान करने के लिए लेकर गई है।

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जमा हुई धनराशि
चित्रकूट। एक सप्ताह के अंदर पेंशनर बृजनंदन ने मंगलवार को दुबारा एक लाख 50 हजार रुपये जमा कराए हैं। इसके पूर्व उसने बुधवार को एक लाख 40 हजार जमा किए थे। अब खाते के अनुसार लगभग एक लाख का बकाया है। यह अभी जेल में नहीं है। 43.13 करोड़ के घोटाले में अबतक लगभग तीन करोड़ 64 लाख की रिकवरी हो चुकी है। लगभग एक माह से किसी अन्य ने कोई धनराशि जमा नहीं की है। संवाद
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