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Chitrakoot News: सौर ऊर्जा और डिफेंस कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर
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चित्रकूट। जिले को विकास के पथ पर दौड़ाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए निजी कंपनियां आमंत्रित की गई हैं। डिफेंस कॉरिडोर स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को तीर्थनगरी से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है। तीर्थ स्थलों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि जिस रास्ते पर कदम बढ़ गए हैं, उस मग पर पग बढ़ते ही जाएं।
डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य लगभग पूरा
जिले के पहाड़ी विकास खंड में कर्वी-राजापुर मार्ग के किनारे बक्टा और पथरा समेत कई गांवों की जमीन लेकर डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसके लिए 100.759 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें से 100.111 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। शेष की स्वीकृति ली जा चुकी है। जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। कॉरिडोर के लिए शासन ने 400 करोड़ रुपये का बजट रखा है। सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। इस स्थान पर सेना के लिए शस्त्र, बंदूक, गोला बारूद आदि बनाने की योजना है।
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धर्मनगरी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा लिंक एक्सप्रेसवे
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से चित्रकूट को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए 228 करोड़ रुपये से 15 किलोमीटर का चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। पहले चरण में सरकार ने 100 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह भरतकूप से शुरू होकर बेड़ी पुलिया रामघाट फोरलेन सड़क से रानीपुर भट्ट तालाब के पास जुड़ेगा। करीब 79 प्रतिशत भूमि का बैनामा हो चुका है। एक प्रतिशत और भूमि का बैनामा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
सदर के तहसीलदार वाचस्पति सिंह ने बताया कि लिंक एक्सप्रेसवे के लिए कुल 165.5 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें करीब 12 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। किसानों से करीब 153 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत करनी है। बनाए जाने वाले मार्ग में भरतकूप सहित रामपुरमापी भरतकूप, तराव, भरथौल, बिहारा, खोही, ग्राम बंदरकोल शामिल हैं।
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कई तीर्थ स्थलों को किया जा रहा विकसित
जिले के धार्मिक स्थलों के विकास के लिए सरकार ने 24 अगस्त 2021 को चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन किया था। इसके बाद से एकीकृत पर्यटन विकास के लिए सरकार ने 102 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं स्वीकृत की हैं। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा ने बताया कि चित्रकूट धाम तीर्थ विकास प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी एसडीएम पंकज वर्मा को बनाया गया है। प्रभु श्रीराम की तपोस्थली को पर्यटन हब बनाया जा रहा है। परिषद का गठन होने के बाद पहला बजट सितंबर 2022 में मिला था। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 130.47 लाख रुपये की लागत से राजापुर में तुलसी स्मारक का विकास किया गया है। वर्ष 2022 मेंं 164.70 लाख से तीर्थ विकास परिषद का कार्यालय बनाया गया है। 401.97 लाख रुपये से कामदगिरि मार्ग में दो गेट बनाए गए हैं। 19.37 लाख से सूरज कुंड स्थल का विकास किया गया है।
परिक्रमा मार्ग पर 61.07 लाख से भरतकूप मंंदिर का विकास किया जा रहा है। 2023-24 में 25.73 लाख से वाल्मीकि आश्रम में महर्षि की 12.5 फीट की प्रतिमा लगाई जाएगी। वाल्मीकि आश्रम के निकट 2089 लाख से पर्यटन सुविधा केंद्र बनाया जाएगा। गणेशबाग में श्रीराम वाटिका इको पार्क का 1138.93 लाख रुपये निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा दिवाली मेला सहित प्रमुख अमावस्या मेला में भव्य सजावट की जा रही है। संवाद
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चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन करने के बाद चार वित्तीय वर्ष में मिला बजट लाख में
वर्ष- बजट
2021 -22 - 130.47
2022-23 - 1435.84
2023-24 - 8645-56
कुल योग - 10211.87
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बरगढ़ में लगेगा पेप्सी का प्लांट
पेप्सी बॉटलिंग प्लांट वरुण बेवरीज लिमिटेड की ओर से जिले में शीतल पेय फैक्टरी लगाने के लिए 500 करोड़ रुपये का निवेश करने का वादा किया गया है। इस प्लांट के लगने से करीब 1200 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। बताया जा रहा है कि वर्ष 1989 में प्रयागराज से सटे बरगढ़ क्षेत्र को औद्योगिक नगरी के रूप में विकसित करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर जमीन अधिगृहीत की गई थी। इस इलाके में ग्लास फैक्टरी लगाई जानी थी। ग्लास फैक्टरी तो नहीं लग पाई। अब इस क्षेत्र में पेप्सी का प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है।
निवेश के लिए 68 प्रतिशत ने भरी हामी
उद्योग लगाने के लिए लखनऊ में हुई इन्वेस्टर समिट में विभिन्न उद्योगपतियों ने कारखाना लगाने के लिए हामी भरी है। चित्रकूट जिले के लिए 264 करोड़ रुपये का निवेश समझौता किया गया है। इनमें से निवेश के लिए अब तक 68 प्रतिशत ने हामी भरी है।
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दो सौर ऊर्जा पावर पार्क बने, अदाणी ग्रुप सहित कई तलाश रहे जमीन
जिले में दो कंपनियों का सोलर पावर पार्क बन गया है। गौतम अदाणी की कंपनी सात सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। राजापुर क्षेत्र के छीबों गांव में 25 मेगावाट के दो सोलर पावर पार्क बन गए हैं। 25 मेगावाट का प्लांट लगाने के लिए श्री सीमेंट कंपनी मानिकपुर तहसील के मदना और अगहुंडडा गांव में जमीन खरीदने की तैयारी कर रही है। बरगढ़ क्षेत्र में 800 मेगावाट का सोलर पावर पार्क बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की जा रही है। अदाणी ग्रुप भी सात पावर प्लांट लगाने के लिए जमीन की तलाश कर रहा है। जानकार बताते हैं कि जिले का मौसम सौर ऊर्जा प्लांट के लिए अनुकूल है। गर्मियों में तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाता है।
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जिले में पथरीली जमीन होने के कारण अधिकतर जमीन खाली पड़ी है। एक-एक किसान के पास 60 से 80 बीघा जमीन है। इसमें दस से 20 बीघे मेंं वह खेती करता है, बाकी जमीन खाली पड़ी रहती है। पर्याप्त जमीन को देखते हुए बाहर की कंपनियां यहां पर निवेश करना चाहती हैं।
- योगेश जैन, व्यापारी
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सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के बाद बिजली विभाग का लोड काफी कम हो जाएगा। सौर ऊर्जा प्लांट से जिले को बिजली मिलेगी तो विभाग बिजली सुधार के लिए दूसरे कार्यों पर ध्यान दे पाएगा। - शिवशरणप्पा, डीएम चित्रकूट
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जमीन खरीदने में आ रही बांधा
सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए जमीन खरीदने में कुछ बाधाएं आ रही हैं। मसलन, बरगढ़ क्षेत्र में लगाए जा रहे प्लांट के लिए खरीदी जा रही जमीन का कुछ किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। इस वजह से जमीन खरीदने का कार्य पूरा नहीं हो सका है। वहीं, जिला प्रशासन की तरफ से कुछ जमीन ग्राम समाज की दी गई है।
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डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य लगभग पूरा
जिले के पहाड़ी विकास खंड में कर्वी-राजापुर मार्ग के किनारे बक्टा और पथरा समेत कई गांवों की जमीन लेकर डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसके लिए 100.759 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें से 100.111 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। शेष की स्वीकृति ली जा चुकी है। जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। कॉरिडोर के लिए शासन ने 400 करोड़ रुपये का बजट रखा है। सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। इस स्थान पर सेना के लिए शस्त्र, बंदूक, गोला बारूद आदि बनाने की योजना है।
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धर्मनगरी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा लिंक एक्सप्रेसवे
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से चित्रकूट को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए 228 करोड़ रुपये से 15 किलोमीटर का चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। पहले चरण में सरकार ने 100 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह भरतकूप से शुरू होकर बेड़ी पुलिया रामघाट फोरलेन सड़क से रानीपुर भट्ट तालाब के पास जुड़ेगा। करीब 79 प्रतिशत भूमि का बैनामा हो चुका है। एक प्रतिशत और भूमि का बैनामा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
सदर के तहसीलदार वाचस्पति सिंह ने बताया कि लिंक एक्सप्रेसवे के लिए कुल 165.5 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें करीब 12 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। किसानों से करीब 153 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत करनी है। बनाए जाने वाले मार्ग में भरतकूप सहित रामपुरमापी भरतकूप, तराव, भरथौल, बिहारा, खोही, ग्राम बंदरकोल शामिल हैं।
कई तीर्थ स्थलों को किया जा रहा विकसित
जिले के धार्मिक स्थलों के विकास के लिए सरकार ने 24 अगस्त 2021 को चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन किया था। इसके बाद से एकीकृत पर्यटन विकास के लिए सरकार ने 102 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं स्वीकृत की हैं। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा ने बताया कि चित्रकूट धाम तीर्थ विकास प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी एसडीएम पंकज वर्मा को बनाया गया है। प्रभु श्रीराम की तपोस्थली को पर्यटन हब बनाया जा रहा है। परिषद का गठन होने के बाद पहला बजट सितंबर 2022 में मिला था। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 130.47 लाख रुपये की लागत से राजापुर में तुलसी स्मारक का विकास किया गया है। वर्ष 2022 मेंं 164.70 लाख से तीर्थ विकास परिषद का कार्यालय बनाया गया है। 401.97 लाख रुपये से कामदगिरि मार्ग में दो गेट बनाए गए हैं। 19.37 लाख से सूरज कुंड स्थल का विकास किया गया है।
परिक्रमा मार्ग पर 61.07 लाख से भरतकूप मंंदिर का विकास किया जा रहा है। 2023-24 में 25.73 लाख से वाल्मीकि आश्रम में महर्षि की 12.5 फीट की प्रतिमा लगाई जाएगी। वाल्मीकि आश्रम के निकट 2089 लाख से पर्यटन सुविधा केंद्र बनाया जाएगा। गणेशबाग में श्रीराम वाटिका इको पार्क का 1138.93 लाख रुपये निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा दिवाली मेला सहित प्रमुख अमावस्या मेला में भव्य सजावट की जा रही है। संवाद
चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन करने के बाद चार वित्तीय वर्ष में मिला बजट लाख में
वर्ष- बजट
2021 -22 - 130.47
2022-23 - 1435.84
2023-24 - 8645-56
कुल योग - 10211.87
बरगढ़ में लगेगा पेप्सी का प्लांट
पेप्सी बॉटलिंग प्लांट वरुण बेवरीज लिमिटेड की ओर से जिले में शीतल पेय फैक्टरी लगाने के लिए 500 करोड़ रुपये का निवेश करने का वादा किया गया है। इस प्लांट के लगने से करीब 1200 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। बताया जा रहा है कि वर्ष 1989 में प्रयागराज से सटे बरगढ़ क्षेत्र को औद्योगिक नगरी के रूप में विकसित करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर जमीन अधिगृहीत की गई थी। इस इलाके में ग्लास फैक्टरी लगाई जानी थी। ग्लास फैक्टरी तो नहीं लग पाई। अब इस क्षेत्र में पेप्सी का प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है।
निवेश के लिए 68 प्रतिशत ने भरी हामी
उद्योग लगाने के लिए लखनऊ में हुई इन्वेस्टर समिट में विभिन्न उद्योगपतियों ने कारखाना लगाने के लिए हामी भरी है। चित्रकूट जिले के लिए 264 करोड़ रुपये का निवेश समझौता किया गया है। इनमें से निवेश के लिए अब तक 68 प्रतिशत ने हामी भरी है।
दो सौर ऊर्जा पावर पार्क बने, अदाणी ग्रुप सहित कई तलाश रहे जमीन
जिले में दो कंपनियों का सोलर पावर पार्क बन गया है। गौतम अदाणी की कंपनी सात सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। राजापुर क्षेत्र के छीबों गांव में 25 मेगावाट के दो सोलर पावर पार्क बन गए हैं। 25 मेगावाट का प्लांट लगाने के लिए श्री सीमेंट कंपनी मानिकपुर तहसील के मदना और अगहुंडडा गांव में जमीन खरीदने की तैयारी कर रही है। बरगढ़ क्षेत्र में 800 मेगावाट का सोलर पावर पार्क बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की जा रही है। अदाणी ग्रुप भी सात पावर प्लांट लगाने के लिए जमीन की तलाश कर रहा है। जानकार बताते हैं कि जिले का मौसम सौर ऊर्जा प्लांट के लिए अनुकूल है। गर्मियों में तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाता है।
जिले में पथरीली जमीन होने के कारण अधिकतर जमीन खाली पड़ी है। एक-एक किसान के पास 60 से 80 बीघा जमीन है। इसमें दस से 20 बीघे मेंं वह खेती करता है, बाकी जमीन खाली पड़ी रहती है। पर्याप्त जमीन को देखते हुए बाहर की कंपनियां यहां पर निवेश करना चाहती हैं।
- योगेश जैन, व्यापारी
सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के बाद बिजली विभाग का लोड काफी कम हो जाएगा। सौर ऊर्जा प्लांट से जिले को बिजली मिलेगी तो विभाग बिजली सुधार के लिए दूसरे कार्यों पर ध्यान दे पाएगा। - शिवशरणप्पा, डीएम चित्रकूट
जमीन खरीदने में आ रही बांधा
सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए जमीन खरीदने में कुछ बाधाएं आ रही हैं। मसलन, बरगढ़ क्षेत्र में लगाए जा रहे प्लांट के लिए खरीदी जा रही जमीन का कुछ किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। इस वजह से जमीन खरीदने का कार्य पूरा नहीं हो सका है। वहीं, जिला प्रशासन की तरफ से कुछ जमीन ग्राम समाज की दी गई है।