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Chitrakoot News: हत्यारे कल्लू के एनकाउंटर ने डकैतों को ढेर करने याद की ताजा
Sat, 24 Jan 2026 11:32 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 24 Jan 2026 11:32 PM IST
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चित्रकूट। एनकाउंटर से जिले का पुराना नाता है। करीब एक दशक पहले तक चित्रकूट में डकैतों का आतंक चरम पर था। जंगलों और गांवों के आसपास गोलियों की आवाजें आम थीं, जिससे लोग भयभीत रहते थे। शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था और लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते थे। पुलिस द्वारा डकैतों के सफाए के बाद ही लोगों को इस दहशत से मुक्ति मिली थी लेकिन शुक्रवार भोर पहर एक बार फिर हुई मुठभेड़ ने उन खौफनाक दिनों की यादें ताजा कर दी हैं। इस मुठभेड़ में बरगढ़ कस्बा निवासी आयुष केसरवानी का अपहरण कर हत्या करने में शामिल हत्यारे कल्लू उर्फ साहबे आलम का एसओजी, एसटीएफ ने मिलकर एनकाउंटर किया है।
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डकैतों व बदमाशों के साथ पहले भी हो चुकी हैं मुठभेड़
केस नंबर-एक
ऐसा नहीं है कि जिले की पुलिस ने यह कोई पहली बार मुठभेड़ में आरोपियों को मार गिराया हो। इसके पहले भी कई मुठभेड़ पुलिस कर चुकी है। इसमें वर्ष 2021 में 30 अक्तूबर को बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के जंगल में छोटी बिलहरी गांव निवासी कुख्यात डकैत गौरी यादव को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था।
केस नंबर-दो
राजापुर थाना क्षेत्र के जमौली गांव में 16 जून 2009 को एक मुठभेड़ हुई, जिसमें 52 घंटे तक डकैत घनश्याम केवट और पुलिस के बीच गोलियां चलती रहीं। इस मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी शहीद हुए और छह घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने डकैत को मार गिराया था। यह एनकाउंटर की चर्चा पूरे प्रदेश में हुई थी।
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केस नंबर-तीन
मानिकपुर क्षेत्र के निही चिरैया गांव के औदर जंगल में अगस्त माह गुरुवार तड़के पुलिस की 5.30 लाख के इनामी डकैत बबुली कोल गैंग से मुठभेड़ हो गई। इसमें रैपुरा थाने में तैनात दरोगा जयप्रकाश शहीद हो गए। डकैतों की गोलियों से बहिलपुरवा थाने के दरोगा वीरेंद्र त्रिपाठी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने घेरा कसते हुए तीन डकैतों को धर दबोचा है। इनमें एक डकैत राजू कोल को पुलिस की गोली लगी है। गैंग सरगना समेत अन्य डकैत भाग निकले। इसके बाद पुलिस ने करीब 10 दिन बाद पुलिस ने तीन सिंतबर (रविवार) को देर रात मढियां के जंगलों में 12 हजार में इनामी डकैत शारदा कोल को मार गिराया।
केस नंबर-चार
धारकुंडी थानांतर्गत लेदरी जंगल में 16 सितंबर 2019 को डकैत बबुली कोल और उसके करीबी लवलेश कोल को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था।
केस नंबर-पांच
जंगलों में तीन दशक तक राज करने वाले शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ को जुलाई 2007 और अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया का अंत अगस्त 2008 में मुठभेड़ में ढेर किया था। यह दोनों डकैतों का यूपी व एमपी में बहुत आतंक रहा।
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पहले भी हो चुके हैं ऐसे जघन्य अपराध
- 13 फरवरी 2024 को रैपुरा कस्बा निवासी गुटखा व्यापारी राजधर कोटार्य के किशोर बेटे का अपहरण कर लिया गया था। दो दिनों से लापता किशोर के पिता से अपहरणकर्ताओं ने 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। शुरुआत में परिजनों ने इस कॉल को गंभीरता से नहीं लिया लेकिन दोबारा फोन आने पर पत्नी ने थाने पहुंचकर पुलिस को सूचित किया। इसके बाद पुलिस ने देर शाम देवांगना घाटी के जंगल से किशोर का शव बरामद किया। उसकी निर्मम हत्या की गई थी और सिर पत्थर से कुचला हुआ मिला था।
- 12 फरवरी 2019 को भी एक ऐसी ही भयावह घटना सामने आई थी। उस समय चित्रकूट के एक तेल व्यापारी के 10 वर्षीय जुड़वा बेटों को स्कूल जाते समय अगवा कर लिया गया था। परिजनों ने अपहरण कर्ताओं की मांग के अनुसार 20 लाख रुपये की फिरौती भी अदा की थी लेकिन इसके बावजूद अपहरणकर्ताओं ने दोनों मासूमों की हत्या कर दी थी।
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डकैतों व बदमाशों के साथ पहले भी हो चुकी हैं मुठभेड़
केस नंबर-एक
ऐसा नहीं है कि जिले की पुलिस ने यह कोई पहली बार मुठभेड़ में आरोपियों को मार गिराया हो। इसके पहले भी कई मुठभेड़ पुलिस कर चुकी है। इसमें वर्ष 2021 में 30 अक्तूबर को बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के जंगल में छोटी बिलहरी गांव निवासी कुख्यात डकैत गौरी यादव को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था।
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केस नंबर-दो
राजापुर थाना क्षेत्र के जमौली गांव में 16 जून 2009 को एक मुठभेड़ हुई, जिसमें 52 घंटे तक डकैत घनश्याम केवट और पुलिस के बीच गोलियां चलती रहीं। इस मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी शहीद हुए और छह घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने डकैत को मार गिराया था। यह एनकाउंटर की चर्चा पूरे प्रदेश में हुई थी।
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केस नंबर-तीन
मानिकपुर क्षेत्र के निही चिरैया गांव के औदर जंगल में अगस्त माह गुरुवार तड़के पुलिस की 5.30 लाख के इनामी डकैत बबुली कोल गैंग से मुठभेड़ हो गई। इसमें रैपुरा थाने में तैनात दरोगा जयप्रकाश शहीद हो गए। डकैतों की गोलियों से बहिलपुरवा थाने के दरोगा वीरेंद्र त्रिपाठी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने घेरा कसते हुए तीन डकैतों को धर दबोचा है। इनमें एक डकैत राजू कोल को पुलिस की गोली लगी है। गैंग सरगना समेत अन्य डकैत भाग निकले। इसके बाद पुलिस ने करीब 10 दिन बाद पुलिस ने तीन सिंतबर (रविवार) को देर रात मढियां के जंगलों में 12 हजार में इनामी डकैत शारदा कोल को मार गिराया।
केस नंबर-चार
धारकुंडी थानांतर्गत लेदरी जंगल में 16 सितंबर 2019 को डकैत बबुली कोल और उसके करीबी लवलेश कोल को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था।
केस नंबर-पांच
जंगलों में तीन दशक तक राज करने वाले शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ को जुलाई 2007 और अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया का अंत अगस्त 2008 में मुठभेड़ में ढेर किया था। यह दोनों डकैतों का यूपी व एमपी में बहुत आतंक रहा।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे जघन्य अपराध
- 13 फरवरी 2024 को रैपुरा कस्बा निवासी गुटखा व्यापारी राजधर कोटार्य के किशोर बेटे का अपहरण कर लिया गया था। दो दिनों से लापता किशोर के पिता से अपहरणकर्ताओं ने 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। शुरुआत में परिजनों ने इस कॉल को गंभीरता से नहीं लिया लेकिन दोबारा फोन आने पर पत्नी ने थाने पहुंचकर पुलिस को सूचित किया। इसके बाद पुलिस ने देर शाम देवांगना घाटी के जंगल से किशोर का शव बरामद किया। उसकी निर्मम हत्या की गई थी और सिर पत्थर से कुचला हुआ मिला था।
- 12 फरवरी 2019 को भी एक ऐसी ही भयावह घटना सामने आई थी। उस समय चित्रकूट के एक तेल व्यापारी के 10 वर्षीय जुड़वा बेटों को स्कूल जाते समय अगवा कर लिया गया था। परिजनों ने अपहरण कर्ताओं की मांग के अनुसार 20 लाख रुपये की फिरौती भी अदा की थी लेकिन इसके बावजूद अपहरणकर्ताओं ने दोनों मासूमों की हत्या कर दी थी।