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मुर्गीपालन व्यवसाय के दिए गए चूजे

Fri, 04 Dec 2015 11:02 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, चित्रकूट
ब्यूरो अमर उजाला, चित्रकूट Updated Fri, 04 Dec 2015 11:02 PM IST
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The chicks of poultry business

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चित्रकूट। शासन से पशुपालन विभाग द्वारा जिले के अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों को चूजे वितरित किए गए। बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के यह कार्यक्रम चलाया गया। इस योजना के तहत जिले के पांचों ब्लाक के कुल चार सौ लाभार्थियों को शुक्रवार को पचास-पचास चूजे नि:शुल्क दिए गए।

पशुपालन विभाग द्वारा बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के तहत लाभार्थियों का चयन करके मुर्गी पालन के लिए नि:शुल्क चूजों का वितरण किया जा रहा है। इस वर्ष इस योजना के तहत जिले में चार सौ लाभार्थियों का चयन करने का लक्ष्य मिला था।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एन के गहलौत ने बताया कि इस योजना के तहत ग्राम प्रधान और पशुचिकित्सक के द्वारा अनुसूचित जाति- जनजाति के लोगों को चूजे वितरण करने का लक्ष्य मिला था। उसमें यह देख गया था कि लाभार्थी की आर्थिक हालत कमजोर होने के साथ ही उसके पास चूजों का पालन करने के लिए घर में ही थोड़ा स्थान हो।
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बताया कि इस योजना के तहत जिले के पांचों ब्लाकों में कुल चार सौ लाभार्थियों का चयन करने का लक्ष्य आया था। इसके तहत कर्वी ब्लाक में 74, मानिकपुर में 150, पहाड़ी ब्लाक में 141, रामनगर में 27 और मऊ में आठ लाभार्थियों का चयन किया गया।

शुक्रवार को सभी ब्लाकों के पशु चिकित्सालयों पर चूजों का वितरण किया गया। बताया कि इस योजना का मुख्य लक्ष्य उन गरीब परिवारों से है जो मुर्गी पालन करके अपनी आजीविका चलाना चाहते हैं, लेकिन धन राशि के अभाव में ऐसा नहीं कर पाते हैं। इस मौके पर एलईओ संदीप पांडे भी मौजूद रहे।


मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एन के गहलौत ने बताया कि योजना के तहत लाभार्थियों को चूजों को खिलाने के लिए दो माह का दाना और प्रति लाभार्थी इनके लिए छप्पर (बाड़ा) बनाने के लिए साढ़े चार सौ रुपए दिए जाएंगे। बताया कि यह धन राशि नकद न देकर सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाएगी।


योजना के तहत शुक्रवार को चूजे लेने के लिए आए लाभार्थी नि:शुल्क चूजे पाकर काफी खुश नजर आए। इमलिहा पुरवा के जितेंद्र का कहना था कि उसने मुर्गी पालन के लिए कई बार सोचा पर धनराशि के अभाव में वे नहीं कर सका। इस बार इस योजना से वह लाभान्वित हुआ है।


इनको पालकर वह इस व्यवसाय की धीरे- धीरे शुरुआत करेगा। नारायण पुरवा निवासी साठ वर्षीय दशिया का कहना था कि उसने कई वर्षों पहले एक बार मुर्गी पालन किया था, लेकिन उसमें मुर्गियां रोग के कारण खत्म हो गई। ज्यादातर लाभार्थियों का कहना था कि वे इन चूजों को बोयलर के रूप में नहीं बेचकर अंडा व्यवसाय में प्रयोग करेंगे।

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