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पुलिस के तेवर से बिगड़े हालात
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Wed, 12 Oct 2016 11:46 PM IST
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बवाल करते लोग।
- फोटो : amarujala
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ट्रैफिक चौराहे पर मूर्ति विसर्जन को जा रहे लोगों से हुए पुलिस के विवाद में कुछ बिंदुओं पर चूक सामने आई है। शुरुआती दौर में जब पुलिस को जिद पर अड़े लोगों को समझाना चाहिए था तो उसने तेवर का इस्तेमाल किया और लोगों पर लाठियां भांजनी शुरू कर दी। इसी का परिणाम रहा कि लोगों को गुस्सा भड़का और विवाद ज्यादा बढ़ गया।
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रास्ता बदलने की बात पर हुए उपद्रव जैसे हालात बनने पर मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थानीय समाजसेवियों की भी मदद नहीं ली। पीस कमेटी की बैठकों के दौरान हर देवी पंडाल के आयोजकों को एक शांति समिति में शामिल किया गया था। जिसमें तय हुआ था कि कहीं भी मामला बिगड़ने पर समाजसेवी स्थिति संभालेंगे।
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लेकिन ट्रैफिक चौराहे पर मौजूद अधिकारी व कर्मियोें ने ऐसा न कर सीधे लाठियां भांजनी शुरू कर दी। इसके अलावा प्रशासन और पुलिस ने देवी पंडालों के आयोजकों से करार कराया था कि शाम 5 बजे के बाद मूर्तियां विसर्जित नहीं की जाएंगी।
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पुलिस को इस ओर भी ध्यान देना था कि अगर कुछ मूर्तियां देरी से विसर्जन के लिए जाती हैं तो उन्हें दूसरे रास्ते मसलन, हाईवे या फिर बाईपास से होकर गुजार दिया जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बहरहाल मौके पर डीएम मोनिका रानी व एसपी केके चौधरी ने पहुंचकर मामला को शांत कर कलेक्ट्रेट परिसर के पास राना तालाब में मूर्ति का विसर्जन करा दिया।
पहले भी हो चुका है टकराव
पिछले साल भी मूर्ति विसर्जन व मोहर्रम का पर्व आसपास था। निर्धारित समय के बाद इसी मार्ग से होकर मूर्ति निकालने पर पुलिस ने रास्ता बदलवाने का प्रयास किया तो दोनों पक्षों में टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस ने पिछली बार की गलती से अगर सीख ली होती तो यह स्थिति न बनती।
ट्रैक्टर चलते ही हुआ विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब विवाद चल रहा था तो कुछ नाराज युवक मूर्तियां छोड़कर लौटने लगे। तभी एक मूर्ति लदा ट्रैक्टर अचानक आगे बढ़ने लगा। यह देखकर एसडीएम नरेंद्र बहादुर ने ट्रैैक्टर के आगे खड़े होकर रोकने का प्रयास किया। उनकी मदद के लिए एक सिपाही भी हाथ लगाकर खड़ा हो गया। किसी तरह ट्रैक्टर रुका तो नाराज एसडीएम व सीओ ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के निर्देश दिए। जिससे बात बिगड़ गई।