{"_id":"587bb27a4f1c1b3703efe3b1","slug":"son-ganesh-chaturthi-festival-is-celebrated-for-longevity","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुत्र की दीर्घायु के लिए मनाया गणेश चतुर्थी पर्व ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुत्र की दीर्घायु के लिए मनाया गणेश चतुर्थी पर्व
चित्रकूट
Updated Sun, 15 Jan 2017 11:03 PM IST
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मुख्यालय की बाजार में सिंघाडा व गुड आदि की खरीददारी करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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गणेश चतुर्थी का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। जिसमें महिलाओं ने पुत्र की दीर्घायु के लिए चांद की पूजा कर व्रत पारण किया। पर्व को लेकर बाजार में शकरकंद से लेकर तिल व सिंघाड़े की ज्यादा मांग रही।
रविवार को गणेश चतुर्थी मनाने के लिए महिलाओं ने सुबह से तिल, सिंघाडे़, शकरकंद आदि का पकवान बनाना शुरू कर दिया था। दिनभर व्रत रखकर शाम को घर के आंगन में तिल का पहाड़ व गन्ना रखकर पूजा की। रात में चांद निकलने पर पूजन कर व्रत पारण किया।
मान्यता है कि यह पूजा महिलाएं अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए करती हैं। गणेश चतुर्थी पर्व में शकरकंद का अधिक महत्व है। इस बार 70 से 90 रुपये प्रति पांच किलो के भाव में शकरकंद बेची गई। यह भाव पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा है।
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दुकानदारों का मानना है कि नोटबंदी के कारण ज्यादा स्टाक नहीं किया गया और बाजार में अचानक मांग बढ़ने से रेट मंहगा करना पड़ा। इसके अलावा गुड़, सिंघाडा बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि नोटबंदी के कारण बिक्री पिछले साल की अपेक्षा कमजोर रही।
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रविवार को गणेश चतुर्थी मनाने के लिए महिलाओं ने सुबह से तिल, सिंघाडे़, शकरकंद आदि का पकवान बनाना शुरू कर दिया था। दिनभर व्रत रखकर शाम को घर के आंगन में तिल का पहाड़ व गन्ना रखकर पूजा की। रात में चांद निकलने पर पूजन कर व्रत पारण किया।
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मान्यता है कि यह पूजा महिलाएं अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए करती हैं। गणेश चतुर्थी पर्व में शकरकंद का अधिक महत्व है। इस बार 70 से 90 रुपये प्रति पांच किलो के भाव में शकरकंद बेची गई। यह भाव पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा है।
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दुकानदारों का मानना है कि नोटबंदी के कारण ज्यादा स्टाक नहीं किया गया और बाजार में अचानक मांग बढ़ने से रेट मंहगा करना पड़ा। इसके अलावा गुड़, सिंघाडा बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि नोटबंदी के कारण बिक्री पिछले साल की अपेक्षा कमजोर रही।