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सेहरिन बनेगा वनवासी राम के रूप वाला कोदंड वन

Mon, 04 Jul 2022 11:27 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jul 2022 11:27 PM IST
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Sehrin will become a forest dweller in the form of Ram.
Sehrin will become a forest dweller in the form of Ram. - फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोभूमि में पहली बार सूबे के मुखिया पौधरोपण कर वन महोत्सव अभियान का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम स्थल को सजाने संवारने का काम वन विभाग ने कुछ इस तरह किया है कि भगवान राम के वनवास काल की याद ताजा हो जाए। बैनर पोस्टर में धनुषधारी भगवान श्रीराम के चित्रों को विशेष रूप से उकेरा गया है। इसी को भगवान का कोदंड रूप कहा गया है। ऐसे में विभाग ने इस क्षेत्र को कोदंड वन क्षेत्र घोषित किया है। सेहरिन क्षेत्र के 20 हेक्टेयर में 22 हजार पौधे लगाए जाएंगे।
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सीएम के कार्यक्रम के लिए लखनऊ से मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने यहां डेरा जमा रखा है। डीएफओ आरके दीक्षित के साथ पाठा क्षेत्र के सेहरिन वन ब्लॉक में पौधरोपण कार्यक्रम पर निगाह रखे हुए हैं। पीपी सिंह ने बताया कि प्रभु श्रीराम वनवास के लिए निकलते समय धनुष बाण जन्मस्थली अयोध्या में छोड़ आए थे। सुरक्षा के लिए यहां बांस से धनुष-तीर तैयार किए। प्रभु श्रीराम के इसी रूप को कोदंड कहते हैं। प्रदेश में पौधरोपण की शुरुआत वाले इस स्थान को कोदंड वन क्षेत्र के नाम से विकसित किया जाएगा। प्रदेश भर में 25 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री लगभग डेढ़ घंटे तक वन क्षेत्र में रहेंगे। इस कार्यक्रम में वन मंत्री डॉ. अरुण सक्सेना, मुख्य सचिव ममता संजीव दुबे, अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह शिरकत करेंगे। इसकी तैयारियां प्रशासन ने पूरी कर ली है।
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टाइगर रिजर्व से कामदगिरी मंदिर तक रिंग रोड
हाल ही में पाठा क्षेत्र के रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र को यूपी के सीएम ने टाइगर रिजर्व क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना को हरी झंडी दी है। एक रेस्क्यू सेंटर का भी काम जारी है। टाइगर रिजर्व क्षेत्र को रिंग रोड के जरिए धर्मनगरी के कामदगिरी मंदिर तक जोड़ने का प्रस्ताव वन विभाग ने भेजा है। प्रभागीय वनाधिकारी आरके दीक्षित ने बताया कि वन क्षेत्र से धर्मनगरी पहुंचने के लिए रिंग रोड का प्रस्ताव सीएम ने ही मांगा था। मुख्यमंत्री के आगमन पर यह प्रस्ताव सामने आ सकता है।
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प्रकृति: रक्षति रक्षिता
वन महोत्सव का मुख्य मकसद आम जन को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। इसके लिए कार्यक्रम में प्रकृति: रक्षति रक्षिता का मूल वाक्य दिया गया है। संस्कृत के विद्वान चंद्रदत्त पांडेय का कहना है कि इंसान प्रकृति की सुरक्षा करेगा तो प्रकृति खुद इंसान की रक्षा करेगी।
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