{"_id":"59077da74f1c1b5b35440ff7","slug":"occupying-the-pond-s-land-crisis-on-survival","type":"story","status":"publish","title_hn":"तालाब की जमीन में कब्जा, अस्तित्व पर संकट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तालाब की जमीन में कब्जा, अस्तित्व पर संकट
चित्रकूट
Updated Mon, 01 May 2017 11:55 PM IST
विज्ञापन
हाईकोर्ट के फैसले के बाद 12 बीघा में फैले इस तालाब के सूखे क्षेत्र में महाराजा पद्म सिंह स्टेडियम और पर्यटन की दृष्टि से तालाब को संवारने की कवायद प्रशासन ने शुरू कर दी है।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चित्रकूट। पहाड़ी क्षेत्र के गड़ौली गांव में बने तालाब में कब्जा करने से उसका अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है। तालाब गड्ढे में तब्दील हो गया। ग्रामीणों ने इसके अस्तिव को बचाने के लिए जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों को पत्र सौंप चुके हैं ताकि अतिक्रमण हटवाया जा सके।
गड़ौली गांव के बीचो बीच बने पुराने तालाब में चारो तरफ से अतिक्रमण कर लिया गया है। बताया जाता है कि तलाब बीघा छह बिस्वा में बना था। जिसमें चाराें तरफ से 10 फु ट कब्जा कर लिया गया है।
जिससे तालाब का पानी सूख गया है। पानी सूख जाने से यह छोटे तालाब में तब्दील हो गया है। पानी न रहने से गांव वालों के साथ ही जानवरों को भी परेशानी हो रही है। इस मामले को लेकर गांव के शिकायत कर्ता सर्वेश शुक्ला, चंद्रिका प्रसाद, पुल्लू रैदास, आदि ने जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों को तालाब के अस्तित्व को बचाने के लिए पत्र सौंप चुकें हैं।
विज्ञापन
गड़वाही दाई के नाम से जाना जाता
चित्रकूट। गड़ौली गांव के प्रधान पति परगा ने बताया कि गांव के लोग बताते है कि यहां पर तालाब था। जिसको आज गड़वाही दाई के नाम से जाना जाता है। सरकारी अभिलेख मे छूटा हुआ नंबर है। जिसकी पैमाइश होना चाहिए। गड़ौली गांव के हलका लेखपाल डीडी पटेल का कहना है कि जिस स्थान को तलाब कुछ लोग बता रहे हैं वह छूटा हुआ नंबर है।
मसरूप कहा जाता है।आदेश मिलने पर ही पैमाइश की जाएगी। जिसकी जमीन में कुछ लोगों ने समान रख लिया है।
विज्ञापन
गड़ौली गांव के बीचो बीच बने पुराने तालाब में चारो तरफ से अतिक्रमण कर लिया गया है। बताया जाता है कि तलाब बीघा छह बिस्वा में बना था। जिसमें चाराें तरफ से 10 फु ट कब्जा कर लिया गया है।
विज्ञापन
जिससे तालाब का पानी सूख गया है। पानी सूख जाने से यह छोटे तालाब में तब्दील हो गया है। पानी न रहने से गांव वालों के साथ ही जानवरों को भी परेशानी हो रही है। इस मामले को लेकर गांव के शिकायत कर्ता सर्वेश शुक्ला, चंद्रिका प्रसाद, पुल्लू रैदास, आदि ने जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों को तालाब के अस्तित्व को बचाने के लिए पत्र सौंप चुकें हैं।
विज्ञापन
गड़वाही दाई के नाम से जाना जाता
चित्रकूट। गड़ौली गांव के प्रधान पति परगा ने बताया कि गांव के लोग बताते है कि यहां पर तालाब था। जिसको आज गड़वाही दाई के नाम से जाना जाता है। सरकारी अभिलेख मे छूटा हुआ नंबर है। जिसकी पैमाइश होना चाहिए। गड़ौली गांव के हलका लेखपाल डीडी पटेल का कहना है कि जिस स्थान को तलाब कुछ लोग बता रहे हैं वह छूटा हुआ नंबर है।
मसरूप कहा जाता है।आदेश मिलने पर ही पैमाइश की जाएगी। जिसकी जमीन में कुछ लोगों ने समान रख लिया है।