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एशोआराम की जिंदगी के ख्वाब ने फंसाया
अमर उजाला ब्यूरो चित्रकूट
Updated Fri, 04 Nov 2016 11:24 PM IST
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मेडिकल परीक्षण के लिए जाती पकड़ी गईं लड़कियां
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गरीब परिवारों की लड़कियों को जल्द अमीर बनकर ऐशोआराम से रहने का ख्वाब दिखाकर इनसे बदनाम गली की एक महिला किराए के कमरे में बुलाकर वेश्यावृत्ति कराई जाती थी। पुलिस ने इस मामले में संचालिका को भी पकड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक पकड़ी गई लड़कियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे आर्थिक तंगी के कारण इस धंधे में आ गईं। पहले कमाई का शार्ट कट बताकर रुपयों का लालच देकर बुलाया जाता है। इसके बाद दोबारा सामान्य जीवन में लौटने नहीं दिया जाता है। गलत धंधे में उतारने के बाद संचालिका ब्लैक मेल करती है। पहचान सार्वजनिक कर फंसाने की धमकी भी देती है। ग्राहक को खुश करने के बाद उन्हें कमाई का एक हिस्सा दिया जाता है।
कोतवाल सत्यपाल सिंह ने बताया कि संचालिका को पकड़ा गया है। उसने अपना नाम ममता बताया है। वह किराए का कमरा लेकर वेश्यावृत्ति कराती थी। गरीब तबके की लड़कियों को अच्छे रहन सहन व जल्दी रुपये कमाने का सब्जबाग दिखाकर देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाता है। पकड़ी गई सभी लड़कियों को मोबाइल से फोन करके बुलाया जाता था।
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मुख्यालय के बदनाम गली के अलावा एक बदनाम कालोनी में भी अनैतिक धंधे की शिकायतें मिलती हैं। अब इसमें नाबालिग लड़कियों को भी उतारा जा रहा है। कई स्थानों पर बाहर से लड़कियां लाकर उनसे गलत धंधा कराते हैं। तमिलनाडु के ऊंटी की फ्रीडम फर्म नामक संस्था के खुलासे के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
संस्था की महिला कर्मचारी ज्योति और डेनजी ने बताया कि इलाहाबाद में उनकी संस्था कार्यरत है। एक माह से लगातार चित्रकूट जिले में नाबालिग लड़कियों से वेश्यावृत्ति कराने की शिकायत मिल रही थी। इस पर दो महिला व दो पुरूष कर्मचारियों ने एक सप्ताह से मुख्यालय व आसपास निगरानी की। पुष्टि होने पर एक नवंबर को पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर छापा डालने की मांग की गई। इस पर पुलिस व संस्था के कर्मचारियों ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया। शुक्रवार को दोपहर में संस्था के दो पुरुष कर्मचारी ग्राहक बनकर बदनाम गली में पहुंचे। वहां दो स्थानों पर लड़कियों के साथ अन्य ग्राहक की मौजूदगी पर युवकों ने अपनी महिला कर्मचारियाें को सूचना दी। इस पर एसपी द्वारा गठित टीम ने बदनाम गली में छापा मारा और सात लड़कियों व दो ग्राहकों को पकड़ लिया। सीओ ने बताया कि जिले में वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने की सूचनाएं मिली हैं। ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई होगी।
नाबालिगों को वेश्यावृत्ति के धंधे में जाने से रोकने की दिशा में काम करने वाली ऊंटी की संस्था के इलाहाबाद ब्रांच मैनेजर सुरेंद्र सहारे ने बताया कि ऐसी लड़कियों को बचाकर उनके पुनर्वास का इंतजाम किया जाता है। संस्था के कोलकाता, पुणे व ऊंटी में प्रशिक्षण केंद्र हैं। जहां समाज से ठुकराई अथवा मजबूर लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रशिक्षण मिलता है।
बदनाम गली में वेश्यावृत्ति कराने की शिकायत पर सीओ राजापुर बृजराज सिंह के नेतृत्व में कोतवाल सत्यपाल सिंह, महिला थाना प्रभारी मधुसूदन दीक्षित और सहप्रभारी रीता यादव ने पुलिस कर्मियों के साथ छापा मारा गया। पुलिस को देखते ही मौजूद लोग इधर-उधर छिपने लगे। पुलिस टीम ने तीन कमरों को खुलवाया जहां से सात लड़कियां पकड़ी गई। इनमें से कुछ नाबालिग होने की आशंका है। हालांकि इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट आने पर होगी। इसके अलावा मौके पर बाबूपुर पहाड़ी के सुशील सिंह और आनंद सिंह को ग्राहक के रूप में पकड़ा। कोतवाल ने बताया कि अनैतिक देह व्यापार के रैकेट संचालन की बात सामने आई है। सात लड़कियां पकड़ी गईं हैं जो खुद को बंादा-चित्रकूट जिले की ही निवासी बता रही हैं। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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सूत्रों के मुताबिक पकड़ी गई लड़कियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे आर्थिक तंगी के कारण इस धंधे में आ गईं। पहले कमाई का शार्ट कट बताकर रुपयों का लालच देकर बुलाया जाता है। इसके बाद दोबारा सामान्य जीवन में लौटने नहीं दिया जाता है। गलत धंधे में उतारने के बाद संचालिका ब्लैक मेल करती है। पहचान सार्वजनिक कर फंसाने की धमकी भी देती है। ग्राहक को खुश करने के बाद उन्हें कमाई का एक हिस्सा दिया जाता है।
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कोतवाल सत्यपाल सिंह ने बताया कि संचालिका को पकड़ा गया है। उसने अपना नाम ममता बताया है। वह किराए का कमरा लेकर वेश्यावृत्ति कराती थी। गरीब तबके की लड़कियों को अच्छे रहन सहन व जल्दी रुपये कमाने का सब्जबाग दिखाकर देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाता है। पकड़ी गई सभी लड़कियों को मोबाइल से फोन करके बुलाया जाता था।
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मुख्यालय के बदनाम गली के अलावा एक बदनाम कालोनी में भी अनैतिक धंधे की शिकायतें मिलती हैं। अब इसमें नाबालिग लड़कियों को भी उतारा जा रहा है। कई स्थानों पर बाहर से लड़कियां लाकर उनसे गलत धंधा कराते हैं। तमिलनाडु के ऊंटी की फ्रीडम फर्म नामक संस्था के खुलासे के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
संस्था की महिला कर्मचारी ज्योति और डेनजी ने बताया कि इलाहाबाद में उनकी संस्था कार्यरत है। एक माह से लगातार चित्रकूट जिले में नाबालिग लड़कियों से वेश्यावृत्ति कराने की शिकायत मिल रही थी। इस पर दो महिला व दो पुरूष कर्मचारियों ने एक सप्ताह से मुख्यालय व आसपास निगरानी की। पुष्टि होने पर एक नवंबर को पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर छापा डालने की मांग की गई। इस पर पुलिस व संस्था के कर्मचारियों ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया। शुक्रवार को दोपहर में संस्था के दो पुरुष कर्मचारी ग्राहक बनकर बदनाम गली में पहुंचे। वहां दो स्थानों पर लड़कियों के साथ अन्य ग्राहक की मौजूदगी पर युवकों ने अपनी महिला कर्मचारियाें को सूचना दी। इस पर एसपी द्वारा गठित टीम ने बदनाम गली में छापा मारा और सात लड़कियों व दो ग्राहकों को पकड़ लिया। सीओ ने बताया कि जिले में वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने की सूचनाएं मिली हैं। ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई होगी।
नाबालिगों को वेश्यावृत्ति के धंधे में जाने से रोकने की दिशा में काम करने वाली ऊंटी की संस्था के इलाहाबाद ब्रांच मैनेजर सुरेंद्र सहारे ने बताया कि ऐसी लड़कियों को बचाकर उनके पुनर्वास का इंतजाम किया जाता है। संस्था के कोलकाता, पुणे व ऊंटी में प्रशिक्षण केंद्र हैं। जहां समाज से ठुकराई अथवा मजबूर लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रशिक्षण मिलता है।
बदनाम गली में वेश्यावृत्ति कराने की शिकायत पर सीओ राजापुर बृजराज सिंह के नेतृत्व में कोतवाल सत्यपाल सिंह, महिला थाना प्रभारी मधुसूदन दीक्षित और सहप्रभारी रीता यादव ने पुलिस कर्मियों के साथ छापा मारा गया। पुलिस को देखते ही मौजूद लोग इधर-उधर छिपने लगे। पुलिस टीम ने तीन कमरों को खुलवाया जहां से सात लड़कियां पकड़ी गई। इनमें से कुछ नाबालिग होने की आशंका है। हालांकि इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट आने पर होगी। इसके अलावा मौके पर बाबूपुर पहाड़ी के सुशील सिंह और आनंद सिंह को ग्राहक के रूप में पकड़ा। कोतवाल ने बताया कि अनैतिक देह व्यापार के रैकेट संचालन की बात सामने आई है। सात लड़कियां पकड़ी गईं हैं जो खुद को बंादा-चित्रकूट जिले की ही निवासी बता रही हैं। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।