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ट्रेन की चपेट में आए तेंदुए की मौत
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फोटो-7- मुंबई हावड़ा रेलमार्ग के टिकरिया मारकुंडी रेललाइन ट्रेन से कटने के बाद पड़ा तेंदुआ का शरी?
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग के मारकुंडी-सतना ट्रैक पर रानीपुर वन्यजीव विहार क्षेत्र के पास एक तेंदुआ ट्रेन से कटकर मौत हो गई। ट्रैकमैनों की सूचना पर चित्रकूट व सतना जिले की वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच की। तेंदुए का सिर, शरीर से अलग हो गया था। टीम ने शव को मारकुंडी वन रेंज कार्यालय भिजवाया। मंगलवार को पांच डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम करेगी।
रानीपुर वन्य जीव विहार के पास मारकुंडी वन रेंज में मुंबई हावड़ा रेल मार्ग के डाउन ट्रैक पर डॉट पुल नंबर सात के पास रविवार की देर रात सतना से मानिकपुर की ओर जा रही ट्रेन की चपेट में एक तेंदुआ आ गया। ट्रेेन से टकराते ही तेंदुए का धड़ रेल पटरियों के बीच लगभग 20 मीटर के रेंज में तितर बितर हो गया जबकि शेष हिस्सा भी पटरी के दूसरी ओर पड़ा रहा। पेट्रेालिंग कर रहे ट्रैकमैनों ने इसकी जानकारी मारकुंडी स्टेशन मास्टर को दी। इसके बाद मारकुंडी वन क्षेत्र के रेंजर रमेश यादव, मझगवंा आरपीएफ प्रभारी हरफूल सिंह भदाला आदि रात लगभग एक बजे मौके पर पहुंचे।
तेंदुए के अवशेष को एकत्र कर वनकर्मी मारकुंडी वनरेंज कार्यालय ले गए। वहीं सोमवार सुबह डीएफओ कैलाश प्रकाश घटनास्थल पर पहुंचे। लगभग दो घंटे तक जांच पड़ताल के दौरान रेल पटरियों के बीच तेँदुए के खाल के टुकड़े, बाल व शरीर के अन्य अंगों को एकत्र किया गया। चित्रकूट वन विभाग के डीएफओ ने बताया कि रेलवे विभाग को पत्र लिखकर इस वन क्षेत्र में ट्रेेनोें से जंगली जानवरोें को बचाने के लिए कहा जाएगा। घटनास्थल के पास ही रेलवे का डाट पुल है। जिसे ग्रामीणों ने अन्ना मवेशी के चलते झाड़ियों से बंद कर दिया था। ऐसे में संभावना है कि यदि यह पुल मार्ग खुला होता तो शायद तेंदुआ नीचे से ही उस पार चला जाता। वह रेल ट्रैक की ओर न जाता तो उसकी जान बच सकती थी। मंगलवार को कानपुर चिडियाघर के डॉ. आरके सिंह के अलावा चित्रकूट के चार डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा।
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रानीपुर वन्य जीव विहार के पास मारकुंडी वन रेंज में मुंबई हावड़ा रेल मार्ग के डाउन ट्रैक पर डॉट पुल नंबर सात के पास रविवार की देर रात सतना से मानिकपुर की ओर जा रही ट्रेन की चपेट में एक तेंदुआ आ गया। ट्रेेन से टकराते ही तेंदुए का धड़ रेल पटरियों के बीच लगभग 20 मीटर के रेंज में तितर बितर हो गया जबकि शेष हिस्सा भी पटरी के दूसरी ओर पड़ा रहा। पेट्रेालिंग कर रहे ट्रैकमैनों ने इसकी जानकारी मारकुंडी स्टेशन मास्टर को दी। इसके बाद मारकुंडी वन क्षेत्र के रेंजर रमेश यादव, मझगवंा आरपीएफ प्रभारी हरफूल सिंह भदाला आदि रात लगभग एक बजे मौके पर पहुंचे।
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तेंदुए के अवशेष को एकत्र कर वनकर्मी मारकुंडी वनरेंज कार्यालय ले गए। वहीं सोमवार सुबह डीएफओ कैलाश प्रकाश घटनास्थल पर पहुंचे। लगभग दो घंटे तक जांच पड़ताल के दौरान रेल पटरियों के बीच तेँदुए के खाल के टुकड़े, बाल व शरीर के अन्य अंगों को एकत्र किया गया। चित्रकूट वन विभाग के डीएफओ ने बताया कि रेलवे विभाग को पत्र लिखकर इस वन क्षेत्र में ट्रेेनोें से जंगली जानवरोें को बचाने के लिए कहा जाएगा। घटनास्थल के पास ही रेलवे का डाट पुल है। जिसे ग्रामीणों ने अन्ना मवेशी के चलते झाड़ियों से बंद कर दिया था। ऐसे में संभावना है कि यदि यह पुल मार्ग खुला होता तो शायद तेंदुआ नीचे से ही उस पार चला जाता। वह रेल ट्रैक की ओर न जाता तो उसकी जान बच सकती थी। मंगलवार को कानपुर चिडियाघर के डॉ. आरके सिंह के अलावा चित्रकूट के चार डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा।
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