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जहर खिलाकर छह मोरों को मार डाला

Thu, 18 May 2017 12:09 AM IST
जहर खिलाकर छह मोरों को मार डाला
जहर खिलाकर छह मोरों को मार डाला Updated Thu, 18 May 2017 12:09 AM IST
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Killing pecock by feeding poison
मृत पड़े आधा दर्जन मोर - फोटो : अमर उजाला

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मंदाकिनी नदी के तट पर मोरों को घुमंतू जाति के युवकों ने अनाज में जहर मिलाकर खिला दिया। जिससे छह की मौत हो गई। एक किसी तरह जिंदा बच गया। जिसका इलाज किया जा रहा। मोर राष्ट्रीय पक्षी है इसके शिकार पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

इस मामले में जीव जंतु अधिनियम के तहत अज्ञात युवकों के खिलाफ वन विभाग ने मामला दर्ज किया है। मृतक मोरों का पोस्टमार्टम मुख्य पशु चिकि त्सालय के तीन डॉक्टरों की टीम ने किया है। घटना स्थल पर जहर मिले अनाज के दाने भी मिले हैं।
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बुधवार को शहर से लगे कपसेठी गांव के मंदाकिनी नदी के तट पर सुबह सात  मोर मृत अवस्था में पडे़ थे। इसकी सूचना 100 नम्बर पर पुलिस और वन विभाग को दी गई। वनाधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे तो देखा कि मोरों में पांच की मौत हो चुकी है दो जिंदा हैं। सभी को उठाकर मुख्य पशु चिकित्सालय ले आए। जहां बचे दो मोर में एक की मौत हो गई। एक का इलाज किया जा रहा है।
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मक्के के दाने में मिलाया जहर
चित्रकूट। मौके पर पहुंचे वन रेंजर नरेंद्र सिंह  व वन दरोगा शिवनारायण श्रीवास्तव व कर्मचारी धनराज यादव ने बताया कि मोर को गेंहू व मक्के के दानों में जहर मिलाकर नदी किनारे चुगने के लिए रखा गया। इसी दौरान वहंा पहुंचे मोरों ने दाने चुगे तो जहर के कारण आधा दर्जन की मौत हो गई। घटना स्थल पर गेंहू व मक्के के दाने पड़े मिले हैं। जिनमें जहर मिला हुआ है। वन अधिकारियों ने दावा किया है कि घुमंतु जाति शिलाजीत समुदाय के लोगों ने मोरों को जहर देकर मारा है।
 
चार नर दो मादा मोर थे
डॉ. एच एस बबेले ने बताया कि मतृक मोर में चार नर व दो मादा थे। वन विभाग के तरफ से उनको लिखित रूप से दिया गया है कि मोर को जहर देकर मारा गया है। जिसके आधार पर पोस्टमार्टम किया गया है।


क्यों करते हैं शिकार
जानकारों का मानना है कि मोर के गोश्त और पंखों के अलावा शरीर की कई चीजों की तस्करी होती है। इसे बाजार में अच्छा दाम मिलता है। वन रेंजर नरेंद्र सिंह ने बताया कि मोर का शिकार करने वाले लोग उसके गोश्त की दवा बनाते हैं। कई बीमारी में इसका गोश्त लाभदायक बताया गया है। मोर के सिर पर लगी कलगी कीमती होती है। इसके अलावा मोर के पंखे व नाखून भी बेचे जाते हैं।
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