{"_id":"5741f6704f1c1bb615690c64","slug":"india-is-intellectual-country","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘ज्ञान में डूबा देश है भारत’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘ज्ञान में डूबा देश है भारत’
ब्यूरो अमर उजाला चित्रकूट
Updated Sun, 22 May 2016 11:42 PM IST
विज्ञापन
mo-orari bapu
- फोटो : amar ujala buerau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धर्मनगरी के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में चल रही संत मोरारी बापू की रामकथा का दूसरा दिन ’’विश्वभरण पोषण कर जोई, ताकर नाम भरत अस होई’’ चौपाई पर केंद्रित रहा। संत मोरारी बापू ने इस चौपाई की व्याख्या करते हुए गोस्वामी तुलसीदास का संदर्भ देते हुए कहा भगवान राम के चरण कमल में जिनका मन रमा है वो भरत है।
उन्होने कहा भारत देश का एक टुकड़ा नहीं बल्कि ज्ञान में डूबा देश है। संत श्री ने भरत के चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा जो दिनरात भक्ति में डूबा रहता है उसका नाम भरत होता है। यही भरत का भाव है। वेद की महिमा अतुलनीय है लेकिन मानस के बिना रामकथा भी अधूरी है। श्री मदभागवत गीता में भरत तो है लेकिन जड़ भरत है।
मानस में जो भरत है वो जड़ को चैतन्य और चैतन्य को जड़ बना देने वाले हैं। जो ज्ञान में रत है उसे भरत कहते है। मानस के जितने भी प्रेमी है उन सबको एक जगह इकठ्ठा कर सब के विविध प्रेम को एकत्रित करें और देखें कि वो सब एक ही जगह भरत में मिलेगें।
विज्ञापन
रामकथा के दौरान संत मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासा का समाधान भी किया। रामकथा के पहले और अंत में मधुर भक्ति गीतों पर श्रद्धालु भावविभोर कर नाचने लगे। रामकथा के दौरान आयोजक मंडल श्रीराम कथा प्रेम यज्ञ समिति के सदस्य कृष्ण कुमार जालान, अवधेश खेमका और अखिलेश खेमका मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होने कहा भारत देश का एक टुकड़ा नहीं बल्कि ज्ञान में डूबा देश है। संत श्री ने भरत के चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा जो दिनरात भक्ति में डूबा रहता है उसका नाम भरत होता है। यही भरत का भाव है। वेद की महिमा अतुलनीय है लेकिन मानस के बिना रामकथा भी अधूरी है। श्री मदभागवत गीता में भरत तो है लेकिन जड़ भरत है।
विज्ञापन
मानस में जो भरत है वो जड़ को चैतन्य और चैतन्य को जड़ बना देने वाले हैं। जो ज्ञान में रत है उसे भरत कहते है। मानस के जितने भी प्रेमी है उन सबको एक जगह इकठ्ठा कर सब के विविध प्रेम को एकत्रित करें और देखें कि वो सब एक ही जगह भरत में मिलेगें।
विज्ञापन
रामकथा के दौरान संत मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासा का समाधान भी किया। रामकथा के पहले और अंत में मधुर भक्ति गीतों पर श्रद्धालु भावविभोर कर नाचने लगे। रामकथा के दौरान आयोजक मंडल श्रीराम कथा प्रेम यज्ञ समिति के सदस्य कृष्ण कुमार जालान, अवधेश खेमका और अखिलेश खेमका मौजूद रहे।