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चित्रकूट: क्रय केंद्रों व गल्ला मंडी में धान बेचने नहीं आ रहे किसान
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गल्ला मंडी परिसर में धान खरीद केंद्र पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। जिले में सरकारी धान क्रय केंद्र खुल गए हैं, लेकिन इनमें सन्नाटा छाया हुआ है। वहीं गल्ला मंडी में भी किसान धान बेचने नहीं आ रहे हैं। इस बारे में आढ़तियों का मानना है कि मौजूदा समय में अधिकतर अनाजों के दाम कम हैं। इसलिए किसान अभी धान अपने-अपने घरों में ही रखे हुए हैं।
जिले में आठ सरकारी धान खरीद केंद्र खोले गए हैं। दो अन्य केंद्र 25 अक्तूबर से खोलने की योजना है। केंद्रों में धान की खरीद के लिए सरकारी रेट 1868 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके बाद भी इन केंद्रों में सन्नाटा छाया हुआ है। इसमें किसान मात्र ऑनलाइन ही पंजीयन करा रहे हैं।
गल्ला मंडी के आढ़ती गुलाब गुप्ता व राजेश केसरवानी ने बताया कि इस समय अधिकतर अनाजों के दाम गिरे हुए हैं। गेहूं पिछले साल 1900 रुपये क्विंटल बिकता था। इस साल 14 सौ रुपये में बिक रहा है। तिल पिछले साल नौ हजार रुपये क्विंटल बिका था।
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इस बार सात हजार रुपये में बिक रहा है। इससे किसान डरा हुआ है, उनका मानना है कि सभी अनाजों के दाम कम हैं, इसलिए धान भी कम दामों में बिकेगा। इसीलिए किसान धान बेचने नहीं आ रहा है।
शहर के गल्लामंडी में विपणन शाखा से खुले धान केंद्र के प्रभारी इसरार अहमद ने बताया कि अभी एक भी किसान धान बेचने नहीं आया है। 90 किसानों ने पंजीकरण जरूर करा लिया है।
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जिले में आठ सरकारी धान खरीद केंद्र खोले गए हैं। दो अन्य केंद्र 25 अक्तूबर से खोलने की योजना है। केंद्रों में धान की खरीद के लिए सरकारी रेट 1868 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके बाद भी इन केंद्रों में सन्नाटा छाया हुआ है। इसमें किसान मात्र ऑनलाइन ही पंजीयन करा रहे हैं।
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गल्ला मंडी के आढ़ती गुलाब गुप्ता व राजेश केसरवानी ने बताया कि इस समय अधिकतर अनाजों के दाम गिरे हुए हैं। गेहूं पिछले साल 1900 रुपये क्विंटल बिकता था। इस साल 14 सौ रुपये में बिक रहा है। तिल पिछले साल नौ हजार रुपये क्विंटल बिका था।
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इस बार सात हजार रुपये में बिक रहा है। इससे किसान डरा हुआ है, उनका मानना है कि सभी अनाजों के दाम कम हैं, इसलिए धान भी कम दामों में बिकेगा। इसीलिए किसान धान बेचने नहीं आ रहा है।
शहर के गल्लामंडी में विपणन शाखा से खुले धान केंद्र के प्रभारी इसरार अहमद ने बताया कि अभी एक भी किसान धान बेचने नहीं आया है। 90 किसानों ने पंजीकरण जरूर करा लिया है।