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Chitrakoot News: पेंशनरों के नाम पर बैंकों में फीड कराए फर्जी खाता नंबर
Wed, 14 Jan 2026 12:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Wed, 14 Jan 2026 12:00 AM IST
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चित्रकूट। कोषागार घोटाले में विभागीय कर्मचारियों ने पेंशनरों के खातों में फर्जी या दूसरे व्यक्तियों के खाता नंबर फीड कर दिए। इस तरह उनके खातों में आने वाला एरियर हड़प लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, कोषागार कर्मियों ने मृतक पेंशनरों के खातों से संबंधित जानकारी में हेरफेर कर बिचौलियों के खाते नंबर फीड करवा दिए। इसके बाद, एरियर के नाम पर बड़ी रकम इन बिचौलियों के खातों में भेज दी गई, जिसे बाद में निकालकर आपस में बांट लिया गया। यह गोरखधंधा कई सालों से चल रहा था, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। इस गबन में कोषागार कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है।
इस संबंध में कोषागार कर्मचारी भी कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं। अब बैंकों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) अनुराग शर्मा ने बताया कि बैंक में पैसे भेजने से पहले आईएफएससी कोड, नाम और खाता नंबर की जांच की जाती है। हालांकि, कुछ बैंकों में केवल नाम और आईएफएससी कोड ही चेक होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग से पैसा भेजने के लिए पहले से ही कमांड निर्धारित है। ऐसे में, यह जांच का विषय है कि इतनी बड़ी राशि कैसे बिना उचित सत्यापन के भेजी गई और निकाल भी ली गई।
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सूत्रों के अनुसार, कोषागार कर्मियों ने मृतक पेंशनरों के खातों से संबंधित जानकारी में हेरफेर कर बिचौलियों के खाते नंबर फीड करवा दिए। इसके बाद, एरियर के नाम पर बड़ी रकम इन बिचौलियों के खातों में भेज दी गई, जिसे बाद में निकालकर आपस में बांट लिया गया। यह गोरखधंधा कई सालों से चल रहा था, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। इस गबन में कोषागार कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है।
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इस संबंध में कोषागार कर्मचारी भी कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं। अब बैंकों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) अनुराग शर्मा ने बताया कि बैंक में पैसे भेजने से पहले आईएफएससी कोड, नाम और खाता नंबर की जांच की जाती है। हालांकि, कुछ बैंकों में केवल नाम और आईएफएससी कोड ही चेक होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग से पैसा भेजने के लिए पहले से ही कमांड निर्धारित है। ऐसे में, यह जांच का विषय है कि इतनी बड़ी राशि कैसे बिना उचित सत्यापन के भेजी गई और निकाल भी ली गई।
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