{"_id":"62b36074cdb07776b14a28ab","slug":"earth-is-drying-up-due-to-climate-change-chitrakoot-news-knp703767441","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलवायु परिवर्तन के कारण सूख रही भूमि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलवायु परिवर्तन के कारण सूख रही भूमि
विज्ञापन
चित्रकूट। बुंदेलखंड डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन ने पर्यावरण के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए बूढ़ा सेमरवार, नांदी तौरा, हरदौली रमपुरिया और भंभई में शिविर लगाया। यह शिविर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से लगाया गया। यहां जलवायु परिवर्तन से हो रहे नुकसान बताए गए।
पर्यावरणविद अशोक कुमार मिश्रा ने कहा कि बुंदेलखंड में अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर हैं। ग्रामीणों को कृषि उपज बढ़ाने के लिए कम पानी वाली खेती करनी चाहिए। बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए परंपरागत, वैज्ञानिक और विज्ञान साक्षरता के ढंग से खेती करनी चाहिए।
शंकर दयाल पयासी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण जगह-जगह भूमि सूख रही है पानी के स्रोत सूख रहे हैं। नदियों में पानी की कमी होने से नहरें सूख रही हैं। पर्यावरण का मतलब केवल पेड़-पौधे लगाना ही नहीं है, हम अपने पास-पड़ोस के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित एवं संरक्षित कर उनको फिर उपयोग में लाकर पर्यावरण के प्रति अपनी दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं।
विज्ञापन
डॉ. प्रभाकर सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड के ज्यादातर ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इससे कुपोषण, बाल मजदूरी और पलायन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे निपटने के लिए ग्रामवासियों को वैज्ञानिक तरीके से औषधीय प्रजाति के पौधे लगाने चाहिए। औषधीय खेती जैसे- सफेद मूसली, एलोवेरा की भी खेती वैज्ञानिक तरीके से करनी चाहिए। यहां विषय विशेषज्ञ लवलेश सिंह, रवि शंकर आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
पर्यावरणविद अशोक कुमार मिश्रा ने कहा कि बुंदेलखंड में अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर हैं। ग्रामीणों को कृषि उपज बढ़ाने के लिए कम पानी वाली खेती करनी चाहिए। बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए परंपरागत, वैज्ञानिक और विज्ञान साक्षरता के ढंग से खेती करनी चाहिए।
विज्ञापन
शंकर दयाल पयासी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण जगह-जगह भूमि सूख रही है पानी के स्रोत सूख रहे हैं। नदियों में पानी की कमी होने से नहरें सूख रही हैं। पर्यावरण का मतलब केवल पेड़-पौधे लगाना ही नहीं है, हम अपने पास-पड़ोस के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित एवं संरक्षित कर उनको फिर उपयोग में लाकर पर्यावरण के प्रति अपनी दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं।
विज्ञापन
डॉ. प्रभाकर सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड के ज्यादातर ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इससे कुपोषण, बाल मजदूरी और पलायन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे निपटने के लिए ग्रामवासियों को वैज्ञानिक तरीके से औषधीय प्रजाति के पौधे लगाने चाहिए। औषधीय खेती जैसे- सफेद मूसली, एलोवेरा की भी खेती वैज्ञानिक तरीके से करनी चाहिए। यहां विषय विशेषज्ञ लवलेश सिंह, रवि शंकर आदि मौजूद रहे।