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राजनीति में गए और फिर बिके नहीं ऐसे जनप्रतिनिधि के होने का क्या मतलब..

Fri, 22 Oct 2021 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 11:18 PM IST
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Do not give happiness, what does the fund mean...
कवि सम्मेलन के दौरान मौजूद श्रोत्रागण। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। दीनदयाल शोध संस्थान परिसर में पारंपरिक नृत्य एवं गायिकी केंद्रित तीन दिवसीय शरदोत्सव कार्यक्रम का समापन हुआ। अंतिम सत्र की संध्या में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में ओज एवं हास्य कवियों की प्रस्तुति ने मौजूद दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
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झांसी की कवि हेमा जैन बुखारिया ने रचना सुरसुरी की धार दूं श्रीकृष्ण की बाली हूं मैं, रणबांकुरी दुर्गा भवानी झांसी की रानी हूं मैं...सुनाकर खूब तालियां बटोरी। सतना के हास्य कवि रवि चतुर्वेदी ने अपने पाठ में कहा न्याय न दे जो विधि होने का क्या मतलब सुख न दे तो निधि होने का क्या मतलब, राजनीति में गए और फिर बिके नहीं ऐसे जनप्रतिनिधि के होने का क्या मतलब..। शरदोत्सव की समापन संध्या में निर्मोही अनि अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संतोषी अखाड़ा के महंत रामजी दास महाराज, रामानंद आश्रम के महंत बलराम दास महाराज, सुदामा कुटी के महंत रामलखन दास जी, पंजाबी भगवान आश्रम से नागा रामकुमार दास महाराज, विधायक मानिकपुर आनंद शुक्ला, सर्वोदय सेवा आश्रम चित्रकूट के अभिमन्यु भाई, अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के गोपाल भाई व दीनदयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष निखिल मुंडल आदि मौजूद रहे।
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