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चित्रकूट में गेहूं खरीद को लेकर असंतोष
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चित्रकूट। प्रादेशिक कोआपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) के जिला प्रबंधक निर्मल कुमार को गेहूं खरीद में आए दिन किसानों का माल न तौल पाना, बोरे की समस्या और भुगतान को लेकर हो रही शिकायतों का खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्हें चित्रकूटधाम मंडल के उपायुक्त व उप निबंधक सहकारिता दीपक सिंह ने कई अनियमितता पर निलंबित कर दिया है। इस संबंध में निलंबित जिला प्रबंधक ने सारे आरोपों को गलत बताकर इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
जिले में गेहूं व धान खरीद केंद्र कुल 39 बने थे। जिसमें 34 केंद्र पीसीएफ के थे। हर बार की तरह खरीद शुरू हुई तो इस बार कोई लक्ष्य निर्धारण नहीं था। इसके बावजूद जिले में 34 हजार 248 किसानों से 107996.467 मीट्रिक टन गेेहूं व नौ हजार 390 किसानों से 43853.729 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई। लेकिन हर दिन खरीद केंद्रों में कभी बोरा कभी गोदाम फुल होने की समस्या से खरीद में देरी हुई। कभी गोदाम प्रभारियों द्वारा चहेतों की पहले खरीद करना और भुगतान के लिए किसानों का भटकने की शिकायतें भी हुईं। इन सभी शिकायतों के आधार पर पीसीएफ प्रभारी का निलंबन किया गया है। इसकी जांच एक पखवारे में की जाएगी।
इस मामले को लेकर जिले में विभागीय खलबली मची है। कई लोगों ने दबी जुबान में कहा कि जिला प्रबंधक ने समय रहते कई स्थानीय स्तर की शिकायतों का निस्तारण नहीं किया जिससे यह निलंबन हुआ। इस संबंध में निलंबित जिला प्रबंधक निर्मल कुमार ने कहा कि उनके खिलाफ संभवत: विभागीय साजिश हो रही है। जिले के अधिकारियों से लेकर हर सचिव व अन्य ने खरीद केंद्र के काम पर संतुष्टि जताई। कई बार शासन प्रशासन स्तर से कुछ समस्यायें आईं जिनके बारे में उच्चाधिकारियों को बताया गया। जल्द उनका समाधान भी कराया गया। अब उनके ऊपर लगे आरोप एकपक्षीय हैं और गलत हैं। वह खुद जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
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जिले में गेहूं व धान खरीद केंद्र कुल 39 बने थे। जिसमें 34 केंद्र पीसीएफ के थे। हर बार की तरह खरीद शुरू हुई तो इस बार कोई लक्ष्य निर्धारण नहीं था। इसके बावजूद जिले में 34 हजार 248 किसानों से 107996.467 मीट्रिक टन गेेहूं व नौ हजार 390 किसानों से 43853.729 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई। लेकिन हर दिन खरीद केंद्रों में कभी बोरा कभी गोदाम फुल होने की समस्या से खरीद में देरी हुई। कभी गोदाम प्रभारियों द्वारा चहेतों की पहले खरीद करना और भुगतान के लिए किसानों का भटकने की शिकायतें भी हुईं। इन सभी शिकायतों के आधार पर पीसीएफ प्रभारी का निलंबन किया गया है। इसकी जांच एक पखवारे में की जाएगी।
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इस मामले को लेकर जिले में विभागीय खलबली मची है। कई लोगों ने दबी जुबान में कहा कि जिला प्रबंधक ने समय रहते कई स्थानीय स्तर की शिकायतों का निस्तारण नहीं किया जिससे यह निलंबन हुआ। इस संबंध में निलंबित जिला प्रबंधक निर्मल कुमार ने कहा कि उनके खिलाफ संभवत: विभागीय साजिश हो रही है। जिले के अधिकारियों से लेकर हर सचिव व अन्य ने खरीद केंद्र के काम पर संतुष्टि जताई। कई बार शासन प्रशासन स्तर से कुछ समस्यायें आईं जिनके बारे में उच्चाधिकारियों को बताया गया। जल्द उनका समाधान भी कराया गया। अब उनके ऊपर लगे आरोप एकपक्षीय हैं और गलत हैं। वह खुद जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
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