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Chitrakoot News: महर्षि वाल्मीकि आश्रम के पर्वत की भी श्रद्धालु करेंगे परिक्रमा
Wed, 03 Dec 2025 12:42 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Wed, 03 Dec 2025 12:42 AM IST
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12 सीकेटीपी-14- परिचय- महर्षि वाल्मीकि आश्रम लालापुर का स्थल। संवाद
जयंत श्रीवास्तव
चित्रकूट। भगवान कामतानाथ के कामदगिरि की ही तरह अब श्रद्धालु महर्षि वाल्मीकि आश्रम पर्वत की भी परिक्रमा कर सकेंगे। इसके लिए वहां पर परिक्रमा पथ बनाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग की भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा।
त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम माता जानकी व लक्ष्मण के संग वनवास काल में प्रयाग से चित्रकूट आए थे, तब महर्षि वाल्मीकि ने ही आश्रम की पहाड़ी शिखर पर रहने की सलाह उन्हें दी थी। यह वाल्मीकि आश्रम झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर लालापुर गांव के पास स्थित है। इसे वाल्मीकि की तपोस्थली व आश्रम के नाम से जाना पहचाना जाता है। इन दिनों इसे संवारने का प्रयास चल रहा है। पर्यटन विभाग इस आश्रम में महर्षि वाल्मीकि की विशालकाय प्रतिमा स्थापित कर चुका है। इसके साथ ही स्वागत द्वार और आश्रम तक पहुंचने सीढ़ियां भी बनाई गईं हैं।
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डेढ़ किमी लंबा बनेगा परिक्रमा पथ
महर्षि वाल्मीकि आश्रम के पर्वत के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाया जाएगा। पर्यटन विभाग के अनुसार यह पथ करीब डेढ़ किमी लंबा होगा। इसे इस तरह विकसित किया जाएगा जिससे दो लोग आसानी से आ-जा सकेंगे। इसमें वन विभाग की जमीन का इस्तेमाल होगा। पर्यटन विभाग ने वन विभाग से जमीन मांगीं है। यह जिले का दूसरा पर्वत होगा, जिसकी श्रद्धालु परिक्रमा कर सकेंगे।
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रमणीक स्थल के लिए जानी जाती पहाड़ी
चित्रकूट। घने जंगलों और शांत वातावरण से घिरा यह वाल्मीकि आश्रम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और इतिहास का भी प्रतीक है। चित्रकूट की इस भूमि में आज भी रामायण के युग की गूंज सुनाई देती है। पहाड़ी के नीचे वाल्मीकि नदी (ओहन नदी) बहती है। पहाड़ी के शिखर पर एक मंदिर है, जिसमें महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापित है। यहीं पर वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी, इसके दक्षिण-पूर्व में पार्श्व मार्ग में एक गुफा में अनेक प्रकार की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं।
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बोले जिम्मेदार-- --
महर्षि वाल्मीकि आश्रम के पर्वत को संवारने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पर्वत के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। बाद में इसे मंजूरी को शासन को भेजा जाएगा।
-आरके रावत, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी।
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चित्रकूट। भगवान कामतानाथ के कामदगिरि की ही तरह अब श्रद्धालु महर्षि वाल्मीकि आश्रम पर्वत की भी परिक्रमा कर सकेंगे। इसके लिए वहां पर परिक्रमा पथ बनाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग की भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा।
त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम माता जानकी व लक्ष्मण के संग वनवास काल में प्रयाग से चित्रकूट आए थे, तब महर्षि वाल्मीकि ने ही आश्रम की पहाड़ी शिखर पर रहने की सलाह उन्हें दी थी। यह वाल्मीकि आश्रम झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर लालापुर गांव के पास स्थित है। इसे वाल्मीकि की तपोस्थली व आश्रम के नाम से जाना पहचाना जाता है। इन दिनों इसे संवारने का प्रयास चल रहा है। पर्यटन विभाग इस आश्रम में महर्षि वाल्मीकि की विशालकाय प्रतिमा स्थापित कर चुका है। इसके साथ ही स्वागत द्वार और आश्रम तक पहुंचने सीढ़ियां भी बनाई गईं हैं।
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डेढ़ किमी लंबा बनेगा परिक्रमा पथ
महर्षि वाल्मीकि आश्रम के पर्वत के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाया जाएगा। पर्यटन विभाग के अनुसार यह पथ करीब डेढ़ किमी लंबा होगा। इसे इस तरह विकसित किया जाएगा जिससे दो लोग आसानी से आ-जा सकेंगे। इसमें वन विभाग की जमीन का इस्तेमाल होगा। पर्यटन विभाग ने वन विभाग से जमीन मांगीं है। यह जिले का दूसरा पर्वत होगा, जिसकी श्रद्धालु परिक्रमा कर सकेंगे।
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रमणीक स्थल के लिए जानी जाती पहाड़ी
चित्रकूट। घने जंगलों और शांत वातावरण से घिरा यह वाल्मीकि आश्रम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और इतिहास का भी प्रतीक है। चित्रकूट की इस भूमि में आज भी रामायण के युग की गूंज सुनाई देती है। पहाड़ी के नीचे वाल्मीकि नदी (ओहन नदी) बहती है। पहाड़ी के शिखर पर एक मंदिर है, जिसमें महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापित है। यहीं पर वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी, इसके दक्षिण-पूर्व में पार्श्व मार्ग में एक गुफा में अनेक प्रकार की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं।
बोले जिम्मेदार
महर्षि वाल्मीकि आश्रम के पर्वत को संवारने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पर्वत के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। बाद में इसे मंजूरी को शासन को भेजा जाएगा।
-आरके रावत, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी।

12 सीकेटीपी-14- परिचय- महर्षि वाल्मीकि आश्रम लालापुर का स्थल। संवाद