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चित्रकूट में आषाढ़ी अमावस्या पर प्रतिबंध लगने से श्रद्धालु नहीं लगा पाए मंदिरों की परिक्रमा

Sun, 21 Jun 2020 10:28 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2020 10:28 PM IST
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Devotees could not circumambulate the temples due to ban on Ashadhi Amavasya in Chitrakoot
फोटो-11- आषाढ़ माह की अमावस्या मेला स्थगित होने के बाद भी तमाम श्रद्घालु कामदगिरी प्रमुख द्वार पहु? - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट/खोही। कोरोना वायरस के कारण आषाढ़ी अमावस्या मेला पर प्रतिबंध लगने से श्रद्धालु मंदिरों के दर्शन सहित कामदगिरी की परिक्रमा नहीं लगा सके। धर्मनगरी क्षेत्र में कई स्थानों पर बैरीकेडिंग लगी रही। इसके बावजूद तमाम श्रद्धालु बाहर से ही मंदिरों के दर्शन कर कामदगिरी की परिक्रमा लगाई। सूर्य ग्रहण इसी दिन पड़ने के कारण मंदिर के पट बंद रहे। कोरोना संक्रमण से श्रद्धालुओं को बचाने के लिए यूपीएमपी की सीमा पर बैरिकेडिंग कर पुलिस बल तैनात रहा। जो लगातार श्रद्धालुओं को रामघाट व मंदिर की ओर जाने से रोकता रहा। इसके बावजूद कई मार्ग से श्रद्धालु रामघाट व मंदिर पहुंचे।
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आषाढ़ी अमावस्या पर भीड़ भाड़ न एकत्र हो जिसको देखते हुए धर्मनगरी क्षेत्र में श्रद्धालुओं के आने पर प्रतिबंध लगाया गया था। कई स्थानों पर बैरीकेटिंग लगाकर पुलिस के जवान खडे़ थे। जो आने वाले श्रद्धालुओं को लौटा दिया। जिससे रामघाट सहित मंदिरों व कामदगिरि परिक्रमा मार्ग में सन्नाटा छाया रहा। इसके बावजूद कुछ श्रद्धालु मंदिरों के बाहर से दर्शन किया।
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सूर्य ग्रहण का भी पड़ा असर
चित्रकूट। सूर्य ग्रहण अमावस्या के ही दिन पड़ने के कारण सूतक काल से ही शनिवार की रात्रि दस बजकर रात 9 बजकर 37 मिनट से सभी मंदिरों के कपाट बंद हो गये। जो सूर्य ग्रहण समाप्त होने पर रविवार की दोपहर दो बजकर 24 मिनट बाद समाप्त हुआ। यह जानकारी गायत्री शक्ति पीठ के प्रबंधक रामनारायण त्रिपाठी ने दी है।
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इसी प्रकार कामदगिरी मंदिर के प्रमुख संत मदनगोपाल दास व भगवतधाम के आचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया कि सूर्यग्रहण को नंगी आंखों से देखना हानिकारक होता है। इस समय के दौरान भगवान के भजन गाए जाते हैं और इसके बाद दान दक्षिणा की जाती है। रविवार को जिले भर में सूर्यग्रहण के समय आसमान पर बादल छा गए। कई घरों से लोगों ने चश्मा लगाकर सूर्य को देखने का प्रयास किया। बदली छाने से सूर्य देव की लुकाछिपी चलती रही।
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