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आखिरकार पुलिस ने मान ही लिया कि छूट आए प्रधानाध्यापक

Mon, 17 Jul 2017 11:03 PM IST
चित्रकूट
चित्रकूट Updated Mon, 17 Jul 2017 11:03 PM IST
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After all, the police took the assurance that the Principal
Shimla police
अमर उजाला फालोअप
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चित्रकूट। फि रौती के लिए डाकू ललित पटेल गैंग द्वारा अपहृत प्रधानाध्यापक की रिहाई से आखिरकार सोमवार को मप्र पुलिस ने पर्दा उठा दिया। पुलिस ने दावा किया कि डकै त लगातार घेराबंदी से डरकर अपहृत को कोल्हुआ जंगल के पास छोड़कर भाग गए हैं वहीं परिजनों ने बताया कि किसी तरह चार लाख रुपए पहुंचने के बाद ही गैंग जंगल में छोड़कर भागा है।
      गौरतलब है कि 9 जुलाई की रात को जिले की सीमा से सटे सतना मप्र के बरौंधा थाना क्षेत्र के मुठियादेव गांव से तीस हजार के इनामी डाकू ललित पटेल गैंग ने सरकारी स्कूल से प्रधानाध्यापक यशोदा प्रसाद कोल का अपहरण कर बीस लाख की फिरौती मांगी थी। दो दिन से यूपी पुलिस अधिकारियों का कहना था कि डाकूओं ने अपहृत को छोड़ दिया है लेकिन मप्र पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही थी। सोमवार को आईजी रींवा आशुतोष यादव व सतना एसपी राजेश हिंगडकर बरौंधा थाने पहुंचे। जहां थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने रविवार को कोल्हुआ जंगल में घेराबंदी कर डकैतों को ललकारा तो डर के कारण अपहृत को छोड़कर डाकू भाग गए। पुलिस ने फिरौती की मांग की बात से इंकार किया है। लगभग एक घंटे तक पुलिस अधिकारियों ने उससे बातचीत की फिर परिजनों के साथ गांव भेज दिया।
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दिन में आंख में बांधते थे पट्टी
चित्रकूट। डकैतों के चंगुल से छूटकर आए प्रधानाध्यापक काफी भावुक दिखे। फिरौती की बात पर नम आंखों से कहा कि बस जान बच गई अब क्या बताएं। परिजनों ने बताया कि चार लाख पहुंचने के बाद ही डाकूओं ने छोड़ा है। पुलिस ने लगातार डकैतों को घेरा जरूर है जिससे डकैत हर बार अडडा बदलते थे। अपहृत ने बताया रात में गैंग सरगना ललित उसे खाना देता था। गैंग में कुल पांच सदस्य थे। दिन में उसकी आंख मे पट्टी बांधकर एक सदस्य के साथ जंगल में रखा जाता था। गैंग 9 जुलाई से लगातार एक स्थान पर नहीं रूका। इस दौरान जंगल में उसके सामने डकैैतों से मिलने कोई नहीं आया। फिरौती के लिए घर परिवार में कई बार डकैतोें ने फोन से बातचीत कराई थी।
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