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असलहे भी थे लेकिन भय इतना कि बोलती नहीं निकली
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:42 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। मानिकपुर थाना क्षेत्र की टिकरिया रेलवे क्रासिंग पर डाकू बबुली कोल ने जिस समय सपा नेता के बेटे और रेलवे गेटमैन का अपहरण किया, उस समय दोनों गाड़ियों में कई और लोग भी मौजूद थे। गाड़ियों में कुछ असलहे भी थे, लेकिन डकैतों के डर से मानों सभी की सांसे थम गईं। किसी में असलहे उठाने की हिम्मत नहीं हुई।
बताया जाता है कि सपा नेता निर्भय सिंह उर्फ संतू सिंह ऊंचाडीह के पूर्व प्रधान मार्तंड सिंह के कहने पर ही दो वाहनों से सतना गए थे। स्थानीय होने के नाते सभी जानते थे कि इस सुनसान मार्ग पर डकैतों से खतरा है। इस कारण दोनों वाहन आगे-पीछे चल रहे थे।
सुरक्षा की दृष्टि से दोनों वाहनों में कुछ असलहे भी रखे थे। टिकरिया रेलवे क्रासिंग बंद होने पर जब दोनों वाहन वहां रुके तो डकैतों के डर से किसी की वाहन से उतरने की हिम्मत नहीं पड़ी। काफी देर तक हार्न बजाने के बाद भी जब फाटक नहीं खुला तो सपा नेता के बेेटे विजय सिंह ने सोचा शायद गेटमैन सो गया है।
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इस पर वह कार से उतरकर उसे जगाने चला गया। बस यही चूक हो गई। आसपास मौजूद डाकू बबुली कोल गैंग के बदमाशों ने उसको पकड़ने के बाद दोनों वाहन भी घेर लिए। बताया जाता है कि बबुली गैंग टिकरिया और मारकुंडी रेलवे स्टेशन के आसपास ही ज्यादा वारदात को अंजाम देता है, जिससे रेलकर्मी भी दहशत में रहते हैं।
जान बच गई भइया...
सपा नेता निर्भय सिंह खुद गाड़ी चला रहे थे। डाकुओं ने सबसे पहले उनका मोबाइल छीन लिया। इसके बाद बेटे विजय सिंह के दोनों हाथ बांधकर फाटक की ओर भेजा। उस समय गाड़ी में पूर्व प्रधान मार्तंड सिंह के अलावा मानिकपुर का एक अन्य व्यक्ति भी बैठा था।
डाकुओं को देख सभी की घिग्घी बंध गई। कुछ ऐसा ही हाल बोलेरो सवार ग्राम विकास अधिकारी जयप्रकाश सिंह, तकनीकी सहायक सुशील कुमार, रोजगार मित्र सिंकरौ निवासी पिंटू समेत अन्य लोगों का रहा।
डकैतों ने वाहन के शीशे खुलवाकर असलहों के बल पर सबको घेर लिया। रविवार की सुबह मानिकपुर पहुंचे सभी चश्मदीदों की हालत खराब थी। किसी के मुंह से कुछ बोल निकल रहे थे। बार-बार एक ही बात कहते रहे जान बच गई भइया। एक बार तो लगा कि आज हम जिंदा नहीं बचेेंगे।
रेलवे अफसरों ने डाला डेरा
घटनास्थल टिकरिया गैंग नंबर-10 और फाटक नंबर-400 सतना मध्य प्रदेश में आने के कारण सतना आरपीएफ के एसआई अरुण रावत आधा दर्जन सिपाहियों के साथ अपहृतों की तलाश कर रहे। पीडब्ल्यूआई रशीद अहमद खान ने बताया कि घटना की जानकारी आला अफसरों को दे दी गई है। मानिकपुर आरपीएफ प्रभारी ओंकार सिंह भी डकैतों की तलाश में जुटे हैं।
मालगाड़ी समेत चार ट्रेनें प्रभावित
जब डकैतों ने गेटमैन बलवंत सिंह का अपहरण कर लिया तो काफी देर तक केबिन में टेलीफोन की घंटी बजती रही। फोन रिसीव न होने से कई ट्रेनें सतना-इलाहाबाद मार्ग पर खड़ी हो गईं।
अनहोनी की आशंका पर मारकुंडी स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह ने वरिष्ठ खंड अभियंता श्रीपाल को सूचना दी। इस पर श्रीपाल मौके पर पहुंचे तो वहां कोई नहीं था। डकैत भी जा चुके थे। इसके बाद स्टेशन पर कासन आर्डर देकर ट्रेन गुजारने को कहा गया। गेट पर दूसरे कर्मचारी रामचरित ब्रह्मचारी की ड्यूटी लगाई गई। गेटमैन के अपहरण के कारण मालगाड़ी के अलावा तीन अन्य ट्रेनें प्रभावित रहीं।
डकैतों के डर से असलहे उठाने की नहीं पड़ी हिम्मत
सपा नेता के पुत्र के साथ दोनों गाड़ियों में थे कई और लोग
पूर्व प्रधान के भाई के तेरहवीं संस्कार से गांव लौट रहे थे
चित्रकूट। मानिकपुर थाना क्षेत्र की टिकरिया रेलवे क्रासिंग पर डाकू बबुली कोल ने जिस समय सपा नेता के बेटे और रेलवे गेटमैन का अपहरण किया, उस समय दोनों गाड़ियों में कई और लोग भी मौजूद थे। गाड़ियों में कुछ असलहे भी थे, लेकिन डकैतों के डर से मानों सभी की सांसे थम गईं। किसी में असलहे उठाने की हिम्मत नहीं हुई।
बताया जाता है कि सपा नेता निर्भय सिंह उर्फ संतू सिंह ऊंचाडीह के पूर्व प्रधान मार्तंड सिंह के कहने पर ही दो वाहनों से सतना गए थे। स्थानीय होने के नाते सभी जानते थे कि इस सुनसान मार्ग पर डकैतों से खतरा है। इस कारण दोनों वाहन आगे-पीछे चल रहे थे।
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सुरक्षा की दृष्टि से दोनों वाहनों में कुछ असलहे भी रखे थे। टिकरिया रेलवे क्रासिंग बंद होने पर जब दोनों वाहन वहां रुके तो डकैतों के डर से किसी की वाहन से उतरने की हिम्मत नहीं पड़ी। काफी देर तक हार्न बजाने के बाद भी जब फाटक नहीं खुला तो सपा नेता के बेेटे विजय सिंह ने सोचा शायद गेटमैन सो गया है।
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इस पर वह कार से उतरकर उसे जगाने चला गया। बस यही चूक हो गई। आसपास मौजूद डाकू बबुली कोल गैंग के बदमाशों ने उसको पकड़ने के बाद दोनों वाहन भी घेर लिए। बताया जाता है कि बबुली गैंग टिकरिया और मारकुंडी रेलवे स्टेशन के आसपास ही ज्यादा वारदात को अंजाम देता है, जिससे रेलकर्मी भी दहशत में रहते हैं।
जान बच गई भइया...
सपा नेता निर्भय सिंह खुद गाड़ी चला रहे थे। डाकुओं ने सबसे पहले उनका मोबाइल छीन लिया। इसके बाद बेटे विजय सिंह के दोनों हाथ बांधकर फाटक की ओर भेजा। उस समय गाड़ी में पूर्व प्रधान मार्तंड सिंह के अलावा मानिकपुर का एक अन्य व्यक्ति भी बैठा था।
डाकुओं को देख सभी की घिग्घी बंध गई। कुछ ऐसा ही हाल बोलेरो सवार ग्राम विकास अधिकारी जयप्रकाश सिंह, तकनीकी सहायक सुशील कुमार, रोजगार मित्र सिंकरौ निवासी पिंटू समेत अन्य लोगों का रहा।
डकैतों ने वाहन के शीशे खुलवाकर असलहों के बल पर सबको घेर लिया। रविवार की सुबह मानिकपुर पहुंचे सभी चश्मदीदों की हालत खराब थी। किसी के मुंह से कुछ बोल निकल रहे थे। बार-बार एक ही बात कहते रहे जान बच गई भइया। एक बार तो लगा कि आज हम जिंदा नहीं बचेेंगे।
रेलवे अफसरों ने डाला डेरा
घटनास्थल टिकरिया गैंग नंबर-10 और फाटक नंबर-400 सतना मध्य प्रदेश में आने के कारण सतना आरपीएफ के एसआई अरुण रावत आधा दर्जन सिपाहियों के साथ अपहृतों की तलाश कर रहे। पीडब्ल्यूआई रशीद अहमद खान ने बताया कि घटना की जानकारी आला अफसरों को दे दी गई है। मानिकपुर आरपीएफ प्रभारी ओंकार सिंह भी डकैतों की तलाश में जुटे हैं।
मालगाड़ी समेत चार ट्रेनें प्रभावित
जब डकैतों ने गेटमैन बलवंत सिंह का अपहरण कर लिया तो काफी देर तक केबिन में टेलीफोन की घंटी बजती रही। फोन रिसीव न होने से कई ट्रेनें सतना-इलाहाबाद मार्ग पर खड़ी हो गईं।
अनहोनी की आशंका पर मारकुंडी स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह ने वरिष्ठ खंड अभियंता श्रीपाल को सूचना दी। इस पर श्रीपाल मौके पर पहुंचे तो वहां कोई नहीं था। डकैत भी जा चुके थे। इसके बाद स्टेशन पर कासन आर्डर देकर ट्रेन गुजारने को कहा गया। गेट पर दूसरे कर्मचारी रामचरित ब्रह्मचारी की ड्यूटी लगाई गई। गेटमैन के अपहरण के कारण मालगाड़ी के अलावा तीन अन्य ट्रेनें प्रभावित रहीं।
डकैतों के डर से असलहे उठाने की नहीं पड़ी हिम्मत
सपा नेता के पुत्र के साथ दोनों गाड़ियों में थे कई और लोग
पूर्व प्रधान के भाई के तेरहवीं संस्कार से गांव लौट रहे थे