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Chitrakoot News: हब बनाने से लकड़ी के खिलौने का बढ़ेगा कारोबार

Sat, 01 Feb 2025 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2025 11:48 PM IST
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Creating a hub will increase the business of wooden toys
लकड़ी के खिलौने की दुकान में खरीदारी करते श्रद्धालु। - फोटो : संवाद
चित्रकूट। केंद्र सरकार के बजट में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हब बनाने की घोषणा की गई। इससे यहां लकड़ी का खिलौना बनाने का कारोबार बढ़ेगा। स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। ओडीओपी में शामिल लकड़ी के खिलौने का व्यापार पांच करोड़ रुपये सलाना से अधिक है।
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लकड़ी के खिलौने बनाने का लघु उद्योग धर्मनगरी में आजादी से पहले से ही किया जा रहा है। इस कारोबार को सरकार ने एक जिला एक उत्पाद ओडीओपी में शामिल किया है। उद्योग विभाग का कहना है कि लकड़ी के खिलौनों का सालाना व्यापार पांच करोड़ 40 लाख रुपये का है। इसके बाद भी रंग-बिरंगे खिलौने बनाने वालों की जिंदगी बेरंग है। बजट में सरकार ने खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हब बनाने की बात कहीं है। इससे लकड़ी के खिलौना बनाने का कारोबार फिर से फूले-फलेगा।
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लकड़ी के खिलौना कारीगर धीरज कुमार और बलराम राजपूत ने सरकार के इस कदम से खुशी जताई है। कहा कि खिलौना उद्योग के लिए हब बनाने की व्यवस्था बजट में की गई है। इससे लकड़ी के खिलौने के कारोबार भी बढ़ेगा। स्थानीय युवकों को रोजगार मिलेगा।
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इन परेशानियों का हो समाधान तो निखरे व्यापार
इस लघु उद्योग में लगे शिल्पकारों को सरकार साल में एक बार 500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सब्सिडी वाली लकड़ी उपलब्ध कराती है। इतनी लकड़ी किसी कारीगर के लिए पर्याप्त नहीं होती है। रखरखाव की कमी के कारण भी कारीगर पूरे साल के लिए एक साथ लकड़ी नहीं खरीद पाते हैं। जो लकड़ी इन्हें मिलती है वह लंबे टुकड़ों में होती हैं। सरकार को इन समस्याओं का समाधान भी कराना होगा

तीस लाख की लागत के कारोबार में 300 से अधिक परिवार लगे हैं। यहां के खिलौने प्रयागराज, लखनऊ, दिल्ली पटना रांची आदि शहरों में प्रदर्शनी में खिलौने बिकने जाते हैं। इस खिलौना बनाने के काम में करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिला है।
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